रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय में इमरजेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब गंभीर मरीजों को सीधे इमरजेंसी में प्रवेश मिलेगा। जानिए नई प्रवेश एवं पंजीयन व्यवस्था, इसके फायदे और अस्पताल प्रशासन की पूरी योजना।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय ने मरीजों की सुविधा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी विभाग की प्रवेश और पंजीयन व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए ऐसी नई प्रणाली लागू की है, जिससे गंभीर मरीजों को अब इलाज के लिए अनावश्यक इंतजार या भीड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई ऐसे मरीज भी होते हैं जिनकी हालत अत्यंत गंभीर होती है और जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। लेकिन अब तक भीड़, लंबी कतारों और पंजीयन प्रक्रिया के कारण कई बार मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अस्पताल प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है।
अब CMO कक्ष बनेगा मुख्य प्रवेश और पंजीयन केंद्र
नई व्यवस्था के अनुसार ओपीडी गेट स्थित कक्ष क्रमांक-100, जिसे कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर (CMO) कक्ष के रूप में जाना जाता है, अब आपातकालीन मरीजों के लिए मुख्य प्रवेश और प्रारंभिक पंजीयन केंद्र होगा।
इस व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई मरीज अस्पताल पहुंचेगा, सबसे पहले उसकी जांच CMO द्वारा की जाएगी। डॉक्टर मरीज की स्थिति का तत्काल आकलन करेंगे और यदि मरीज गंभीर अवस्था में पाया जाता है, तो उसे बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता या कागजी प्रक्रिया में उलझाए सीधे इमरजेंसी विभाग में भेज दिया जाएगा।
इससे इलाज शुरू होने में लगने वाला समय काफी कम होगा और गंभीर मरीजों को “गोल्डन ऑवर” के दौरान बेहतर चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
गंभीर मरीजों को नहीं करनी पड़ेगी धक्का-मुक्की
अक्सर देखा जाता था कि अस्पताल में अधिक भीड़ होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को प्रवेश के दौरान धक्का-मुक्की और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता था। कई बार स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर लाए गए मरीजों को भीड़ के बीच से निकालना चुनौती बन जाता था।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य इसी समस्या को समाप्त करना है।
अब मरीजों की स्क्रीनिंग प्रवेश बिंदु पर ही हो जाएगी, जिससे गंभीर मरीजों को सीधे उपचार कक्ष तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे न केवल मरीजों की परेशानी कम होगी बल्कि अस्पताल के भीतर भी अनावश्यक भीड़ नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
प्रारंभिक जांच के बाद तुरंत मिलेगा इलाज
नई प्रणाली में प्राथमिकता मरीज की चिकित्सकीय स्थिति को दी गई है।
CMO कक्ष में मौजूद डॉक्टर मरीज की प्रारंभिक जांच करेंगे और यह तय करेंगे कि—
- मरीज को तत्काल इमरजेंसी उपचार की आवश्यकता है या नहीं।
- किस विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक की जरूरत होगी।
- क्या मरीज को तत्काल भर्ती करना आवश्यक है।
- किन मरीजों को सामान्य प्रक्रिया के तहत आगे भेजा जाएगा।
इस प्रक्रिया से गंभीर मरीजों का इलाज पहले शुरू होगा और समय की बर्बादी रोकी जा सकेगी।
बढ़ती मरीज संख्या के कारण लिया गया निर्णय
डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल है। यहां रायपुर सहित दुर्ग, भिलाई, महासमुंद, बलौदाबाजार, धमतरी, गरियाबंद, बलरामपुर, जशपुर, बस्तर, सरगुजा और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
प्रतिदिन हजारों मरीजों की ओपीडी और सैकड़ों मरीजों की इमरजेंसी सेवाएं संचालित होती हैं। लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह बदलाव किया है ताकि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
मरीजों और परिजनों को मिलेगा सीधा लाभ
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को कई स्तर पर राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रमुख लाभ
- गंभीर मरीजों को तत्काल प्राथमिकता मिलेगी।
- इलाज शुरू होने में लगने वाला समय कम होगा।
- प्रवेश द्वार पर भीड़ और अव्यवस्था में कमी आएगी।
- पंजीयन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।
- डॉक्टर मरीज की स्थिति का तुरंत आकलन कर सकेंगे।
- स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से आने वाले मरीजों की आवाजाही आसान होगी।
- अस्पताल के संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
इमरजेंसी सेवाओं को और प्रभावी बनाने की दिशा में पहल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े अस्पताल की इमरजेंसी सेवा उसकी सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है। सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर चोट, जहरीले पदार्थ के सेवन, प्रसूति संबंधी आपात स्थिति या अन्य गंभीर मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
ऐसी परिस्थितियों में यदि मरीज को बिना देरी सीधे इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इसी सोच के साथ अस्पताल प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने का निर्णय लिया है।
भीड़ प्रबंधन में भी मिलेगी मदद
अस्पताल में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल इमरजेंसी ही नहीं बल्कि अस्पताल परिसर में भीड़ प्रबंधन भी बड़ी चुनौती बन गया था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों की आवाजाही व्यवस्थित होगी। जिन मरीजों को तत्काल इमरजेंसी उपचार की आवश्यकता होगी उन्हें अलग से प्राथमिकता मिलेगी, जबकि अन्य मरीज निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित विभागों में भेजे जाएंगे।
इससे अस्पताल के विभिन्न विभागों पर अनावश्यक दबाव कम होगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम


अस्पताल प्रशासन का यह निर्णय केवल प्रवेश व्यवस्था में बदलाव नहीं बल्कि मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को
मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्क्रीनिंग और ट्रायेज प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मरीजों को तेजी से उपचार मिलेगा, डॉक्टरों का कार्यप्रवाह बेहतर होगा और अस्पताल की समग्र कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा।
आने वाले समय में यदि इस व्यवस्था का सफल संचालन होता है, तो इसे प्रदेश के अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी अपनाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय द्वारा लागू की गई नई इमरजेंसी प्रवेश एवं पंजीयन व्यवस्था मरीजों के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। अब गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर द्वारा प्राथमिक जांच के बाद सीधे इमरजेंसी विभाग में भेजा जाएगा, जिससे इलाज में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी। बढ़ती मरीज संख्या के बीच यह नई व्यवस्था न केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगी, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को भी बड़ी राहत प्रदान करेगी।
