कोरबा के दादर खुर्द में झाड़ियां साफ करते समय रामदयाल को सांप ने डस लिया। परिजन सांप को डिब्बे में बंद कर अस्पताल पहुंच गए। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीज का इलाज जारी है और हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
कोरबा(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सांप के डसने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शहर से लगे दादर खुर्द क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति को घर की बाड़ी में झाड़ियां साफ करने के दौरान सांप ने डस लिया। घटना के बाद परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन इस मामले में सबसे अलग बात यह रही कि परिजन और स्नेक कैचर उस सांप को भी खोजते हुए अस्पताल पहुंच गए, जिसने व्यक्ति को काटा था।
बताया जा रहा है कि सांप को घर की बाड़ी में बने बिल से बाहर निकालकर एक डिब्बे में बंद किया गया और फिर उसे अस्पताल ले जाया गया। परिजनों को किसी ने यह जानकारी दी थी कि डॉक्टर सांप को देखने के बाद ही इलाज शुरू करेंगे। इसी बात को सही मानकर वे सांप को साथ लेकर अस्पताल पहुंच गए। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इस तरह की बातों से साफ इनकार किया है। अस्पताल का कहना है कि स्नेक बाइट के मामले में मरीज का इलाज प्राथमिकता के आधार पर तत्काल शुरू किया जाता है और इलाज शुरू करने के लिए सांप को अस्पताल लाना जरूरी नहीं होता।
दादर खुर्द निवासी रामदयाल को सांप ने डसा
मिली जानकारी के अनुसार, दादर खुर्द में रहने वाले रामदयाल अपने घर की बाड़ी में झाड़ियां साफ कर रहे थे। इसी दौरान झाड़ियों और आसपास की जमीन में छिपे एक सांप ने उन्हें डस लिया। घटना अचानक हुई, जिससे रामदयाल और उनके परिजन घबरा गए।
रामदयाल के अनुसार, सांप घर की बाड़ी में ही बने एक बिल में रहता था। झाड़ियां साफ करने के दौरान सांप ने उन्हें काट लिया और इसके बाद वह दोबारा अपने बिल में घुस गया। घटना के बाद परिजनों ने समय गंवाने के बजाय रामदयाल को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
रामदयाल ने बताया कि इलाज मिलने के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ है और फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं। अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में उनका उपचार जारी है।
सांप को पकड़ने के लिए बुलाया गया स्नेक कैचर
रामदयाल को अस्पताल पहुंचाने के बाद परिजनों ने उस सांप की तलाश शुरू की, जिसने उन्हें डसा था। इसके लिए स्नेक कैचर की मदद ली गई। बताया जा रहा है कि सांप बाड़ी में बने अपने बिल के भीतर चला गया था। स्नेक कैचर ने काफी प्रयास के बाद उसे बिल से बाहर निकाला।
सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद उसे एक डिब्बे में बंद कर दिया गया। इसी बीच स्नेक कैचर को किसी व्यक्ति ने यह बात बता दी कि डॉक्टर सांप को देखने के बाद ही मरीज का इलाज शुरू करते हैं। यह जानकारी सुनने के बाद सांप को भी अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद डिब्बे में बंद सांप को लेकर परिजन अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल परिसर में सांप को देखकर वहां मौजूद लोगों में भी कुछ समय के लिए उत्सुकता और चर्चा का माहौल बन गया।
डॉक्टर को सांप दिखाने की बात निकली गलत
मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि स्नेक बाइट के मरीज के इलाज के लिए सांप को अस्पताल लेकर आने की कोई आवश्यकता नहीं होती। अस्पताल पहुंचने वाले मरीज का तत्काल परीक्षण कर उसकी स्थिति के अनुसार इलाज शुरू किया जाता है।
अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि यदि मरीज के परिजन पहले सांप को खोजने और पकड़ने में ही समय लगाते रहें, तो इलाज में अनावश्यक देरी हो सकती है। सांप के डसने के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
अस्पताल से जुड़े अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि डॉक्टरों ने सांप को देखने के बाद ही इलाज शुरू करने की कोई बात कही थी। रामदयाल के मामले में भी अस्पताल पहुंचने के बाद उनका उपचार शुरू कर दिया गया था। वर्तमान में उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
मरीज की हालत में सुधार, खतरे से बाहर
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती रामदयाल ने बताया कि घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल लाया गया और इलाज शुरू होने के बाद उनकी तबीयत में सुधार हुआ। उन्होंने कहा कि अब उनकी हालत पहले से काफी बेहतर है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में सांप के डसने को लेकर लोगों के बीच कितनी तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। कई बार लोग इलाज शुरू कराने से पहले सांप को पहचानने, पकड़ने या उसे मारकर अस्पताल ले जाने में समय गंवा देते हैं। ऐसी स्थिति मरीज के लिए जोखिम भरी हो सकती है।
स्नेक बाइट के बाद क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के डसने की आशंका होने पर सबसे पहले घबराने के बजाय मरीज को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए और जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। काटने वाले सांप को पकड़ने, मारने या उसके पीछे भागने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सांप को पकड़ने का प्रयास करने से दूसरे व्यक्ति के भी डसे जाने का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी भी हो सकती है। मरीज को शांत रखना और प्रभावित अंग को अनावश्यक रूप से हिलाने-डुलाने से बचाना जरूरी होता है।
कोरबा के इस मामले में राहत की बात यह रही कि रामदयाल को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया और उनका इलाज शुरू हो गया। यही वजह है कि फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है।
बरसात और झाड़ियों के बीच बढ़ जाती है सावधानी की जरूरत
कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बरसात और नमी के मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। घरों की बाड़ी, झाड़ियों, लकड़ी के ढेर, पुराने सामान और बिलों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
विशेष रूप से झाड़ियों की सफाई करते समय हाथ सीधे झाड़ियों के भीतर डालने के बजाय सावधानी से काम करना चाहिए। रात के समय अंधेरे स्थानों पर जाने से पहले पर्याप्त रोशनी का उपयोग करना भी जरूरी है। घर के आसपास सांप दिखाई देने पर स्थानीय प्रशासन या प्रशिक्षित स्नेक कैचर की मदद लेना अधिक सुरक्षित तरीका है।
दादर खुर्द की यह घटना लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है कि सांप के डसने के बाद सबसे पहले मरीज की जान बचाना जरूरी है। सांप को पकड़कर अस्पताल ले जाने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना प्राथमिकता होनी चाहिए। रामदयाल के मामले में परिजनों ने मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय रहते इलाज शुरू हो सका और अब उनकी हालत खतरे से बाहर है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रामदयाल की निगरानी और आवश्यक उपचार जारी है। वहीं, डिब्बे में सांप को लेकर अस्पताल पहुंचने की घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है
