मोर छइंया भुइंया’ छत्तीसगढ़ी सिनेमा के सबसे बड़े मील के पत्थर माने जाथे। जानव ये फिल्म कइसे सिरिफ 3 टॉकीज ले शुरू होके सिल्वर जुबली मनाइस, का रहिस बजट, कमई अऊ छॉलीवुड ला नई पहचान देवइया संघर्ष के पूरी कहानी।
रायपुर। (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)आज जब छत्तीसगढ़ी सिनेमा के बात होथे, त सबले पहिली जेन फिल्म के नाव मन मं आथे, वो ह आय ‘मोर छइंया भुइंया’। 27 अक्टूबर 2000 मं रिलीज होय ये फिल्म सिरिफ एक सिनेमा नइ रहिस, बल्कि छॉलीवुड के नई पहचान बनाय के शुरुआत रहिस। जेन बखत टॉकीज वाले छत्तीसगढ़ी फिल्म लगाय ले घबरावत रहिन, ओही बखत ये फिल्म अपन दम मं इतिहास रच दीस। सिरिफ तीन सिनेमाघर ले शुरू होय सफर 25 हप्ता तक चलिस अऊ छत्तीसगढ़ी सिनेमा ला नई दिशा दे दीस।
जब छत्तीसगढ़ी फिल्म बनाना सबसे बड़े रिस्क माने जावत रहिस
साल 2000 ले पहिली छत्तीसगढ़ी भाषा मं सिरिफ दू फिल्म बनाय गे रहिस – ‘कहि देबे संदेश’ (1965) अऊ ‘घर-द्वार’ (1971)। दूनों फिल्म मन बॉक्स ऑफिस मं सफल नइ हो पाइन। एही से टॉकीज मालिक मन के भरोसा टूट गे रहिस अऊ कोनो घलो छत्तीसगढ़ी फिल्म लगाय बर तैयार नइ रहय।
फिल्म के निर्देशक सतीश जैन बताथें कि रायपुर मं फिल्म लगाय बर टॉकीज खोजे मं भारी परेशानी होईस। आखिरकार बाबुलाल टॉकीज मं फिल्म लगाय के बात बनिस, फेर जिहां सामान्य किराया 25-30 हजार रुपिया रहिस, उहां मजबूरी के फायदा उठाके 50 हजार रुपिया किराया वसूले गीस।
पिता-पुत के भरोसा ले शुरू होइस इतिहास
‘मोर छइंया भुइंया’ के निर्माता शिवदयाल जैन रहिन, जेन ह निर्देशक सतीश जैन के पिता आय। फिल्म बनाय के बाद सतीश जैन खुद ट्रेन ले फिल्म के रील रायपुर लानिन। रेलवे स्टेशन मं पिता, कलाकार अऊ टीम के दूसर सदस्य मन फूल-माला ले उनकर स्वागत करिन। आज घलो ये घटना छत्तीसगढ़ी सिनेमा के इतिहास मं खास जगह रखथे।
हीरो खोजत-खोजत मिलिस अनुज शर्मा
फिल्म बर सतीश जैन एक नवा चेहरा खोजत रहिन। ओही बखत कोनो ह रामानुज के नाव सुझाइस। बाद मं रामानुज ह अनुज शर्मा के नाव ले पहिचान बनाइस। ये फिल्म ले उनकर करियर के शुरुआत होईस अऊ बाद मं वो छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय कलाकार मन मं शामिल हो गइन। आज अनुज शर्मा राजनीति मं घलो सक्रिय हवंय अऊ विधायक के जिम्मेदारी निभावत हवंय।
अनुज शर्मा एक इंटरव्यू मं बताय रहिन कि निर्देशक के संपर्क करे के बाद वो पूरा समय अभिनय मं देय के फैसला करिन अऊ ओही फैसला उनकर जिनगी बदल दीस।
मजबूत कलाकार अऊ यादगार गीत
फिल्म मं अनुज शर्मा संग समिता नायक, शेखर सोनी, जागृति रे, संजू साहू, आशीष शेंद्रे अऊ अनिल शर्मा जइसने कलाकार मन नजर आइन। संगीत बाबला बागची दे रहिन, जबकि गीत ला लक्ष्मण मस्तुरिया अऊ विनय बिहारी लिखिन। फिल्म के गीत आज घलो लोगन के जुबान मं सुनई देथे।
सिरिफ तीन टॉकीज ले शुरू होइस सफर
27 अक्टूबर 2000 के दिन ‘मोर छइंया भुइंया’ सिरिफ तीन सिनेमाघर मं रिलीज होईस। रायपुर के बाबुलाल टॉकीज, बिलासपुर के मनोहर टॉकीज अऊ दुर्ग के शारदा टॉकीज मं दर्शक मन पहली बार ये फिल्म देखिन।
सबले रोचक बात ये रहिस कि बिलासपुर के मनोहर टॉकीज त बंद पड़े रहिस। फिल्म के टीम खुद सफाई कराके टॉकीज ला चालू करवाइस, तभो ले फिल्म के प्रदर्शन संभव हो पाइस।
ओ बखत डिजिटल जमाना नइ रहिस। फिल्म रील मं चलत रहिस अऊ आज घलो सतीश जैन के पास वो समय के मूल रील सुरक्षित रखाय हवय।
आखिर कतका रहिस फिल्म के बजट?
फिल्म के निर्माता मन आज तक आधिकारिक बजट सार्वजनिक नइ करिन। हालांकि सतीश जैन के 2024 के इंटरव्यू मं जानकारी मिलथे कि ‘मोर छइंया भुइंया-2’ के बजट लगभग एक ले डेढ़ करोड़ रुपिया रहिस।
इंडस्ट्री के जानकार मन के मुताबिक साल 2000 मं बनाय पहिली ‘मोर छइंया भुइंया’ के लागत लगभग 20 ले 30 लाख रुपिया के बीच हो सकथे। ओ समय रील आधारित क्षेत्रीय फिल्म मन के बजट लगभग एतकेच होवत रहिस।
कमई मं रच दीस इतिहास
जेन टॉकीज मालिक मन छत्तीसगढ़ी फिल्म लगाय ले डरावत रहिन, ओही मन बाद मं फिल्म के सफलता देखके हैरान रहिगे।
‘मोर छइंया भुइंया’ लगातार 25 हप्ता तक सिनेमाघर मं चलिस अऊ छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पहली सिल्वर जुबली फिल्म बनगे।
ओ समय बॉक्स ऑफिस के आधिकारिक रिकॉर्ड नइ रहिस, एखर से कमई के सही आंकड़ा उपलब्ध नइ हे। फेर फिल्म ह अपन लागत निकालिस, निर्माता ला अच्छा मुनाफा देवाइस अऊ ये साबित कर दीस कि छत्तीसगढ़ी दर्शक अपन भाषा के सिनेमा ला पूरा समर्थन दे सकथें।
छॉलीवुड के नई पहचान बनिस ये फिल्म
‘मोर छइंया भुइंया’ के सफलता के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री मं नई ऊर्जा आइस। एक के बाद एक कई फिल्म बने लगिन अऊ छत्तीसगढ़ी कलाकार मन ला नई पहचान मिलिस।
फिल्म मं गांव के संस्कृति, लोकगीत, परंपरा, परिवार के रिश्ता अऊ छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सुंदरता ला जऊन ढंग ले दिखाय गे, ओ ह दर्शक मन के दिल जीत लीस।
यही सफलता के बाद ‘मोर छइंया भुइंया’ के दूसरा अऊ तीसरा भाग घलो बनाय गीस। ‘मोर छइंया भुइंया-2’ साल 2024 मं रिलीज होइस, जबकि ‘मोर छइंया भुइंया-3’ घलो सिनेमाघर तक पहुंचिस।
25 बछर बाद घलो कम नइ होइस लोकप्रियता
समय बदलिस, तकनीक बदलिस, फेर ‘मोर छइंया भुइंया’ के लोकप्रियता आज घलो बनेच हवय। फिल्म के गीत ‘मया के मौसम’ अऊ ‘आइसक्रीम खाके’ यूट्यूब मं लाखों लोग देख चुके हवंय। ए बात एखर गवाही देथे कि ये फिल्म आज घलो नई पीढ़ी मं अपन जगह बनाय रखे हवय।
काबर खास माने जाथे ‘मोर छइंया भुइंया’?
ये फिल्म सिरिफ मनोरंजन तक सीमित नइ रहिस। राज्य गठन के ठीक पांच दिन पहिली रिलीज होय ये फिल्म छत्तीसगढ़ी अस्मिता अऊ संस्कृति के प्रतीक बनगे।
निर्देशक सतीश जैन के कहना हवय कि छत्तीसगढ़ी फिल्म हमेशा परिवार ला ध्यान मं रखके बनाय जाथे, जिहां महिला, बुजुर्ग अऊ छोटे मनखे सब्बो एक संग बइठके देख सकंय।
आज जब छॉलीवुड के इतिहास लिखे जाथे, त ‘मोर छइंया भुइंया’ के नाम बिना वो कहानी अधूरी माने जाथे। संघर्ष, भरोसा अऊ मेहनत ले बनाय ये फिल्म साबित कर दीस कि अगर कहानी अपन माटी ले जुड़ाय होय, त दर्शक जरूर अपनायथें। यही कारण आय कि 25 बछर बाद घलो ‘मोर छइंया भुइंया’ छत्तीसगढ़ी सिनेमा के सबसे बड़े मील के पत्थर मं गिने जाथे।
