भिलाई के खुर्सीपार थाना क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान आरोपी को छोड़ने के लिए प्रधान आरक्षक पर दबाव बनाने के आरोप में दो आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया। एसएसपी विजय अग्रवाल ने 24 घंटे में जांच रिपोर्ट मांगी है।
(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, अड्डेबाजी करने और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बीच भिलाई में पुलिस विभाग के भीतर ही विवाद का मामला सामने आया है। खुर्सीपार थाना क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को कथित तौर पर छोड़ने के लिए प्रधान आरक्षक पर दबाव बनाने और उसके साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप में दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने दो आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में छावनी थाना में पदस्थ आरक्षक सोनू चौहान और खुर्सीपार थाना में पदस्थ आरक्षक चंद्रभान चौहान शामिल हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने दोनों को निलंबन अवधि के दौरान रक्षित केंद्र दुर्ग से संबद्ध कर दिया है। साथ ही रक्षित निरीक्षक को पूरे मामले की प्राथमिक जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पुलिस सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी, अड्डेबाजी और असामाजिक गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई करने की बात लगातार कह रही है। ऐसे में कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों के बीच ही विवाद सामने आने के बाद मामला विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।
सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने और अड्डेबाजी के खिलाफ चल रही थी कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधान आरक्षक रामनारायण यदु खुर्सीपार थाना क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और अड्डेबाजी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे। इस दौरान पुलिस उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी, जिनकी गतिविधियों से आम नागरिकों को परेशानी होने की शिकायतें सामने आती हैं।
सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और देर तक अड्डेबाजी करने की शिकायतें अक्सर पुलिस के लिए कानून व्यवस्था से जुड़ी चुनौती बनती हैं। कई बार ऐसी गतिविधियों के कारण आसपास रहने वाले लोगों, राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी कारण पुलिस द्वारा समय-समय पर ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति पुलिस की कार्रवाई की जद में आ गया था। इसी बीच छावनी थाना के आरक्षक सोनू चौहान और खुर्सीपार थाना के आरक्षक चंद्रभान चौहान मौके पर पहुंचे।
आरोपी को छोड़ने के लिए दबाव बनाने का आरोप
मामले में आरोप है कि दोनों आरक्षकों ने कार्रवाई की जद में आए व्यक्ति को छोड़ने के लिए प्रधान आरक्षक रामनारायण यदु पर दबाव बनाया। आरोप केवल दबाव बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधान आरक्षक के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी सामने आई है।
विभागीय स्तर पर इस घटना को गंभीर माना गया है, क्योंकि पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति को छोड़ने के लिए दबाव बनाने का आरोप सीधे तौर पर कार्रवाई की निष्पक्षता और अनुशासन से जुड़ा मामला है। हालांकि, मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस विभाग में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी से निर्धारित नियमों एवं अनुशासन का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। खासकर जब कोई पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए कानून के तहत कार्रवाई कर रहा हो, उस दौरान हस्तक्षेप या दबाव से जुड़े आरोपों को गंभीरता से देखा जाता है।
एसएसपी विजय अग्रवाल ने तत्काल लिया एक्शन
घटना की जानकारी मिलते ही दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने मामले में तत्काल कार्रवाई की। दोनों आरक्षकों सोनू चौहान और चंद्रभान चौहान को प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया।
निलंबन के बाद दोनों आरक्षकों को रक्षित केंद्र दुर्ग से संबद्ध किया गया है। विभागीय प्रक्रिया के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान दोनों पुलिसकर्मी अपने पूर्व थाना पदस्थापन पर नियमित ड्यूटी नहीं करेंगे।
एसएसपी की इस त्वरित कार्रवाई को विभागीय अनुशासन के मामले में सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। पुलिस महकमे में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और निष्पक्ष कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी पर कार्रवाई में अनुचित हस्तक्षेप करने या साथी पुलिसकर्मी के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप सामने आता है, तो उसकी जांच आवश्यक हो जाती है।
रक्षित निरीक्षक को सौंपी गई प्राथमिक जांच
मामले की जांच के लिए एसएसपी ने रक्षित निरीक्षक को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें दोनों आरक्षकों के खिलाफ प्राथमिक जांच करने और घटना से जुड़े तथ्यों को सामने लाने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कार्रवाई के समय वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं, दोनों आरक्षक वहां किस उद्देश्य से पहुंचे थे और क्या उन्होंने वास्तव में कार्रवाई की जद में आए व्यक्ति को छोड़ने के लिए प्रधान आरक्षक पर दबाव बनाया था।
इसके अलावा प्रधान आरक्षक के साथ कथित अभद्र व्यवहार के आरोप की भी जांच की जाएगी। जांच अधिकारी संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान लेने के साथ-साथ घटनाक्रम से जुड़े अन्य लोगों से भी जानकारी जुटा सकते हैं। यदि मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने घटना देखी है या कोई अन्य तथ्य सामने आता है, तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश
एसएसपी विजय अग्रवाल ने मामले की प्राथमिक जांच को लंबित रखने के बजाय तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। रक्षित निरीक्षक को 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
कम समय सीमा में रिपोर्ट मांगे जाने से यह स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन मामले के तथ्यों को जल्द सामने लाना चाहता है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही दोनों आरक्षकों के खिलाफ आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष भी विभागीय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। फिलहाल दोनों आरक्षक निलंबित हैं और प्राथमिक जांच जारी है।
विभागीय अनुशासन के लिहाज से अहम मामला
यह मामला केवल दो पुलिसकर्मियों के निलंबन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पुलिस विभाग में कार्यप्रणाली और अनुशासन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जब पुलिसकर्मी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और कानून का पालन कराने के लिए मैदान में उतरते हैं, तब उनकी कार्रवाई निष्पक्ष और बिना किसी बाहरी या आंतरिक दबाव के होना जरूरी माना जाता है।
खास तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और अड्डेबाजी जैसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर दबाव या विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत संबंधों या किसी अन्य प्रभाव से ऊपर उठकर कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग में जवाबदेही और अनुशासन की अहमियत को सामने रखा है। एसएसपी स्तर से तत्काल निलंबन और समयबद्ध जांच के आदेश को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सभी की निगाहें 24 घंटे में प्रस्तुत होने वाली प्राथमिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटना के दौरान किस स्तर पर अनुशासनहीनता हुई।
जांच पूरी होने से पहले मामले को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हालांकि, दो आरक्षकों के तत्काल निलंबन से इतना जरूर स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन ने आरोपों को गंभीरता से लिया है।
भिलाई के खुर्सीपार थाना क्षेत्र से सामने आए इस घटनाक्रम ने यह संदेश दिया है कि कानून व्यवस्था की कार्रवाई के दौरान अनुशासनहीनता या अनुचित हस्तक्षेप के आरोपों को विभाग हल्के में लेने के मूड में नहीं है। अब प्राथमिक जांच रिपोर्ट के बाद ही यह तय होगा कि दोनों आरक्षकों के खिलाफ विभागीय स्तर पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
