रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ ल अक्सर “नदी-नाला के मायका” कहे जाथे। राज मं महानदी, हसदेव, इंद्रावती, शिवनाथ, अरपा जइसन दर्जनों नदी बहिथें, फेर विडंबना ये हवय कि हर बरस बरसात के करीब 80 फीसदी पानी सिरिफ तीन महीना मं बहिके निकल जाथे। ए पानी ला रोकके खेती, उद्योग अउ पीये के पानी बर उपयोग करे बर राज सरकार सालों ले जल परियोजना मन बनावत आथे।
आज छत्तीसगढ़ मं 42 बड़े, 33 मध्यम अउ ढाई हजार ले जियादा लघु सिंचाई परियोजना संचालित होवत हें। ए मन ले करीब 13.68 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होय हवय, फेर असलियत ये घलो हवय कि आज घलो कई परियोजना अधूरा परे हें, कुछ कानूनी विवाद मं फंसे हें अउ कुछ ऊपर करोड़ों रुपिया खर्च होय के बाद घलो अपेक्षित फायदा नई मिलिस।
ये रिपोर्ट मं जानबो कि कतका परियोजना सफल होइस, कतका संघर्ष करत हें अउ छत्तीसगढ़ के जल प्रबंधन के भविष्य कइसने दिखत हवय।
हसदेव बांगो: राज के सबसे बड़े बांध ले लाखों किसान ला राहत
कोरबा जिला मं हसदेव नदी ऊपर बने मिनीमाता बांगो बांध छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े जलाशय माने जाथे। लगभग 3074 मिलियन घन मीटर पानी संग्रहण क्षमता वाले ए बांध ले 2.66 लाख हेक्टेयर खेत मं सिंचाई होवत हवय।
एकर फायदा सिरिफ किसान मन ल नई मिलत, बल्कि कोरबा के लगभग जम्मो बड़े थर्मल पावर प्लांट घलो एही जलाशय ऊपर निर्भर हें।
साल 2025 मं नहर लाइनिंग के काम पूरा होय के बाद अब नहर के आखिरी छोर तक घलो पानी पहुंचत हवय, जेन ले हजारों किसान मन के खेती आसान होगे हवय।
गंगरेल बांध: खेती संग राजधानी के पियास घलो बुझावत हवय
धमतरी जिला मं महानदी ऊपर बने रविशंकर सागर (गंगरेल बांध) राज के सबसे महत्वपूर्ण परियोजना मन मं गिनाय जाथे।
करीब 910 मिलियन घन मीटर क्षमता वाले ए बांध ले रायपुर, धमतरी अउ दुर्ग जिला के लगभग 57 हजार हेक्टेयर खेती मं सिंचाई होथे।
एखर संग-संग राजधानी रायपुर ल रोजाना करीब 150 एमएलडी पेयजल घलो एही बांध ले मिलत हवय।
खरखरा-मोहदीपाट: उद्योग अउ शहर दुनो बर जीवन रेखा
दुर्ग जिला के खरखरा नदी ऊपर बने ए परियोजना भिलाई-दुर्ग इलाका बर बहुत महत्वपूर्ण माने जाथे।
लगभग 174 मिलियन घन मीटर पानी के भंडारण क्षमता वाले ए बांध ले भिलाई स्टील प्लांट, उद्योग मन अउ लाखों लोगन के पीये के पानी के व्यवस्था होथे।
बोधघाट परियोजना: 45 साल ले इंतजार मं अटके सपना
दंतेवाड़ा जिला मं इंद्रावती नदी ऊपर प्रस्तावित बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित अउ विवादित योजना आय।
साल 1979 मं प्रस्तावित ए परियोजना ले 200 मेगावाट बिजली उत्पादन अउ 2.66 लाख हेक्टेयर खेती मं सिंचाई के लक्ष्य रखे गे रहिस।
फेर 42 गांव डूबान, करीब 5700 हेक्टेयर जंगल, पर्यावरणीय स्वीकृति अउ विस्थापन के सवाल के चलते परियोजना आज घलो पूरा नई हो पाय हवय।
राज सरकार 2024 मं फेर ले सर्वे शुरू करवाय हवय, फेर लागत अब बढ़के 22 हजार करोड़ रुपिया पार कर चुके हवय।
अरपा-भैंसाझार परियोजना: 18 बछर बाद घलो अधूरा काम
बिलासपुर जिला के अरपा नदी ऊपर बनत ए परियोजना ले लगभग 25 हजार हेक्टेयर जमीन मं सिंचाई होय के उम्मीद हवय।
फेर भू-अर्जन के समस्या, बजट के कमी अउ प्रशासनिक देरी के चलते 18 साल मं सिरिफ 60 फीसदी काम हो पाय हवय।
अब सरकार 2026 तक एला पूरा करे के दावा करत हवय।
केलो परियोजना: बांध बनिस, फेर नहर नई बन पाइस
रायगढ़ जिला मं केलो नदी ऊपर बांध त 2015 मं बन गे, फेर नहर के काम समय मं पूरा नई हो पाइस।
परिणाम ये होइस कि 22,500 हेक्टेयर के बदला सिरिफ 8,000 हेक्टेयर खेती तक पानी पहुंचत हवय।
किसान मन के लगातार आंदोलन के बाद अब नहर लाइनिंग के काम तेज करे जात हवय।
पैरी उच्च स्तरीय बांध: 40 बछर ले अधूरा निर्माण
गरियाबंद जिला मं पैरी नदी ऊपर बनत ए परियोजना ऊपर अब तक 1200 करोड़ रुपिया खर्च हो चुके हवय।
फेर 17 गांव के विस्थापन विवाद के चलते 2018 ले काम बंद परे हवय।
अब सरकार ए परियोजना ला अव्यवहारिक मानके बंद करे के विकल्प ऊपर विचार करत हवय।
मोंगरा बैराज अउ कोटरी-सोनूर: करोड़ों खर्च, फायदा कम
राजनांदगांव के मोंगरा बैराज मं गाद भर जाय के कारण महज पांच बछर मं एकर करीब 70 फीसदी क्षमता घटगे।
अब ए बैराज सिरिफ बरसात के समय उपयोग होवत हवय अउ डी-सिल्टिंग बर भारी रकम के जरूरत बताय जावत हवय।
ओहीच, कोंडागांव के कोटरी-सोनूर परियोजना 1995 ले शुरू होके आज तक पूरा नई हो पाइस।
बार-बार ठेकेदार बदलना, लागत बढ़ना अउ काम मं देरी के कारण एला सरकारी जांच मं अनुपयोगी खर्च तक बताय गे रहिस।
नरवा विकास योजना: छोटे काम ले बड़े बदलाव
जहां बड़े बांध मन कई जगह संघर्ष करत हें, ओहीच नरवा विकास योजना गांव-गांव मं सफलता के कहानी लिखत हवय।
2022 ले अब तक करीब 32 हजार नाला ऊपर चेक डैम, गली प्लग अउ भूजल रिचार्ज के काम करे गे हें।
एकर असर साफ दिखत हवय। कई इलाका मं भूजल स्तर औसतन 0.8 मीटर बढ़े हवय, जबकि कबीरधाम जिला के दर्जनों गांव मं सूख गे कुआं फेर पानी देय लगिन।
सरकार अब 2026 तक 44 हजार नाला विकसित करे के लक्ष्य रखे हवय।
महानदी अउ इंद्रावती: पानी ऊपर अंतरराज्यीय विवाद जारी
महानदी नदी ला लेके छत्तीसगढ़ अउ ओडिशा के बीच कई बछर ले विवाद चलत हवय।
ओडिशा के आरोप हवय कि छत्तीसगढ़ गैर-बरसाती मौसम मं पानी रोकत हवय, जबकि छत्तीसगढ़ के कहना हवय कि वो अपन हिस्से के पानी घलो पूरा उपयोग नई कर पावत हवय।
इहीच तरह इंद्रावती नदी ला लेके घलो विवाद अब न्यायालय तक पहुंच चुके हवय।
भविष्य के योजना: जल प्रबंधन ला आधुनिक बनाय के तैयारी
राज सरकार अब ‘छत्तीसगढ़ जल विजन 2047’ के तहत सिंचाई क्षमता 13.68 लाख हेक्टेयर ले बढ़ाके 25 लाख हेक्टेयर करे के लक्ष्य बनाय हवय।
ए बर पुराना नहर मन के मरम्मत, लाइनिंग, स्प्रिंकलर सिंचाई, अमृत सरोवर निर्माण अउ स्मार्ट स्काडा सिस्टम जइसन तकनीक के उपयोग ऊपर जोर देय जात हवय।
सबसे बड़े चुनौती अब घलो बरकरार
जल संसाधन विभाग के जानकार मन के मुताबिक जल परियोजना मन के सफल नइ होय के मुख्य कारण हें—
- भू-अर्जन मं देरी
- वन स्वीकृति मं लंबा इंतजार
- बढ़त लागत
- रखरखाव बर पर्याप्त बजट के कमी
एही कारण ले कई परियोजना समय अउ लागत दुनो मं पिछड़ जाथें।
छत्तीसगढ़ मं पानी के कमी नई हवय, जरूरत हवय सही योजना, बेहतर प्रबंधन अउ समय मं काम पूरा करे के।
हसदेव बांगो अउ गंगरेल जइसन परियोजना साबित करत हें कि सही योजना बने त किसान, उद्योग अउ आम जनता तीनों ला फायदा मिल सकथे।
ओही समय पैरी, कोटरी अउ बोधघाट जइसन परियोजना ये चेतावनी देवत हें कि अगर योजना समय मं पूरी नई होय त करोड़ों रुपिया खर्च होके घलो जनता ला फायदा नई मिलय।
अब सरकार बर सबसे बड़े चुनौती ये हवय कि अधूरा परियोजना मन ला पूरा करे अउ जेन सफल मॉडल हें, ओला पूरा राज मं लागू करे। तबे छत्तीसगढ़ के पानी सच मं छत्तीसगढ़ के विकास के आधार बन सकही।
