जांजगीर-खोखरा। (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)
उच्चतम न्यायालय के निर्देश के तहत शनिवार को जांजगीर-खोखरा जिला जेल का व्यापक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के लिए गठित बोर्ड ऑफ विजिटर्स की टीम ने जेल परिसर में पहुंचकर बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, कानूनी सहायता, भोजन, स्वास्थ्य और मुलाकात से जुड़ी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। अधिकारियों ने जेल की व्यवस्थाओं को केवल रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति समझने का प्रयास किया।
निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहअध्यक्ष जयदीप गर्ग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मनोज कुमार कुशवाहा, कलेक्टर जन्मेजय महोबे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. युलैंडन यार्क मौजूद रहे। टीम ने जेल प्रशासन से विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के साथ ही कई स्थानों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
बंदियों को मिल रही सुविधाओं की ली जानकारी
जिला जेल में बंद व्यक्तियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं निरीक्षण का प्रमुख हिस्सा रहीं। अधिकारियों ने जेल भवन, बैरकों, मुलाकात कक्ष, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अलावा बंदियों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं की भी जानकारी ली गई।
जेल जैसी संवेदनशील जगह पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और उनकी गुणवत्ता सीधे तौर पर बंदियों के दैनिक जीवन से जुड़ी होती है। इसी वजह से निरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं को मौके पर देखकर उनकी स्थिति समझने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने जेल प्रशासन से बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली और अलग-अलग व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान यह भी देखा गया कि बंदियों और उनके परिजनों के लिए बनाए गए सहायता केंद्र किस तरह काम कर रहे हैं।
भोजन की गुणवत्ता पर भी अधिकारियों की नजर
निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई। टीम ने भोजन की गुणवत्ता और इससे जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
जेल में बंद व्यक्तियों के लिए नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता, व्यवस्था और उससे जुड़ी प्रक्रिया का निरीक्षण जेल प्रशासन की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने इस पहलू को भी निरीक्षण में शामिल किया।
लीगल एड क्लिनिक का किया निरीक्षण
जिला जेल में बंद कई लोगों के लिए कानूनी सहायता एक महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल परिसर में संचालित लीगल एड क्लिनिक की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
टीम ने यह जानकारी ली कि बंदियों को उनके मामलों से संबंधित कानूनी सहायता किस प्रकार उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों ने बंदियों से उनके मामलों से जुड़ी समस्याओं के बारे में भी पूछा और कानूनी सहायता की स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण का यह हिस्सा इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि आर्थिक या अन्य कारणों से वकील की सुविधा हासिल नहीं कर पाने वाले बंदियों के लिए विधिक सहायता व्यवस्था अहम भूमिका निभाती है।
मुलाकाती हेल्प डेस्क और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष भी देखा
बोर्ड ऑफ विजिटर्स ने बंदियों के परिजनों से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। जेल में बनाए गए मुलाकाती हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने यह देखा कि बंदियों से मिलने आने वाले परिजनों के लिए किस प्रकार की व्यवस्था उपलब्ध है।
इसके साथ ही जेल में संचालित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने जेल प्रशासन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ी व्यवस्था की जानकारी ली।
बंदियों और उनके परिवारों के बीच संपर्क की व्यवस्था जेल प्रशासन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसलिए मुलाकात कक्ष और हेल्प डेस्क जैसी सुविधाओं का निरीक्षण भी दौरे में शामिल रहा।
शिकायत पेटी और प्राथमिक उपचार की भी जानकारी
निरीक्षण के दौरान जेल में लगी शिकायत पेटी को भी देखा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी ली कि बंदियों की शिकायतों और समस्याओं को सामने रखने के लिए कौन-कौन से माध्यम उपलब्ध हैं।
इसके अलावा बंदियों के लिए उपलब्ध प्राथमिक उपचार व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली गई। टीम ने यह समझने का प्रयास किया कि आवश्यकता पड़ने पर बंदियों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा किस प्रकार उपलब्ध कराई जाती है।
अधिकारियों ने बंदियों के कपड़ों की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। इस तरह निरीक्षण में केवल जेल भवन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक सीमित न रहकर बंदियों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया।
बंदियों से सीधे बातचीत कर जानी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बंदियों से भी बातचीत की। उनसे उनके मामलों से जुड़ी समस्याओं और कानूनी सहायता की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई।
ऐसी बातचीत का उद्देश्य जेल प्रशासन के रिकॉर्ड के अलावा बंदियों के अनुभवों को भी समझना रहा। बंदियों से सीधे जानकारी लेने के दौरान उनकी ओर से बताई गई समस्याओं और आवश्यकताओं को जाना गया।
इस दौरान अधिकारियों ने यह भी जानकारी ली कि बंदियों को अपने मामलों में कानूनी सहायता प्राप्त करने में किसी प्रकार की समस्या तो नहीं है।
जातिगत भेदभाव से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी
निरीक्षण के दौरान जेल के अलग-अलग रजिस्टरों और अन्य स्थानों पर जातिगत भेदभाव से संबंधित स्थिति के बारे में भी जानकारी ली गई। अधिकारियों ने इस पहलू को भी निरीक्षण का हिस्सा बनाया।
जेल जैसी संस्थागत व्यवस्था में सभी बंदियों के साथ समान व्यवहार और उपलब्ध सुविधाओं तक समान पहुंच महत्वपूर्ण विषय है। इसी संदर्भ में अधिकारियों ने संबंधित रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
वास्तविक स्थिति का जायजा लेना रहा निरीक्षण का उद्देश्य
अधिकारियों के मुताबिक, निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना था। इसके लिए टीम ने अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और जेल प्रशासन से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण में भोजन, कानूनी सहायता, मुलाकात व्यवस्था, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार, शिकायत पेटी और बैरकों सहित कई महत्वपूर्ण पहलुओं को देखा गया।
इस तरह यह निरीक्षण केवल जेल भवन की स्थिति देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बंदियों के अधिकारों, सुविधाओं और उनकी रोजमर्रा की आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी इसमें शामिल किया गया।
ये अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक डी.डी. टोडर, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के वकील लिलेश्वर प्रसाद रत्नाकर, पैरालीगल वालेंटियर जयराम गढ़ेवाल और संयुक्त कलेक्टर स्निग्धा तिवारी सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
बोर्ड ऑफ विजिटर्स के इस निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन ने टीम को विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी उपलब्ध कराई। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सुविधाओं और संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
जांजगीर-खोखरा जिला जेल का यह निरीक्षण बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जमीनी स्थिति समझने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रक्रिया रहा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत हुए इस निरीक्षण में जेल की बुनियादी सुविधाओं से लेकर कानूनी सहायता और बंदियों की शिकायतों तक कई पहलुओं को देखा गया।
विशेष रूप से लीगल एड क्लिनिक, मुलाकाती हेल्प डेस्क, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, भोजन, पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार और शिकायत पेटी जैसी व्यवस्थाओं की पड़ताल की गई। साथ ही बंदियों से सीधे बातचीत कर उनके मामलों और कानूनी सहायता से संबंधित समस्याओं की जानकारी ली गई।
ऐसे निरीक्षणों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि जेल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल दस्तावेजों से नहीं, बल्कि मौके पर उपलब्ध सुविधाओं और बंदियों के अनुभवों से भी किया जा सकता है। जांजगीर-खोखरा जिला जेल में हुआ यह निरीक्षण इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ किया गया।
