गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के ग्राम सेमरा में 9 अगस्त क्रांति दिवस पर जिला कांग्रेस कमेटी ने स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में भारत छोड़ो आंदोलन, संविधान, लोकतंत्र और आदिवासी वीरों के योगदान को याद करते हुए नई पीढ़ी को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया गया।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) 9 अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सेमरा में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों और अमर शहीदों के चित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। पूरे आयोजन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रसेवा का वातावरण देखने को मिला।
भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को किया याद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष गजमति भानु ने कहा कि 9 अगस्त भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन वर्ष 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का आह्वान किया गया था, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।
उन्होंने कहा कि आज जिस स्वतंत्र भारत में हम स्वतंत्र रूप से अपने अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं, वह लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की मर्यादा की रक्षा के लिए सदैव सजग रहे।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की जिम्मेदारी, संवैधानिक मूल्यों के सम्मान और सामाजिक समरसता से मजबूत होता है। आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम का वास्तविक इतिहास बताना भी समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
आदिवासी वीरों के योगदान को भी मिला सम्मान
अपने संबोधन में गजमति भानु ने स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज के योगदान को भी विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई केवल शहरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि जंगलों और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले अनेक आदिवासी वीरों ने भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने कहा कि इन वीरों के बलिदान को इतिहास में वह स्थान मिलना चाहिए जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग को उनके योगदान से परिचित कराना समय की आवश्यकता है, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास को समझ सके।
क्रांति दिवस केवल स्मरण नहीं, जिम्मेदारियों का भी दिन

कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाब राज ने कहा कि क्रांति दिवस केवल इतिहास के पन्नों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपने राष्ट्रीय दायित्वों को समझने और निभाने का भी दिन है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसे मजबूत बनाने की जिम्मेदारी आज हर नागरिक की है। लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को पढ़ें, स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें।
स्वतंत्रता आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम में बेचू अहिरे ने स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी का संघर्ष लंबा और कठिन था, जिसमें असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल यात्राएं कीं, यातनाएं सही और अंततः अपने प्राणों का बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, साहस और एकजुटता का परिणाम थी। ऐसे महान सेनानियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
नई पीढ़ी तक पहुंचे स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्श

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुद्रिका सर्राटी एवं मनीष दुबे ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजाद कराने के लिए कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया। उनका जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और उन महान व्यक्तित्वों के जीवन से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है। यदि नई पीढ़ी इन आदर्शों को अपनाती है तो देश और समाज दोनों मजबूत होंगे।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना चाहिए।
देशभक्ति और सामाजिक जागरूकता का संदेश
पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने राष्ट्रगान तथा देशभक्ति के नारों के साथ स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि आजादी केवल इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और कर्तव्य से जुड़ी हुई है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लिया। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का भी आह्वान किया गया।
क्रांति दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज, विशेषकर युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रनिर्माण में नागरिकों की भूमिका पर गंभीरता से विचार करने का संदेश भी दिया।
