छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए PARAS (Project Assessment, Review and Analysis System) लागू किया है। अब हर महीने मुख्यमंत्री स्तर पर योजनाओं की समीक्षा होगी, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचेगा।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में चल रही सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अब राज्य की प्रमुख योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा हर महीने मुख्यमंत्री स्तर पर की जाएगी। इसके लिए Project Assessment, Review and Analysis System (PARAS) यानी ‘पारस’ नामक एक आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू की गई है।
सरकार का मानना है कि योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के साथ तैयार की गई यह नई व्यवस्था प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने, परियोजनाओं की गति तेज करने और सरकारी धन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
क्या है PARAS सिस्टम?
PARAS यानी Project Assessment, Review and Analysis System एक डिजिटल मॉनिटरिंग एवं समीक्षा प्रणाली है, जिसके माध्यम से राज्य सरकार विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं और विकास परियोजनाओं की नियमित निगरानी करेगी।
इस प्रणाली में परियोजनाओं की प्रगति, निर्धारित समयसीमा, वित्तीय व्यय, कार्य की गुणवत्ता और जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए अधिकारियों और सरकार को परियोजनाओं की अद्यतन जानकारी उपलब्ध रहेगी, जिससे किसी भी प्रकार की देरी या समस्या की पहचान समय रहते की जा सकेगी।
हर महीने मुख्यमंत्री करेंगे समीक्षा
नई व्यवस्था के तहत अब केवल विभागीय बैठकों तक समीक्षा सीमित नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री स्वयं प्रत्येक माह प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे।
इस दौरान उन परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिनमें कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है या जहां समयसीमा का पालन नहीं हो रहा है। संबंधित विभागों से जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यक निर्देश भी दिए जाएंगे ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचाने पर जोर
राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य यह है कि सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। कई बार प्रशासनिक देरी, समन्वय की कमी या निगरानी के अभाव में योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होता है। ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए PARAS सिस्टम को प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में विकसित किया गया है।
सरकार का मानना है कि यदि किसी योजना में प्रारंभिक स्तर पर ही समस्याओं की पहचान कर ली जाए तो समय रहते सुधारात्मक कदम उठाकर परियोजना को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप आगे बढ़ाया जा सकता है।
रियल टाइम डेटा से होंगे त्वरित फैसले
PARAS प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें परियोजनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध रहेगी। इससे सरकार को किसी भी परियोजना की वर्तमान स्थिति का आकलन करने में सुविधा होगी।
यदि किसी परियोजना में बजट उपयोग कम है, कार्य धीमी गति से चल रहा है या किसी प्रशासनिक स्तर पर बाधा आ रही है तो उसकी जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी। इसके आधार पर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे और समस्याओं का समाधान करने की प्रक्रिया तेज होगी।
प्रशासनिक जवाबदेही होगी मजबूत
नई व्यवस्था के लागू होने से विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। प्रत्येक विभाग को अपनी योजनाओं की अद्यतन जानकारी समय-समय पर उपलब्ध करानी होगी।
यदि किसी परियोजना में लगातार देरी होती है या लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं, तो उसकी समीक्षा मुख्यमंत्री स्तर पर होगी। इससे अधिकारियों में कार्य के प्रति गंभीरता बढ़ने और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस
राज्य सरकार केवल परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सड़क, भवन, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास, नगरीय विकास तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों की परियोजनाओं की प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। इससे गुणवत्तापूर्ण कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि PARAS जैसी डिजिटल निगरानी प्रणाली राज्य में सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा दे सकती है। डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया अपनाने से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
इसके साथ ही सरकार को विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का लगातार आकलन करने में सुविधा मिलेगी, जिससे नीतिगत फैसले अधिक प्रभावी तरीके से लिए जा सकेंगे।
आम नागरिकों को क्या होगा फायदा?
यदि PARAS प्रणाली प्रभावी रूप से लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम होगी, योजनाओं का लाभ निर्धारित समय पर लोगों तक पहुंचेगा और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।
साथ ही, योजनाओं की नियमित निगरानी से वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास कार्यों की पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
सुशासन की दिशा में अहम पहल
राज्य सरकार का यह कदम केवल समीक्षा बैठकें बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन व्यवस्था को परिणाम आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। नियमित मॉनिटरिंग, डिजिटल विश्लेषण और समयबद्ध समीक्षा के माध्यम से सरकार योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही है।
आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि PARAS प्रणाली किस प्रकार सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने, प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत करने और जनता तक विकास का लाभ समय पर पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाती है। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री स्तर पर हर महीने होने वाली समीक्षा से विभागों की कार्यप्रणाली पर सीधी निगरानी रहेगी और विकास कार्यों में लापरवाही की गुंजाइश पहले की तुलना में काफी कम हो सकती है।
