प्याज की खुदरा कीमतों में सालाना 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नासिक से दिल्ली, चेन्नई समेत प्रमुख उपभोग केंद्रों तक ‘कांदा एक्सप्रेस’ से प्याज की सप्लाई बढ़ाई जाएगी। जानिए आज देश के प्रमुख शहरों में प्याज का ताजा भाव।
देश में त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ने लगा है। खाने-पीने की रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अब प्याज ने भी उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। चीनी की कीमतों में तेजी के बाद प्याज के भाव में आई बड़ी उछाल ने घरेलू बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत साल-दर-साल करीब 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब विशेष रेलवे रेक ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र नासिक से देश के बड़े उपभोग केंद्रों तक प्याज की खेप पहुंचा रही है। सरकार का उद्देश्य बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों में होने वाली मौसमी तेजी को नियंत्रित करना है।
नासिक से बड़े शहरों तक पहुंचेगा प्याज
उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने सोमवार को बताया कि महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र से प्याज की आपूर्ति देश के प्रमुख उपभोग केंद्रों तक बढ़ाई जा रही है। इसके लिए रेलवे रेक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कम समय में बड़ी मात्रा में प्याज अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि विशेष रेक में प्याज का स्टॉक लोड किया जा रहा है और यह खेप बुधवार तक निर्धारित केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज पहुंचने से स्थानीय आपूर्ति सुधरेगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
प्याज एक ऐसी खाद्य वस्तु है जिसकी कीमतों में बदलाव का असर सीधे आम परिवारों की रसोई पर पड़ता है। देश के अधिकांश हिस्सों में प्याज का उपयोग रोजाना के भोजन में होता है। ऐसे में कीमतों में अचानक तेजी आने पर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होना स्वाभाविक है।
24 अगस्त को औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 59 प्रतिशत अधिक है।
एक साल पहले इसी समय देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत लगभग 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी एक साल के भीतर प्याज के दाम में 16 रुपये प्रति किलो से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कीमतों में तेजी केवल खुदरा बाजार तक सीमित नहीं है। थोक बाजार में भी प्याज के भाव तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, प्याज का औसत थोक भाव साल-दर-साल करीब 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में औसत थोक कीमत करीब 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
थोक बाजार में बढ़ी कीमतों का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों पर लोगों की नजर बनी रहेगी और सरकार की ओर से बढ़ाई जा रही आपूर्ति कितनी राहत देती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
चेन्नई में 60 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज
देश के अलग-अलग शहरों में प्याज की खुदरा कीमतों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। पिछले साल इसी समय चेन्नई में प्याज का भाव करीब 33 रुपये प्रति किलो था।
यानी चेन्नई के उपभोक्ताओं को एक साल पहले की तुलना में प्याज के लिए काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। शहरों में परिवहन, स्थानीय आपूर्ति और मांग की स्थिति के कारण खुदरा कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।
दिल्ली में प्याज 55 रुपये प्रति किलो
देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को खुदरा प्याज का भाव करीब 55 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। पिछले साल इसी अवधि में दिल्ली में प्याज की कीमत लगभग 35 रुपये प्रति किलो थी।
दिल्ली जैसे बड़े उपभोग केंद्र में कीमतों में बढ़ोतरी का असर बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार की ओर से नासिक से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की योजना में राजधानी सहित बड़े शहरों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोलकाता में 53 रुपये किलो बिका प्याज
पूर्वी भारत के प्रमुख महानगर कोलकाता में सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत करीब 53 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। इस तरह दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में प्याज की कीमतें 50 रुपये प्रति किलो के आसपास या उससे ऊपर पहुंच चुकी हैं।
प्रमुख शहरों में दर्ज कीमतों से साफ है कि प्याज की महंगाई केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में मांग और आपूर्ति की स्थिति के अनुसार भाव में अंतर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
सरकार ने क्यों शुरू की ‘कांदा एक्सप्रेस’?
प्याज की कीमतों में अक्सर मौसमी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। उत्पादन क्षेत्रों से बड़े शहरों तक समय पर पर्याप्त मात्रा में प्याज नहीं पहुंचने पर स्थानीय बाजारों में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। सरकार ने इसी स्थिति से निपटने के लिए रेलवे के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने का फैसला किया है।
‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए नासिक से प्याज को बड़े उपभोग केंद्रों तक पहुंचाने का मुख्य उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। सड़क मार्ग की तुलना में रेलवे के जरिए एक साथ बड़ी मात्रा में माल भेजा जा सकता है। इससे उन शहरों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है जहां मांग अधिक है।
सरकार की रणनीति यह है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे, ताकि सीमित आपूर्ति के कारण कीमतों में अनावश्यक तेजी न आए। आने वाले दिनों में इन विशेष रेक के जरिए भेजी जा रही खेप के बाजार में पहुंचने के बाद कीमतों पर इसका असर देखा जा सकेगा।
त्योहारों से पहले महंगाई ने बढ़ाई चिंता
देश में त्योहारों का मौसम शुरू होने के साथ ही खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ना सामान्य बात है। परिवारों में विशेष पकवान बनने से लेकर बाजारों और छोटे कारोबारों तक, इस दौरान खाद्य सामग्री की खपत बढ़ जाती है। ऐसे समय में प्याज जैसी जरूरी वस्तु की कीमत बढ़ने से लोगों की चिंता और बढ़ जाती है।
प्याज की कीमत का असर सिर्फ घरों की रसोई तक सीमित नहीं रहता। होटल, ढाबे, रेस्तरां, कैटरिंग और स्ट्रीट फूड कारोबार से जुड़े लोगों पर भी इसकी कीमतों का असर पड़ सकता है। छोटे कारोबारियों के लिए लगातार बढ़ती खाद्य सामग्री की लागत को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कई परिवारों के लिए प्याज रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है। सब्जी से लेकर सलाद और विभिन्न व्यंजनों तक इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में जब प्याज 50 से 60 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंचता है तो इसका असर महीने भर के घरेलू खर्च पर साफ दिखाई देता है।
क्या आने वाले दिनों में कम होंगे प्याज के दाम?
फिलहाल सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए सक्रिय कदम उठाया है और विशेष रेलवे रेक के जरिए प्याज को बड़े उपभोग केंद्रों तक भेजा जा रहा है। यदि बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज पहुंचता है तो कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार को रोकने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, खुदरा कीमतों में तत्काल कितनी राहत मिलेगी, यह स्थानीय बाजारों में आपूर्ति, मांग, परिवहन और उपलब्ध स्टॉक की स्थिति पर निर्भर करेगा। बुधवार तक निर्धारित केंद्रों पर प्याज की खेप पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद बाजार की स्थिति पर नजर रहेगी।
फिलहाल एक बात साफ है कि प्याज की बढ़ती कीमतों ने केंद्र सरकार को आपूर्ति बढ़ाने के लिए तेजी से कदम उठाने पर मजबूर किया है। त्योहारी सीजन से पहले सरकार की कोशिश है कि प्याज की महंगाई आम लोगों के घरेलू बजट पर और अधिक बोझ न डाले।
देश के प्रमुख शहरों में प्याज का ताजा भाव
- भारत में औसत खुदरा कीमत: 43.53 रुपये प्रति किलो
- पिछले साल औसत खुदरा कीमत: 27.37 रुपये प्रति किलो
- खुदरा कीमत में सालाना बढ़ोतरी: 59 प्रतिशत
- औसत थोक कीमत: 35.58 रुपये प्रति किलो
- थोक कीमत में सालाना बढ़ोतरी: 68 प्रतिशत
- चेन्नई: 60 रुपये प्रति किलो
- दिल्ली: 55 रुपये प्रति किलो
- कोलकाता: 53 रुपये प्रति किलो
त्योहारी सीजन से पहले प्याज की कीमतों में आई यह तेजी आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अब सबकी नजर सरकार की ‘कांदा एक्सप्रेस’ योजना पर है कि नासिक से बड़े शहरों तक अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचने के बाद बाजार में प्याज के दाम कितनी जल्दी स्थिर होते हैं।
