दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शासकीय धान खरीदी व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा गबन मामला सामने आया है। धमधा थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित सेवा सहकारी समिति मर्यादित रौंदा में लगभग 15 लाख रुपये से अधिक मूल्य के धान और बारदाना की कमी पाए जाने के बाद पुलिस ने समिति प्रभारी को गिरफ्तार कर लिया है। संयुक्त जांच दल द्वारा की गई आकस्मिक जांच और भौतिक सत्यापन में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने पूरे मामले को उजागर किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा सेवा सहकारी समिति मर्यादित रौंदा तथा उपार्जन केंद्र रौंदा का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान समिति में उपलब्ध अभिलेखों और वास्तविक रूप से भंडारित धान एवं बारदाना

का मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में दस्तावेजों में दर्ज मात्रा और मौके पर उपलब्ध सामग्री के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली कमी
संयुक्त जांच दल द्वारा तैयार किए गए प्रतिवेदन के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान समिति द्वारा कुल 73 हजार 952.80 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया था। अभिलेखों के आधार पर निर्धारित मात्रा में धान और बारदाना उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन जब भौतिक सत्यापन किया गया तो स्थिति अलग ही निकली।
जांच में पाया गया कि केंद्र में 560.28 क्विंटल धान और 2103 नग नया बारदाना कम था। सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण के बीच पाए गए इस अंतर ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। प्रारंभिक मूल्यांकन के अनुसार गायब धान और बारदाना की कुल कीमत 15 लाख 8 हजार 161 रुपये आंकी गई है।
जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ अपराध
मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त जांच दल ने अपना प्रतिवेदन थाना धमधा को सौंप दिया। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 136/2026 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) और 318(1) के तहत मामला पंजीबद्ध किया।
इसके बाद पुलिस ने विस्तृत विवेचना शुरू की। जांच अधिकारियों ने समिति से जुड़े सभी दस्तावेजों का परीक्षण किया, धान खरीदी एवं भंडारण से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले तथा संबंधित कर्मचारियों और गवाहों के बयान दर्ज किए।
समिति प्रभारी की गिरफ्तारी
विवेचना के दौरान प्राप्त साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने सेवा सहकारी समिति रौंदा के प्रभारी जगदीश कुमार नवरंगे (60 वर्ष) निवासी पेंड्रावन, थाना धमधा, जिला दुर्ग को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान धान एवं बारदाना की कमी तथा अभिलेखीय अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
शासकीय संपत्ति के गबन की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि समिति के रिकॉर्ड में दर्ज धान और बारदाना की मात्रा तथा वास्तविक भंडारण के बीच बड़ा अंतर मौजूद था। इसी आधार पर शासकीय संपत्ति के गबन और धोखाधड़ी की आशंका को लेकर मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने धान खरीदी, भंडारण और वितरण से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, जांच प्रतिवेदन तथा अन्य अभिलेखों को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि धान और बारदाना की कमी किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।
धान खरीदी व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सहकारी समितियों के माध्यम से होने वाली धान खरीदी व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में लाखों रुपये मूल्य के धान और बारदाना की कमी सामने आना व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर होने वाली भौतिक जांच और रिकॉर्ड सत्यापन से इस प्रकार की अनियमितताओं को रोका जा सकता है। वहीं, इस कार्रवाई को सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुलिस ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
धमधा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शासकीय संपत्ति, सार्वजनिक धन और सहकारी संस्थाओं से जुड़े आर्थिक अपराधों के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी शासकीय संपत्ति, सार्वजनिक धन या सहकारी संस्था से जुड़ी अनियमितता की जानकारी मिलती है तो तत्काल संबंधित विभाग अथवा पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
