कोरबा में गणेशोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। कोलकाता से आए मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। 14 से 23 सितंबर तक 10 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाएगा।
कोरबा(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)गणेशोत्सव शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इसके साथ ही कोरबा शहर में तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। गली-मोहल्लों में जहां गणेशोत्सव समितियां पंडाल और आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर मूर्तिकारों की बस्तियों और अस्थायी कार्यस्थलों पर दिन-रात मिट्टी को भगवान गणेश के स्वरूप में ढालने का काम चल रहा है। इस बार 14 सितंबर से 23 सितंबर तक 10 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाएगा।
गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ा उत्सव है। सार्वजनिक गणेश पंडालों में पूजा-अर्चना के साथ भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। ऐसे में उत्सव शुरू होने से पहले ही समितियों और मूर्तिकारों के बीच तैयारियों की हलचल साफ दिखाई देने लगी है।
पंडालों की तैयारी के साथ प्रतिमाओं की बुकिंग भी शुरू
कोरबा के अलग-अलग इलाकों में गणेशोत्सव समितियों ने सार्वजनिक आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई समितियां अपने सदस्यों और सहयोगियों के माध्यम से आयोजन के लिए रसीद काटने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही पंडाल, टेंट, सजावट, लाइटिंग, प्रसाद और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की बुकिंग भी की जा रही है।
गणेश प्रतिमा की स्थापना सार्वजनिक पंडालों के आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यही वजह है कि समितियां अपनी पसंद और बजट के अनुसार प्रतिमाओं की बुकिंग पहले ही कर रही हैं। कुछ स्थानों पर छोटी प्रतिमाओं की मांग है, तो कई समितियां 3 से 6 फीट तक ऊंची प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारी में हैं।
शहर के कई मोहल्लों में समितियों की बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। आयोजन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। पूजा की व्यवस्था से लेकर प्रसाद वितरण, पंडाल की सुरक्षा, विद्युत सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक की तैयारियों को लेकर सदस्य सक्रिय नजर आ रहे हैं।
कोलकाता से आए मूर्तिकार, दो महीने से चल रहा प्रतिमा निर्माण
गणेश प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आए मूर्तिकार और उनके साथी करीब दो महीने पहले ही कोरबा पहुंच गए थे। शहर के अलग-अलग स्थानों पर टेंट लगाकर अस्थायी कार्यस्थल बनाए गए हैं, जहां कारीगर लगातार प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हुए हैं।
मिट्टी के ढांचे से शुरू होने वाला यह काम कई चरणों से होकर गुजरता है। पहले प्रतिमा का मूल ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद मिट्टी की परतों के माध्यम से भगवान गणेश की आकृति को आकार दिया जाता है। चेहरे की बनावट, हाथ-पैर, मुकुट, आभूषण और अन्य बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रतिमा को अंतिम रूप देने से पहले उसे सुखाने और रंग-रोगन सहित कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
कारीगरों के लिए यह काम केवल एक मूर्ति तैयार करना नहीं है। हर प्रतिमा के पीछे उनकी मेहनत, अनुभव और कला जुड़ी होती है। भगवान गणेश की प्रतिमा का चेहरा और भाव श्रद्धालुओं को आकर्षित करे, इसके लिए मूर्तिकार बारीकी से काम करते हैं।
इस साल करीब 200 छोटी और 70 बड़ी प्रतिमाएं तैयार करने का लक्ष्य
मूर्तिकारों के अनुसार इस वर्ष कोरबा में करीब 200 छोटी गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा 3 से 6 फीट ऊंचाई वाली लगभग 70 बड़ी प्रतिमाओं को भी आकार दिया जा रहा है। गणेशोत्सव नजदीक आने के साथ प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम और तेज हो गया है।
मांग के अनुसार प्रतिमाओं की ऊंचाई और डिजाइन में भी अंतर रखा जा रहा है। घरेलू स्थापना के लिए छोटी प्रतिमाओं की मांग रहती है, जबकि सार्वजनिक समितियां अपेक्षाकृत बड़ी प्रतिमाओं को पसंद करती हैं। कई समितियां पहले से प्रतिमा बुक कराकर उसके आकार और स्वरूप को लेकर मूर्तिकारों को अपनी पसंद बता देती हैं।
कारीगरों का कहना है कि वे कई वर्षों से गणेशोत्सव के समय कोरबा आते हैं। प्रतिमा निर्माण उनके लिए रोजगार का प्रमुख साधन है। त्योहारी सीजन में कई परिवार सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इस काम से जुड़े होते हैं।
मिट्टी से मूर्ति तक का सफर, कारीगरों की मेहनत बनी आकर्षण
गणेश प्रतिमा तैयार करने की प्रक्रिया देखने में जितनी सहज लगती है, वास्तव में उतनी ही मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है। कारीगर कई सप्ताह पहले से काम शुरू कर देते हैं, ताकि गणेशोत्सव से पहले सभी प्रतिमाएं तैयार हो सकें।
सुबह से लेकर देर शाम तक कार्यस्थल पर कारीगरों की गतिविधियां जारी रहती हैं। कहीं मिट्टी तैयार की जा रही है तो कहीं प्रतिमा के चेहरे पर बारीक काम किया जा रहा है। कुछ कारीगर प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को आकार देते नजर आते हैं, जबकि अन्य कारीगर अंतिम सजावट और रंग-रोगन की तैयारी में लगे हैं।
गणेश प्रतिमा के निर्माण से जुड़ी यह मेहनत शहर में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का विषय बन रही है। कई लोग मूर्तिकारों के कार्यस्थल पर पहुंचकर प्रतिमाओं को तैयार होते देखते हैं और अपनी पसंद की प्रतिमा की बुकिंग भी कराते हैं।
घरों में भी होगी गणपति की स्थापना
गणेशोत्सव के दौरान केवल सार्वजनिक पंडालों में ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी भगवान गणेश की स्थापना करते हैं। इसके चलते छोटी और मध्यम आकार की प्रतिमाओं की मांग भी बनी हुई है।
घर में गणपति स्थापना करने वाले श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार प्रतिमा का चयन करते हैं। कई परिवार पारंपरिक स्वरूप वाली प्रतिमा पसंद करते हैं, जबकि कुछ लोग आकर्षक और कलात्मक डिजाइन वाली प्रतिमाओं की बुकिंग कराते हैं।
गणेशोत्सव की तैयारियों के साथ बाजार में भी धीरे-धीरे चहल-पहल बढ़ने की उम्मीद है। पूजा सामग्री, सजावटी सामान, लाइटिंग, फूल-माला, प्रसाद और पंडाल से जुड़ी सामग्री की मांग बढ़ने लगेगी। इससे स्थानीय कारोबार और छोटे दुकानदारों को भी त्योहारी सीजन में काम मिलने की संभावना रहती है।
14 सितंबर से शुरू होगा 10 दिवसीय गणेशोत्सव
इस वर्ष गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर तक चलेगा। दस दिनों के इस धार्मिक आयोजन को लेकर शहर में उत्साह का माहौल बनने लगा है। सार्वजनिक गणेश पंडालों में स्थापना के बाद रोजाना पूजा-अर्चना और आरती के साथ अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
गणेशोत्सव के अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए समितियां व्यवस्थाओं को लेकर अभी से तैयारी कर रही हैं। पंडालों में प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
फिलहाल कोरबा में गणेशोत्सव की सबसे पहली तस्वीर मूर्तिकारों के कार्यस्थलों पर दिखाई दे रही है, जहां मिट्टी के ढेर धीरे-धीरे भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाओं में बदल रहे हैं। उत्सव शुरू होने में समय जरूर बाकी है, लेकिन कारीगरों की मेहनत और समितियों की तैयारियों ने शहर में गणेशोत्सव की आहट महसूस करा दी है।
कारीगरों की मेहनत से साकार होगा उत्सव
गणेशोत्सव के दौरान जब श्रद्धालु आकर्षक गणेश प्रतिमाओं के दर्शन करेंगे, तब उनके पीछे कई सप्ताह की मेहनत करने वाले कारीगरों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। कोलकाता से कोरबा पहुंचे ये मूर्तिकार हर साल अपनी कला के जरिए शहर के उत्सव को नया रंग देते हैं।
मिट्टी को भगवान गणेश के स्वरूप में ढालने वाले इन कारीगरों के लिए गणेशोत्सव सिर्फ कमाई का मौसम नहीं, बल्कि उनकी पारंपरिक कला और हुनर को सामने लाने का अवसर भी है। वहीं श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था, भक्ति और सामूहिक उत्सव का समय है। जैसे-जैसे 14 सितंबर करीब आएगा, वैसे-वैसे कोरबा के गली-मोहल्लों में पंडाल सजने लगेंगे और शहर गणपति बप्पा के स्वागत के रंग में रंगता नजर आएगा
