(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) | छत्तीसगढ़ मं समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लागू करे के दिशा मं राज्य सरकार अब तेजी ले काम शुरू कर दिस हे। सरकार के बनाय उच्चस्तरीय समिति अब अइसन राज्य मन के अनुभव अउ मॉडल के गहराई ले अध्ययन करही, जिहां यूसीसी लागू हो चुके हे या फिर ओकर लागू करे बर ठोस पहल करे गे हे।
सरकार के मानना हे कि दूसर राज्य मन के अनुभव ले सीख लेकर छत्तीसगढ़ के सामाजिक, सांस्कृतिक अउ कानूनी परिस्थिति के मुताबिक एक मजबूत अउ व्यवहारिक प्रारूप तैयार करे जा सकथे।
गोवा अउ उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल के होही विस्तृत अध्ययन
समिति सबसे जियादा ध्यान गोवा अउ उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल ऊपर देही। गोवा मं कई दशक ले समान नागरिक संहिता लागू हे, जबकि उत्तराखंड हाल के बछर मं अपन यूसीसी कानून लागू करके देशभर मं चर्चा के विषय बनिस।
ए दूनों राज्य के कानूनी व्यवस्था, लागू करे के प्रक्रिया, प्रशासनिक अनुभव अउ जनता ऊपर पड़े असर के विस्तार ले अध्ययन करे जाही। ए अध्ययन के आधार ऊपर छत्तीसगढ़ बर घलो एक व्यवहारिक अउ प्रभावी प्रारूप तैयार करे के कोशिश होही।
गुजरात, असम अउ मध्यप्रदेश ले घलो ली जाही सीख
सिरिफ गोवा अउ उत्तराखंड तक सीमित नई, बल्कि समिति गुजरात, असम अउ मध्यप्रदेश मं यूसीसी के संबंध मं गठित समिति मन के रिपोर्ट, सुझाव अउ अनुभव के घलो विश्लेषण करही।
इन राज्य मन मं होय अध्ययन ले ए बात समझे के कोशिश होही कि समान नागरिक संहिता लागू करे के दौरान कोन-कोन चुनौती सामने आ सकथे अउ ओकर समाधान कइसने निकाले जा सकथे।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के हाथ मं जिम्मेदारी
राज्य सरकार ए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ला सौंपे हे। समिति के अध्यक्ष के रूप मं वो पूरा प्रक्रिया के नेतृत्व करही अउ अंतिम रिपोर्ट सरकार ला सौंपही।
समिति मं अनुभवी प्रशासनिक अउ कानूनी विशेषज्ञ मन घलो शामिल हवंय। एमा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार अउ सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप मं काम करथें।
सरकार के मानना हे कि अनुभवी सदस्य मन के मार्गदर्शन ले तैयार होय प्रारूप कानूनी रूप ले मजबूत अउ व्यवहारिक होही।
समाज के अलग-अलग वर्ग ले ली जा सकथे सुझाव
जानकार मन के मुताबिक समिति सिरिफ कानूनी अध्ययन तक सीमित नई रहय। संभावना हे कि आने वाले समय मं अलग-अलग सामाजिक संगठन, धार्मिक प्रतिनिधि, महिला संगठन, विधि विशेषज्ञ अउ आम नागरिक मन ले घलो सुझाव मांगे जा सकथे।
एखर मकसद ए रहिही कि तैयार होय प्रारूप मं समाज के हर वर्ग के राय शामिल हो सके अउ कानून लागू होय के बाद किसी प्रकार के अनावश्यक विवाद के संभावना कम होवय।
का होथे समान नागरिक संहिता?
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) अइसन कानूनी व्यवस्था आय, जेन मं अलग-अलग धर्म के व्यक्तिगत कानून मन के जगह एक समान नागरिक कानून लागू करे जाथे। ए कानून मुख्य रूप ले विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार अउ संपत्ति के बंटवारा जइसने विषय मन ऊपर लागू होथे।
सरकार के अनुसार ए व्यवस्था ले कानून मं समानता बढ़थे अउ नागरिक मन ला एक समान अधिकार मिले के दिशा मं मदद मिलथे। हालांकि ए विषय ऊपर देशभर मं अलग-अलग मत घलो सामने आवत रहिथे।
जल्द शुरू हो सकथे प्रारूप तैयार करे के काम
सूत्र मन के मुताबिक समिति बहुत जल्दी अपन अध्ययन प्रक्रिया शुरू कर सकथे। सबसे पहिली गोवा अउ उत्तराखंड के मॉडल के दस्तावेज, कानूनी प्रावधान अउ प्रशासनिक व्यवस्था के अध्ययन करे जाही। ओकर बाद अलग-अलग राज्य मन के सुझाव के आधार ऊपर छत्तीसगढ़ बर अलग प्रारूप तैयार करे के काम आगे बढ़ही।
जेन रिपोर्ट समिति तैयार करही, ओला राज्य सरकार के समक्ष पेश करे जाही। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सरकार आगे के कानूनी प्रक्रिया ऊपर फैसला लेही।
राज्य सरकार के बढ़त कदम ऊपर सबके नजर
छत्तीसगढ़ मं यूसीसी लागू करे के दिशा मं सरकार के ए पहल ला काफी महत्वपूर्ण माने जा रहल हे। आने वाले महीना मन मं समिति के अध्ययन, सुझाव अउ रिपोर्ट ऊपर सबो के नजर रहिही। विशेषज्ञ मन के कहना हे कि यदि व्यापक विचार-विमर्श अउ सामाजिक सहमति के आधार ऊपर प्रारूप तैयार होथे, त ए राज्य के कानूनी व्यवस्था मं एक बड़ा बदलाव साबित हो सकथे।
फिलहाल समिति के गठन के बाद प्रक्रिया तेज होगे हे अउ अब गोवा, उत्तराखंड सहित दूसर राज्य मन के अनुभव के आधार ऊपर छत्तीसगढ़ बर समान नागरिक संहिता के रूपरेखा तैयार करे के दिशा मं काम आगे बढ़त दिखत हे।
