मारवाही वन क्षेत्र में जंगली हाथियों के दल ने तीन घरों को क्षतिग्रस्त कर 15 किसानों की धान सहित अन्य फसलों को रौंद दिया। ग्रामीणों में दहशत का माहौल, वन विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में जंगली हाथियों का बढ़ता आतंक एक बार फिर सामने आया है। बिलासपुर जिले के मारवाही वन क्षेत्र में हाथियों के एक दल ने देर रात गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने तीन ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि करीब 15 किसानों की धान सहित अन्य खड़ी फसलों को रौंद दिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। ग्रामीण पूरी रात जागकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने को मजबूर हैं।
यह घटना केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के सामने जान-माल की सुरक्षा का गंभीर संकट भी खड़ा कर रही है। लगातार हाथियों की आवाजाही से लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
रात के अंधेरे में गांव में घुसा हाथियों का दल
ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों का दल देर रात जंगल से निकलकर गांव की ओर पहुंचा। पहले हाथियों ने खेतों में प्रवेश किया और वहां लगी धान सहित अन्य फसलों को रौंदना शुरू कर दिया। इसके बाद हाथी आबादी वाले हिस्से में पहुंच गए, जहां तीन मकानों को नुकसान पहुंचाया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हाथियों की संख्या अधिक होने के कारण ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर जाकर अपनी जान बचाई। कई परिवार पूरी रात घरों से बाहर या ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर रहे।
15 किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
हाथियों के इस हमले से करीब 15 किसानों की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। खेतों में तैयार हो रही धान की फसल के अलावा अन्य कृषि फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि कई महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई।
एक किसान ने बताया कि बारिश के बीच लगातार खेतों में मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन हाथियों के झुंड ने देखते ही देखते पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है, क्योंकि हाथियों का दल अभी भी आसपास के जंगलों में मौजूद बताया जा रहा है।
तीन घरों को पहुंचा भारी नुकसान
हाथियों ने गांव के तीन मकानों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। दीवारें टूट गईं, घरेलू सामान बिखर गया और कई जरूरी वस्तुएं नष्ट हो गईं। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी ग्रामीण के घायल होने की सूचना नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते लोग घरों से बाहर नहीं निकलते तो बड़ा हादसा हो सकता था। हाथियों के गांव में घुसने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
रातभर जागकर पहरा दे रहे ग्रामीण
मारवाही क्षेत्र के कई गांवों में हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण ग्रामीण रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। गांव के युवक समूह बनाकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं ताकि समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके।
हालांकि वन विभाग बार-बार यह अपील करता है कि हाथियों को भगाने या उनके करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
वन विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम गांव पहुंची। अधिकारियों ने प्रभावित घरों और खेतों का निरीक्षण कर नुकसान का प्रारंभिक आकलन शुरू किया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नियमानुसार प्रभावित किसानों और परिवारों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही हाथियों की निगरानी बढ़ाई गई है ताकि उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं हाथियों का दल दिखाई दे तो इसकी तत्काल सूचना वन विभाग को दें और किसी भी स्थिति में हाथियों के पास न जाएं।
मानव-हाथी संघर्ष बनता जा रहा बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। जंगलों से निकलकर हाथियों का गांवों की ओर आना अब आम बात होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण जंगलों में भोजन और प्राकृतिक आवास की कमी, मानव गतिविधियों का विस्तार तथा खेती वाले क्षेत्रों तक हाथियों की आसान पहुंच को माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी अक्सर अपने पारंपरिक रास्तों का उपयोग करते हैं। यदि इन रास्तों पर गांव या खेती विकसित हो जाती है तो टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में केवल राहत और मुआवजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की रणनीति पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
ग्रामीणों की मांग—स्थायी समाधान निकाला जाए
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि हाथियों की लगातार आवाजाही वाले गांवों में विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएं। साथ ही समय पर अलर्ट सिस्टम, सौर ऊर्जा आधारित फेंसिंग, निगरानी टावर और त्वरित राहत व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
किसानों का कहना है कि फसल उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। यदि हर साल इसी तरह नुकसान होता रहा तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने शीघ्र मुआवजा वितरण और प्रभावी सुरक्षा उपायों की भी मांग की है।
प्रशासन ने की सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों की सूचना मिलते ही भीड़ न जुटाएं, मोबाइल से वीडियो बनाने के लिए उनके पास न जाएं और बच्चों को अकेले खेतों या जंगल की ओर न भेजें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना देने की सलाह दी गई है।
मारवाही में हुई यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि वन क्षेत्रों से लगे गांवों में मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। फिलहाल ग्रामीणों की नजरें वन विभाग की कार्रवाई और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हैं, जबकि हाथियों की मौजूदगी से पूरे इलाके में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
