मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव और हर महीने 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। जानिए किसानों, धान खरीदी और राज्य की खाद्य व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा।
नई दिल्ली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ में किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया को और अधिक सुचारु एवं प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्र सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर राज्य से 5 लाख मीट्रिक टन चावल का शीघ्र उठाव सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक महीने पर्याप्त संख्या में रेलवे रैक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि चावल का नियमित और समयबद्ध उठाव होता है तो राज्य के गोदामों में नई खरीफ फसल के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहेगा। इससे किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के जारी रखी जा सकेगी और खाद्यान्न प्रबंधन भी अधिक प्रभावी बनेगा।
हर महीने कम से कम 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ को केंद्रीय पूल हेतु 73 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है। यह लक्ष्य राज्य की कृषि क्षमता और किसानों की मेहनत का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए परिवहन व्यवस्था मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ को हर महीने कम से कम 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराए जाएं, ताकि चावल का परिवहन तेज गति से हो सके और भंडारण की समस्या उत्पन्न न हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे रैक की पर्याप्त उपलब्धता केवल परिवहन का विषय नहीं है, बल्कि यह किसानों के हितों से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। समय पर चावल उठाव होने से मंडियों और गोदामों में जगह खाली होती रहेगी, जिससे अगली खरीदी में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है चावल का समय पर उठाव?
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां लाखों किसान खरीफ सीजन में धान की खेती करते हैं और सरकार समर्थन मूल्य पर उनकी उपज खरीदती है।
धान खरीदी के बाद उसे मिलिंग कर चावल के रूप में केंद्रीय पूल में भेजा जाता है। यदि इस प्रक्रिया में देरी होती है तो गोदाम भर जाते हैं और नई फसल के लिए भंडारण संकट उत्पन्न होने लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर चावल का उठाव होने से—
- गोदामों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
- धान खरीदी की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती।
- किसानों को भुगतान समय पर मिलने में सहायता मिलती है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खाद्यान्न की उपलब्धता बनी रहती है।
- राज्य और केंद्र के बीच खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी होती है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री की इस पहल का सबसे बड़ा लाभ राज्य के किसानों को मिलने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए धान उत्पादन पर निर्भर हैं। यदि भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया व्यवस्थित रहती है तो किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
समय पर चावल उठाव होने से मंडियों में धान का दबाव कम रहेगा और नई फसल आने पर खरीदी केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। इससे किसानों का भरोसा भी सरकारी खरीद व्यवस्था पर और मजबूत होगा।
केंद्र सरकार ने दिया सकारात्मक आश्वासन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मांग पर केंद्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान खाद्यान्न प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था तथा आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यदि रेलवे रैक की मांग को स्वीकृति मिलती है तो राज्य की खाद्यान्न आपूर्ति व्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी।
73 लाख टन चावल का लक्ष्य, बड़ी जिम्मेदारी भी
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्रीय पूल के लिए 73 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य अपने आप में बड़ा है। इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए राज्य सरकार को खरीद, मिलिंग, भंडारण और परिवहन—चारों स्तरों पर समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने परिवहन व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए रेलवे रैक की संख्या बढ़ाने की मांग की है। इससे राज्य सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हो सकेगी।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को भी मिलेगी मजबूती
चावल का नियमित उठाव केवल राज्य के किसानों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी आवश्यक है। केंद्रीय पूल में जमा होने वाला चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक पहुंचता है।
ऐसे में छत्तीसगढ़ जैसे बड़े धान उत्पादक राज्य से समय पर चावल की आपूर्ति राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रमुख सचिव भी रहे मौजूद
नई दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित रहे। बैठक में राज्य की आवश्यकताओं, परिवहन व्यवस्था और खाद्यान्न प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा केंद्र सरकार के समक्ष रखी गई यह मांग केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों किसानों के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि राज्य को समय पर 5 लाख मीट्रिक टन चावल के उठाव की सुविधा और प्रत्येक महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध हो जाते हैं, तो आगामी धान खरीदी अधिक व्यवस्थित, तेज और पारदर्शी तरीके से संचालित हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर भंडारण, तेज परिवहन और केंद्र-राज्य के बीच मजबूत समन्वय से न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ होगी।
