मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर में आयोजित प्रोजेक्ट “सहारा” के तहत दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘दिव्यांग’ शब्द को सम्मान और आत्मगौरव का प्रतीक बताया। इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए 7 करोड़ रुपये की घोषणा भी की। पढ़ें पूरी विस्तृत खबर।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रोजेक्ट “सहारा” के अंतर्गत दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम एक प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिव्यांगजनों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी संवेदनशील और विकसित समाज की वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और आगे बढ़ने का अधिकार मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी प्रतिभा, क्षमता और आत्मविश्वास किसी भी सामान्य व्यक्ति से कम नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर, आवश्यक संसाधन और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार इसी सोच के साथ दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
‘दिव्यांग’ शब्द ने बदली समाज की सोच
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ‘विकलांग’ शब्द के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द देकर करोड़ों लोगों के जीवन में सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव पैदा किया। यह केवल शब्द परिवर्तन नहीं था बल्कि समाज की सोच बदलने वाला एक सकारात्मक कदम था।
उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को सम्मानजनक संबोधन मिलता है तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। आज देशभर में दिव्यांगजन अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। सरकार की नीतियों का उद्देश्य भी यही है कि दिव्यांगजन किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमता के बल पर आत्मनिर्भर बनें।
समान अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समावेशी समाज तभी बन सकता है जब प्रत्येक नागरिक को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले। दिव्यांगजन केवल सहायता के पात्र नहीं हैं बल्कि वे समाज की अमूल्य शक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक और सहायक उपकरणों के माध्यम से उनकी दैनिक जिंदगी को अधिक सहज और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।
प्रोजेक्ट “सहारा” बना उम्मीद की नई किरण

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग तथा अन्य उपयोगी उपकरण शामिल रहे।
इन उपकरणों के माध्यम से दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन की कठिनाइयों से राहत मिलने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी मिलेगा। कार्यक्रम में मौजूद लाभार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास और खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सहायक उपकरण केवल सुविधा प्रदान नहीं करते, बल्कि व्यक्ति के आत्मसम्मान और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता को भी मजबूत करते हैं। यही कारण है कि सरकार ऐसे कार्यक्रमों को लगातार विस्तार दे रही है।
जुनेजा इंडोर स्टेडियम के लिए 7 करोड़ रुपये की बड़ी घोषणा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि बेहतर खेल अधोसंरचना केवल खिलाड़ियों के लिए ही आवश्यक नहीं होती, बल्कि ऐसे सामाजिक, सांस्कृतिक और जनकल्याणकारी आयोजनों के सफल संचालन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्टेडियम भविष्य में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक कार्यक्रमों की मेजबानी भी प्रभावी ढंग से कर सकेगा।
समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ता छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है जहां किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी शारीरिक स्थिति के कारण पीछे न रहना पड़े। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल सरकारी सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। जब समाज उन्हें समान अवसर देगा, तभी वास्तविक समावेशी विकास संभव हो सकेगा।
दिव्यांगजनों की सफलता बन रही प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश और प्रदेश के अनेक दिव्यांगजन खेल, शिक्षा, विज्ञान, कला, प्रशासन और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि अवसर और संसाधन उपलब्ध हों तो कोई भी व्यक्ति अपनी सीमाओं को पार कर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना रखें तथा उन्हें समाज का समान भागीदार मानें।
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता नहीं, आत्मनिर्भरता

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सहायक उपकरण, कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं मिलकर दिव्यांगजनों के जीवन में स्थायी बदलाव ला सकती हैं। राज्य सरकार भी इसी दिशा में कार्य करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
प्रोजेक्ट “सहारा” जैसी पहलें न केवल सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का माध्यम बन रही हैं, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास भी पैदा कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंत में कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी दिव्यांगजनों के हितों की रक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण और उन्हें बेहतर जीवन उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, समाज और स्वयं दिव्यांगजनों के संयुक्त प्रयास से एक ऐसा समावेशी और संवेदनशील छत्तीसगढ़ तैयार होगा, जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, समान अवसर और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन जी सकेगा।