कटघोरा वनमंडल के केंदई, एतमानगर और जटगा क्षेत्र में हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। 11 हाथियों का दल अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहा है। कठमोरगा गांव में खेत में लगे सोलर पैनल को नुकसान पहुंचाया गया। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील करते हुए निगरानी बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) जिले के कटघोरा वनमंडल में जंगली हाथियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। बीते कुछ दिनों से केंदई, एतमानगर और जटगा क्षेत्र के जंगलों एवं ग्रामीण इलाकों में हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है। हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई गांवों के लोग शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि किसान अपनी फसलों और खेतों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभागीय अमला दिन-रात गश्त कर रहा है और ग्रामीणों को समय-समय पर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
11 हाथियों का दल अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचा
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वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एतमानगर रेंज में विचरण कर रहे 11 हाथियों के दल में से 8 हाथी केंदई रेंज के लालपुर जंगल की ओर चले गए हैं। वहीं तीन हाथियों का समूह कठमोरगा गांव के समीप पहुंच गया, जहां उन्होंने एक ग्रामीण के खेत में लगे सोलर पैनल को नुकसान पहुंचा दिया।
हालांकि इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन खेत में लगी सौर ऊर्जा प्रणाली को नुकसान पहुंचने से किसान को आर्थिक क्षति हुई है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का आकलन शुरू कर दिया। विभाग द्वारा नियमानुसार क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा रही है।
किसानों की बढ़ी चिंता, फसलों पर मंडरा रहा खतरा

कटघोरा वनमंडल के जिन क्षेत्रों में हाथियों का मूवमेंट बना हुआ है, वहां धान सहित अन्य खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों का दल गांवों के नजदीक लंबे समय तक रुका रहा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
कई किसानों ने बताया कि रातभर खेतों की निगरानी करना जोखिम भरा हो गया है। हाथियों की अचानक मौजूदगी किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। यही वजह है कि लोग वन विभाग से लगातार निगरानी और त्वरित सूचना व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
कोरबा वनमंडल में दो दंतैल हाथियों की भी आमद
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स्थिति को और गंभीर बनाते हुए कोरबा वनमंडल में दो दंतैल (नर) हाथियों की भी आमद हुई है। दंतैल हाथियों को सामान्यतः अधिक आक्रामक माना जाता है, इसलिए वन विभाग इनकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखे हुए है।
अलग-अलग क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी के कारण वन अमले के सामने चुनौती बढ़ गई है। विभाग की टीम लगातार ट्रैकिंग कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाथियों का दल किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और किन गांवों पर खतरा बढ़ सकता है।
मुनादी कर ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क
वन विभाग ने प्रभावित गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे रात के समय जंगल या खेतों की ओर अकेले न जाएं और हाथियों के दल के करीब जाने या उन्हें भगाने की कोशिश बिल्कुल न करें।
इसके अलावा ग्रामीणों से अपील की गई है कि यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
वन विभाग की निगरानी लगातार जारी
वन अधिकारियों के अनुसार हाथियों की लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन रक्षक, बीट गार्ड और अन्य कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अमले को भी तैनात किया जा सकता है।
वन विभाग का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और लोगों को समय पर सूचना देने का प्रयास किया जा रहा है।
मानव-हाथी संघर्ष बन रहा बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्रों की तरह कोरबा जिले में भी मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। जंगलों में प्राकृतिक संसाधनों की कमी, आवासीय क्षेत्रों का विस्तार और हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बदलाव जैसी परिस्थितियों के कारण हाथी अक्सर गांवों की ओर पहुंच जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर को सुरक्षित रखने, जंगलों में पर्याप्त भोजन और पानी उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक अलर्ट सिस्टम विकसित करने से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
ग्रामीणों से वन विभाग की अपील
वन विभाग ने आम नागरिकों से कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की अपील की है—
- हाथियों की सूचना मिलते ही उस क्षेत्र में जाने से बचें।
- रात के समय अकेले खेत या जंगल की ओर न जाएं।
- हाथियों को भगाने के लिए पटाखे, आग या अन्य खतरनाक तरीके न अपनाएं।
- बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर अकेले न निकलने दें।
- किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
- वन विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और अफवाहों पर विश्वास न करें।
स्थिति पर लगातार नजर
फिलहाल कटघोरा वनमंडल के केंदई, एतमानगर और जटगा क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। वन विभाग का पूरा अमला स्थिति पर नजर रखे हुए है और प्रभावित गांवों में लगातार संपर्क बनाए हुए है। ग्रामीणों से भी अपील की जा रही है कि वे सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं। समय पर सूचना और विभागीय सहयोग से संभावित खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
