पोषण पखवाड़ा 2026 में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कुपोषण, स्टंटिंग और अंडरवेट में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई। जानिए कैसे आईसीडीएस, पोषण अभियान और मिशन वात्सल्य ने बदली लाखों बच्चों की जिंदगी।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। किसी भी राज्य की असली तरक्की केवल सड़कों, भवनों और उद्योगों से नहीं, बल्कि वहां के बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और के दौरान छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल कर यह साबित किया है कि यदि शासन की योजनाएं सही दिशा में और प्रभावी ढंग से लागू हों तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती पर भी सफलतापूर्वक काबू पाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ बाल विकास और पोषण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
कुपोषण के खिलाफ लगातार चला व्यापक अभियान
छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों के दौरान कुपोषण कम करने के लिए कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए गए। आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत बनाने, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण उपलब्ध कराने, गर्भवती एवं धात्री माताओं की निगरानी तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को सफल बनाया।
पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं—
- स्टंटिंग (बौनापन) में 7.82 प्रतिशत की कमी
- कम वजन (Low Weight) की समस्या में 4.36 प्रतिशत की कमी
- अंडरवेट बच्चों की संख्या में 2.76 प्रतिशत की कमी
सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि दिसंबर 2023 में जहां स्टंटिंग की दर 30.27 प्रतिशत थी, वहीं जून 2026 तक यह घटकर 22.45 प्रतिशत पर पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में इस स्तर का सुधार किसी भी राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्र बने पोषण अभियान की मजबूत नींव

राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल बच्चों के भोजन वितरण तक सीमित नहीं रखा बल्कि उन्हें पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता के समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया।
इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों की नियमित लंबाई और वजन की जांच की जा रही है। प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड की जा रही है ताकि समय रहते आवश्यक उपचार और पोषण उपलब्ध कराया जा सके।
इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे जन्म के बाद बच्चों में कुपोषण की संभावना कम हो रही है।
पोषण ट्रैकर ऐप से बढ़ी पारदर्शिता और निगरानी
राज्य में पोषण ट्रैकर ऐप का प्रभावी उपयोग इस अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी प्रत्येक जानकारी रियल टाइम में दर्ज की जा रही है। इससे अधिकारियों को यह पता चल जाता है कि किस क्षेत्र में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है और किन बच्चों को अतिरिक्त पोषण सहायता उपलब्ध करानी है।
डिजिटल मॉनिटरिंग के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ी है और लाभार्थियों तक समय पर सेवाएं पहुंच रही हैं।
आईसीडीएस और पोषण अभियान का मिला बेहतर परिणाम
राज्य सरकार द्वारा समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) और पोषण अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन का लाभ सीधे लाखों बच्चों और माताओं तक पहुंचा है।
इन योजनाओं के माध्यम से—
- पूरक पोषण आहार का नियमित वितरण
- टीकाकरण एवं स्वास्थ्य परीक्षण
- माताओं को पोषण संबंधी परामर्श
- बच्चों की वृद्धि की नियमित निगरानी
- गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान और विशेष उपचार
जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया।
इसी का परिणाम है कि राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।
मिशन वात्सल्य ने बच्चों की सुरक्षा को भी दी नई दिशा

पोषण के साथ-साथ राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
मिशन वात्सल्य के तहत अनाथ, निराश्रित, जरूरतमंद और विशेष परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास उपलब्ध कराया जा रहा है।
बाल संरक्षण संस्थाओं को मजबूत बनाने के साथ-साथ जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को भी सक्रिय किया गया है ताकि प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक सरकारी सहायता पहुंच सके।
बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान से बढ़ी सामाजिक जागरूकता
राज्य सरकार का बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान भी लगातार प्रभावी साबित हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता कार्यक्रम, पंचायतों की भागीदारी, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी जा रही है।
इस अभियान का सकारात्मक प्रभाव बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके भविष्य पर भी दिखाई देने लगा है।
समुदाय की भागीदारी बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल सरकारी योजनाओं से कुपोषण समाप्त नहीं किया जा सकता। इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी होती है।
छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदाय ने मिलकर पोषण अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया।
गांव-गांव में आयोजित पोषण जागरूकता कार्यक्रम, मातृ समितियों की बैठकें, पोषण वाटिका और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे प्रयासों ने अभियान को मजबूत बनाया।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान
पोषण पखवाड़ा 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त करना केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि राज्य में चल रहे प्रभावी पोषण प्रबंधन और बाल विकास कार्यक्रमों की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि योजनाओं की नियमित निगरानी, तकनीक का उपयोग और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो तो कुपोषण जैसी चुनौती को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
आगे की राह
राज्य सरकार अब कुपोषण को और कम करने, प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचाने, आंगनबाड़ी सेवाओं को आधुनिक बनाने और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति से प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ बाल स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल राज्य बन सकता है।
