छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक संकट गहराने पर कांग्रेस ने साय सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार से खाद की उपलब्धता पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की और किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया व पोटाश उपलब्ध कराने की अपील की।
रायपुर।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही उर्वरक की उपलब्धता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में खाद का संकट लगातार गहराता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया गया, तो इसका सीधा असर खरीफ की खेती और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जुलाई माह शुरू हो चुका है और प्रदेश के अधिकांश किसान धान की खेती की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन सोसायटियों में अब भी पर्याप्त मात्रा में डीएपी, यूरिया और पोटाश उपलब्ध नहीं है। किसान लगातार खाद के लिए भटक रहे हैं और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है।
आधे से भी कम सोसायटियों तक पहुंची खाद
सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया कि प्रदेश की आधे से भी कम सहकारी समितियों तक उर्वरक की आपूर्ति हो पाई है। ऐसे समय में जब मानसून दस्तक दे चुका है और किसान खेतों में बुआई की तैयारी कर रहे हैं, खाद की कमी उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है और खरीफ सीजन विशेष रूप से धान उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि किसानों को समय पर खाद नहीं मिलेगी, तो उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे पूरे वर्ष उनकी आय पर असर पड़ सकता है।
टोकन व्यवस्था खत्म, लेकिन संकट बरकरार
कांग्रेस ने सरकार की खाद वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। शुक्ला के अनुसार सरकार ने टोकन सिस्टम तो समाप्त कर दिया है, लेकिन किसानों को निर्धारित सीमा से अधिक खाद लेने की अनुमति अब भी नहीं है। दूसरी ओर खुले बाजार में भी पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में किसान सोसायटियों और निजी दुकानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है। सरकार लगातार पर्याप्त भंडारण का दावा कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
सरकार के दावों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस का कहना है कि खरीफ सीजन शुरू होने के बावजूद अब तक सभी सोसायटियों तक खाद नहीं पहुंच पाई है। शुक्ला ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार उर्वरक की नई खेप कब मंगाएगी, रेलवे रैक कब पहुंचेगी और किसानों तक खाद कब उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्र में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि बुआई के दौरान किसानों को खाद नहीं मिलेगी, तो बाद में उपलब्ध कराया गया उर्वरक भी अपेक्षित लाभ नहीं दे सकेगा।
पिछले खरीफ सीजन का भी दिया हवाला
प्रदेश कांग्रेस ने पिछले खरीफ सीजन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय राज्य में लगभग 14 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता थी, लेकिन शुरुआती दो महीनों में सरकार केवल 80 हजार मीट्रिक टन खाद ही उपलब्ध करा सकी थी। कांग्रेस का आरोप है कि पूरे सीजन के दौरान भी किसानों की जरूरत के अनुरूप उर्वरक की व्यवस्था नहीं हो सकी।
शुक्ला ने दावा किया कि पिछले वर्ष यूरिया, डीएपी और पोटाश की कमी के कारण कई किसानों को निजी व्यापारियों और बिचौलियों से बाजार मूल्य से तीन से चार गुना अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ी थी। इससे किसानों की लागत बढ़ी और आर्थिक बोझ भी बढ़ा।
इस वर्ष भी पर्याप्त स्टॉक नहीं होने का आरोप
कांग्रेस के अनुसार इस खरीफ सीजन में प्रदेश को लगभग 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता होगी, लेकिन सरकार अब तक अनुमानित मांग के मुकाबले 50 प्रतिशत स्टॉक भी उपलब्ध नहीं करा सकी है।
शुक्ला ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में खाद की किल्लत और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर धान उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा।
सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह प्रदेश में उर्वरकों की वास्तविक उपलब्धता, वितरण और भंडारण की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे। इससे किसानों और आम जनता को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि सरकार के पास कितना स्टॉक उपलब्ध है और आगे की क्या योजना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार भी सरकार ने पर्याप्त खाद उपलब्ध होने के दावे किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान खाद के लिए परेशान होते रहे। इस बार भी किसानों को भ्रमित करने के बजाय सरकार को पारदर्शिता के साथ वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए।
केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना
सुशील आनंद शुक्ला ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ को उसकी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने में केंद्र सरकार पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही है। उनका कहना है कि राज्य सरकार के मंत्री और भाजपा नेता पहले से ही बहाने तलाश रहे हैं, जबकि किसानों को समाधान की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि किसानों के हितों को राजनीति से ऊपर रखकर समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
किसानों की चिंता बढ़ी, समाधान की उम्मीद
खरीफ सीजन के दौरान समय पर उर्वरक उपलब्ध होना खेती की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदेश के हजारों किसान इन दिनों धान की बुआई की तैयारी में लगे हैं और उनकी सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि उन्हें समय पर डीएपी, यूरिया और पोटाश उपलब्ध हो सके।
फिलहाल खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आने वाले दिनों में सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है, इस पर किसानों के साथ-साथ पूरे कृषि क्षेत्र की नजर बनी हुई है। किसानों का मानना है कि यदि समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है, तभी खरीफ सीजन सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगा और कृषि उत्पादन प्रभावित होने से बचाया जा सकेगा।
