प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संसद भवन में हुई महत्वपूर्ण मुलाकात में बस्तर विजन, राजनांदगांव की ₹10,500 करोड़ गैस आधारित यूरिया परियोजना, 461 गांवों की स्थायी बिजली व्यवस्था, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना और 2027 के लखपति दीदी सम्मेलन पर विस्तार से चर्चा हुई। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं रही, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण चर्चा के रूप में सामने आई। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के समक्ष छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के बदलते स्वरूप और राज्य की कई महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ‘बस्तर विजन’ के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार से तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए सहयोग का आग्रह किया। इनमें राजनांदगांव में लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना, बस्तर सहित 461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने की योजना तथा रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना प्रमुख रही।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।
बदलते बस्तर का रोडमैप प्रधानमंत्री के सामने रखा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि बीते वर्षों में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रिस्तरीय रणनीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जिस बस्तर की पहचान कभी नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन से होती थी, वही क्षेत्र अब तेजी से विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, हवाई संपर्क, पर्यटन, खेल और आजीविका जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार देखने को मिल रहे हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल अधोसंरचना विकसित करना नहीं बल्कि वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में स्थायी बदलाव लाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बस्तर को देश के विकास की मुख्यधारा से पूर्ण रूप से जोड़ना है ताकि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र निवेश, पर्यटन और रोजगार का नया केंद्र बन सके।
₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को बताया गेम चेंजर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राजनांदगांव जिले में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया निर्माण परियोजना को शीघ्र स्वीकृति देने का अनुरोध किया।
उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है और राज्य सरकार के स्तर पर सभी जरूरी प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृतियां भी पूरी हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस परियोजना के शुरू होने से केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य भारत के अन्य राज्यों के किसानों को भी पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध हो सकेगा। इससे उर्वरकों की आपूर्ति मजबूत होगी और किसानों की लागत कम करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। औद्योगिक निवेश बढ़ेगा तथा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसी सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
461 गांवों तक पहुंचेगी स्थायी बिजली, विकास को मिलेगा नया आधार
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के समक्ष बस्तर सहित राज्य के उन 461 गांवों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण अब तक स्थायी विद्युत ग्रिड नहीं पहुंच सका है।
वर्तमान में इन गांवों में ऑफ-ग्रिड व्यवस्था के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी ग्रिड कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक विकास कहीं अधिक तेज होगा।
उन्होंने बताया कि नियमित और भरोसेमंद बिजली मिलने से विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, इंटरनेट और संचार सेवाओं का विस्तार होगा तथा छोटे उद्योग और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए विशेष वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।
आयुर्वेद के राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना से खुलेगी नई संभावनाएं
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र औषधीय वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों और पारंपरिक जनजातीय चिकित्सा ज्ञान की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है।
यदि यहां राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेद संस्थान स्थापित होता है तो इससे चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक आयुर्वेदिक उपचार को नई दिशा मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर औषधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हजारों लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर की जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक शोध से जोड़ने पर यह क्षेत्र आयुर्वेद एवं हर्बल उद्योग का राष्ट्रीय केंद्र बन सकता है।
‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने’ से लाखों लोगों तक पहुंच रही योजनाएं
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ तथा ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे विशेष अभियानों के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों तक शासन की योजनाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा रही हैं।
इन योजनाओं से लगभग 39 लाख लोग सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल योजनाएं घोषित करना नहीं बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से राशन वितरण, आयुष्मान भारत योजना, जनधन खाते, वनाधिकार पट्टे, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा अन्य केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दूरस्थ गांवों तक पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की नियमित पहुंच बढ़ने से पहले संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में भी लोगों का शासन पर विश्वास मजबूत हुआ है और विकास कार्यों को समाज का व्यापक सहयोग मिल रहा है।
2027 के ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ का दिया निमंत्रण
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है और बड़ी संख्या में महिलाएं आज स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रस्तावित सम्मेलन महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण आयोजन होगा।
छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण बैठक

राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
यदि राजनांदगांव की यूरिया परियोजना को मंजूरी मिलती है, 461 गांवों तक स्थायी बिजली पहुंचती है और राज्य में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना होती है, तो इससे कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे अनेक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
बस्तर में विकास और विश्वास के बढ़ते माहौल को देखते हुए राज्य सरकार अब अगले चरण में औद्योगिक निवेश, पर्यटन, कौशल विकास और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है।
