कोरबा के तरदा गांव में हसदेव नदी से भटककर 4.5 फीट का मगरमच्छ खेत में पहुंच गया। ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए उसे सुरक्षित पकड़ा, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर आगे की कार्रवाई शुरू की। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में लगातार हो रही बारिश और हसदेव नदी के बढ़ते जलस्तर का असर अब आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। रविवार सुबह शहर से लगे तरदा गांव में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब खेत में काम करने पहुंचे किसानों की नजर करीब 4.5 फीट लंबे मगरमच्छ पर पड़ी। खेत के बीच मगरमच्छ दिखाई देने की खबर कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने बिना किसी तरह की लापरवाही किए सावधानी बरती। समझदारी और संयम का परिचय देते हुए उन्होंने मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से घेरकर पकड़ लिया और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
सुबह खेत पहुंचे किसान तो सामने था मगरमच्छ

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह किसान रोजाना की तरह खेती का काम करने खेतों की ओर निकले थे। इसी दौरान एक किसान की नजर खेत में बैठे मगरमच्छ पर पड़ी। पहले तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन पास जाकर देखने पर पुष्टि हुई कि वह वास्तव में मगरमच्छ है।
इसके बाद किसान ने तुरंत गांव के अन्य लोगों को सूचना दी। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि किसी ने भी मगरमच्छ के ज्यादा करीब जाने की कोशिश नहीं की। ग्रामीणों ने दूरी बनाए रखते हुए उसे नियंत्रित किया, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
हसदेव नदी से भटककर खेत तक पहुंचने की आशंका
स्थानीय लोगों का मानना है कि लगातार बारिश और हसदेव नदी के उफान के कारण मगरमच्छ अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर खेतों की ओर आ गया होगा। तरदा गांव हसदेव नदी के काफी करीब स्थित है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कई बार जलीय जीव आसपास के खेतों और बस्तियों तक पहुंच जाते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ भी बताते हैं कि मानसून के दौरान मगरमच्छ अक्सर नए जल स्रोतों की तलाश में या तेज बहाव के कारण अपने मूल स्थान से दूर निकल जाते हैं। ऐसे समय में नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।
4.5 फीट का मगरमच्छ, लेकिन खतरा कम नहीं

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह आकार में अपेक्षाकृत छोटा था और संभवतः मगरमच्छ का बच्चा है, लेकिन वन विभाग का कहना है कि छोटे मगरमच्छ भी आक्रामक हो सकते हैं। यदि उन्हें खतरा महसूस हो या कोई उनके बहुत करीब पहुंच जाए, तो वे हमला भी कर सकते हैं।
इसी वजह से वन विभाग लगातार लोगों से अपील करता है कि यदि कहीं मगरमच्छ दिखाई दे तो उसे पकड़ने या भगाने की कोशिश स्वयं न करें, बल्कि तुरंत विभाग को सूचना दें।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत पहुंची मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम के सदस्य जितेंद्र सारथी ने बताया कि फिलहाल केवल एक मगरमच्छ मिलने की पुष्टि हुई है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए मगरमच्छ को सुरक्षित नियंत्रित कर रखा था, जिससे रेस्क्यू अभियान आसान हो गया। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार मगरमच्छ की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
आसपास के इलाकों में भी बढ़ाई जा रही निगरानी
वन विभाग का कहना है कि चूंकि यह इलाका हसदेव नदी से जुड़ा हुआ है, इसलिए संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आसपास अन्य मगरमच्छ भी मौजूद हों। इसी को ध्यान में रखते हुए नदी किनारे के गांवों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।
रेस्क्यू टीम और वन अमला आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण भी कर रहा है, ताकि यदि कहीं और मगरमच्छ दिखाई दे तो समय रहते कार्रवाई की जा सके। विभाग ने ग्रामीणों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव दिखाई देने पर तत्काल सूचना देने की अपील की है।
बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नदियों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। तेज बहाव के कारण मगरमच्छ कई बार अपने मूल क्षेत्र से बहकर दूसरे स्थानों तक पहुंच जाते हैं। खेतों में पानी भर जाने और नदी का विस्तार बढ़ने से उनके लिए गांवों तक पहुंचना आसान हो जाता है।
ऐसी घटनाएं केवल कोरबा ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य नदी किनारे बसे इलाकों में भी समय-समय पर सामने आती रहती हैं। इसलिए ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रामीणों के लिए वन विभाग की सलाह
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि मगरमच्छ दिखाई दे तो घबराएं नहीं और न ही उसके पास जाने का प्रयास करें। बच्चों और पालतू पशुओं को नदी किनारे या जलभराव वाले क्षेत्रों में अकेले न जाने दें। किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें, ताकि सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
तरदा गांव में ग्रामीणों द्वारा दिखाई गई सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। समय रहते सूचना मिलने और संयम बनाए रखने के कारण मगरमच्छ को भी सुरक्षित बचा लिया गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
