कोरबा के बालको नगर में एटक के नेतृत्व में श्रमिकों ने बालको प्रबंधन के खिलाफ एकदिवसीय धरना दिया। ठेका व स्थायी कर्मचारियों की मांगों, श्रमिक अधिकारों और लंबित समस्याओं को लेकर प्रदर्शन।
कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा में बुधवार को श्रमिक हितों को लेकर एक बार फिर आवाज़ बुलंद हुई। बालको नगर स्थित आज़ाद चौक, परसाभाठा में एल्युमिनियम एम्पलाइज यूनियन (एटक) के नेतृत्व में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन और आमसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थायी एवं ठेका श्रमिक एकत्र हुए और बालको प्रबंधन की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
धरना स्थल पर मौजूद श्रमिकों ने एकजुट होकर श्रमिक अधिकारों की रक्षा, लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने कहा कि लंबे समय से कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रबंधन के समक्ष रखे जा रहे हैं, लेकिन अब तक उनका संतोषजनक समाधान नहीं किया गया है।
श्रमिकों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
धरना-प्रदर्शन के दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बालको प्रबंधन श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उनका कहना था कि स्थायी और ठेका दोनों श्रेणी के कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद सकारात्मक पहल नहीं की जा रही है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि किसी भी उद्योग की सफलता उसके श्रमिकों की मेहनत पर निर्भर करती है। यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होगा तो इसका असर उत्पादन और औद्योगिक वातावरण दोनों पर पड़ सकता है।
स्थायी और ठेका कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल स्थायी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में ठेका श्रमिकों ने भी भाग लिया। दोनों वर्गों के कर्मचारियों ने एक मंच पर आकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज़ उठाई।
श्रमिकों का कहना था कि कार्यस्थल पर समान सम्मान, सुरक्षित वातावरण, श्रम कानूनों का प्रभावी पालन और लंबित समस्याओं का समाधान प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे भी आंदोलन जारी रखा जाएगा।
आमसभा में रखे गए श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दे
धरना-प्रदर्शन के बाद आयोजित आमसभा में यूनियन प्रतिनिधियों ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए श्रमिक हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों की आवाज़ को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसी उद्देश्य से यह शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि यूनियन आगे भी कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
बालको के मुख्य द्वार के सामने हुआ प्रदर्शन
यह एकदिवसीय धरना बालको कारखाने के मुख्य द्वार के सामने स्थित आज़ाद चौक, परसाभाठा में आयोजित किया गया, जहां सुबह से ही श्रमिकों का जुटना शुरू हो गया था। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने अपने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर विभिन्न मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं को प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
संवाद और समाधान की उम्मीद
धरना-प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि वे बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि प्रबंधन श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करे तो अधिकांश समस्याओं का समाधान आपसी सहमति से निकाला जा सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बालको प्रबंधन श्रमिकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगा। वहीं श्रमिकों ने भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों के लिए है।
आगे की रणनीति पर भी होगी चर्चा
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार यदि लंबित मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में आंदोलन की रूपरेखा को और व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि फिलहाल यूनियन प्रबंधन के साथ संवाद और सकारात्मक समाधान की दिशा में पहल की उम्मीद कर रही है।
श्रमिकों ने कहा कि उद्योग और श्रमिक दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए आवश्यक है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए, ताकि औद्योगिक माहौल बेहतर बना रहे और उत्पादन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
