मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर के दुर्गम गांवों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत अरुणाचल मॉडल के आधार पर सड़क संपर्क से जोड़ने की मांग की। जानिए क्या है पूरा प्रस्ताव, इससे बस्तर के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा।
रायपुर/नई दिल्ली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग को सड़क संपर्क के माध्यम से विकास की नई दिशा देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत बस्तर के लिए विशेष प्रावधान किए जाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं, इसलिए यहां सड़क निर्माण के लिए भी विशेष नीति अपनाने की आवश्यकता है।
बैठक में प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा, ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान बस्तर के ग्रामीण इलाकों में सड़क, आधारभूत ढांचे और विकास योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बस्तर के लिए क्यों जरूरी है अरुणाचल मॉडल?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष बताया कि बस्तर के अधिकांश गांव घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में बसे हुए हैं। मौजूदा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नियमों के अनुसार केवल 500 मीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर माना जाता है।
बस्तर जैसे इलाके में गांव एक-दूसरे से काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में वर्तमान नियमों के कारण कई छोटे और दूरस्थ गांव सड़क योजना के दायरे से बाहर रह जाते हैं। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि अरुणाचल प्रदेश की तरह बस्तर में भी 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर मानने की अनुमति दी जाए।
यदि यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो बस्तर के सैकड़ों ऐसे गांव, जो वर्षों से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का लाभ मिल सकेगा।
सड़क केवल रास्ता नहीं, विकास की सबसे मजबूत कड़ी
मुख्यमंत्री साय ने बैठक में कहा कि सड़कें केवल लोगों के आने-जाने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे किसी भी क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास की आधारशिला होती हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क मिलने से—
- ग्रामीणों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
- बच्चों की शिक्षा तक पहुंच आसान होगी।
- किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी।
- युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
- सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पहुंच भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब तेजी से बदल रहा है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। ऐसे समय में सड़क संपर्क को और मजबूत बनाना बेहद आवश्यक है।
नक्सलवाद से विकास की ओर बढ़ता बस्तर
बीते कुछ वर्षों में बस्तर में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। कई ऐसे गांव जहां पहले प्रशासन की पहुंच सीमित थी, वहां अब शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।
राज्य सरकार का मानना है कि यदि सड़क नेटवर्क मजबूत होगा तो विकास की गति और तेज होगी। सड़क बनने से न केवल सरकारी योजनाओं का प्रभाव बढ़ेगा बल्कि निजी निवेश, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्र के समग्र विकास की शुरुआत सड़क संपर्क से होती है। यही कारण है कि राज्य सरकार बस्तर के लिए अलग नीति की मांग कर रही है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया सकारात्मक संकेत
मुख्यमंत्री की मांग पर केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और बस्तर जैसे क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को गंभीरता से समझती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर आवश्यक स्तर पर विचार कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस आश्वासन को बस्तर के विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बस्तर में सड़क निर्माण की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।
ग्रामीण विकास में छत्तीसगढ़ के कार्यों की सराहना
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की।
उन्होंने विशेष रूप से जीरामजी योजना के तहत मुक्तिधाम और शौचालय निर्माण जैसे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार राज्य में प्रतिदिन लगभग 1,500 आवासों का निर्माण एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
बस्तर के विकास को मिलेगी नई गति
राज्य सरकार का मानना है कि सड़क संपर्क मजबूत होने से बस्तर में विकास के नए अवसर खुलेंगे। बेहतर सड़कें बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही दूरस्थ जनजातीय गांवों तक प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच भी अधिक प्रभावी होगी।
यदि केंद्र सरकार अरुणाचल मॉडल के अनुरूप विशेष क्लस्टर व्यवस्था को मंजूरी देती है, तो यह निर्णय केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से बस्तर के विकास को नई गति मिलेगी और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र आधारभूत संरचना के मामले में देश के अग्रणी आदिवासी क्षेत्रों में शामिल होगा।
