कोरबा के छुरी स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में छात्रों ने छात्रावास की अव्यवस्थाओं, खराब भोजन और प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में कोरबा-कटघोरा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया। जानिए पूरा मामला, छात्रों की मांगें और प्रशासन की कार्रवाई।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। जिले के छुरी स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में लंबे समय से चली आ रही कथित अव्यवस्थाओं के खिलाफ रविवार सुबह छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। छात्र-छात्राओं ने विद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कोरबा-कटघोरा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
यह विरोध केवल एक दिन की नाराजगी नहीं था, बल्कि छात्रों के अनुसार लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का परिणाम था। छात्रों और उनके अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद विद्यालय प्रशासन ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सुबह क्लास की जगह सड़क पर उतरे छात्र
जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 7 बजे विद्यालय के छात्र रोजाना की तरह कक्षाओं की ओर जाने के बजाय सीधे विद्यालय परिसर से बाहर निकल आए। इसके बाद उन्होंने कोरबा-कटघोरा मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावक भी शामिल हुए। छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और विद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। सड़क जाम होने के कारण छोटे-बड़े वाहन दोनों ओर फंस गए और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्थिति ऐसी बन गई कि कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। कुछ लोग पैदल ही आगे निकलने को मजबूर हुए।
प्राचार्य और अधीक्षिका को हटाने की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विद्यालय के प्राचार्य अहमद खान और छात्रावास की अधीक्षिका पर गंभीर आरोप लगाए। छात्रों का कहना है कि विद्यालय में लगातार अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- विद्यालय के प्राचार्य को तत्काल हटाया जाए।
- छात्रावास की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किया जाए।
- छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।
- छात्रावास की साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर की जाए।
- छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जाता तो उन्हें सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आती।
भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने सबसे गंभीर शिकायत छात्रावास में मिलने वाले भोजन को लेकर की। उनका आरोप है कि कई बार भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब होती है और पोषण के मानकों का पालन नहीं किया जाता।
कुछ छात्रों ने बताया कि भोजन में स्वच्छता का अभाव रहता है, जिससे कई बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आती हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार विद्यालय प्रबंधन को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ।
अभिभावकों ने भी आरोप लगाया कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आवासीय विद्यालय में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए बेहतर भोजन और सुरक्षित वातावरण प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अभिभावकों ने भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल कई अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बच्चों ने पहले भी कई बार अपनी परेशानियां बताई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अभिभावकों का कहना है कि जब तक विद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
डेढ़ घंटे तक बाधित रहा यातायात
चक्काजाम के चलते कोरबा-कटघोरा मुख्य मार्ग पर करीब डेढ़ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई यात्री अपने जरूरी कार्यों के लिए समय पर नहीं पहुंच सके।
सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।
काफी देर तक चली समझाइश के बाद छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त किया और सड़क से हटे, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका।
आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि आवासीय विद्यालयों में छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिन संस्थानों में छात्र चौबीसों घंटे रहते हैं, वहां भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
यदि विद्यार्थियों की शिकायतों का समय रहते समाधान किया जाए तो ऐसे विवादों और आंदोलनों से बचा जा सकता है।
प्रशासन से छात्रों की उम्मीद
प्रदर्शन के बाद अब छात्रों और उनके अभिभावकों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार चाहिए।
यदि जांच में छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ विद्यालय की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता होगी।
फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन यह घटनाक्रम स्पष्ट संकेत देता है कि शिक्षा संस्थानों में छात्रों की मूलभूत सुविधाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।
