रायपुर(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । छत्तीसगढ़ मं 500 करोड़ रुपिया के सरकारी ठेका दिलाए के नाम मं 15 करोड़ रुपिया के ठगी अउ मनी लॉन्ड्रिंग के मामला अब अउ गंभीर होवत दिखत हवय। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED) ले गुरुवार के दिन बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव ला गिरफ्तार कर लिहिस। आरोप हवय कि आरोपी ले नोएडा के एक कारोबारी ला स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 500 करोड़ रुपिया के सरकारी ठेका दिलाए के भरोसा देके करीब 15 करोड़ रुपिया ले लिए रहिस। ईडी के जांच मं ठगी के रकम ला अलग-अलग माध्यम ले खपाए अउ मनी लॉन्ड्रिंग करे के साक्ष्य मिलई के बाद ये कार्रवाई करे गे हवय।
गिरफ्तारी के बाद ईडी ले आरोपी के विशेष पीएमएलए कोर्ट मं पेश करिस। कोर्ट ले मामले के जांच अउ पूछताछ बर 7 अगस्त तक ईडी रिमांड मंजूर कर दे हवय। अब जांच एजेंसी ये पता लगाए मं जुट गे हवय कि ठगी ले मिले रकम कहां-कहां इस्तेमाल करे गे, रकम के लेन-देन मं अउ कोन-कोन लोग शामिल रहिन अउ पूरा नेटवर्क के पीछे असल मं कोन लोग काम करत रहिन।
500 करोड़ के ठेका दिलाए के नाम मं कारोबारी ले 15 करोड़ ले के आरोप
ईडी के मुताबिक, केके श्रीवास्तव के ऊपर आरोप हवय कि वो अपन राजनीतिक पहुंच अउ प्रभावशाली नेताओं तक संबंध होए के दावा करके नोएडा के कारोबारी अर्जुन सिंह ला अपन झांसा मं लेइस। अर्जुन सिंह नोएडा स्थित रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक बताए जात हवय। आरोपी ले कारोबारी ला भरोसा दिलाइस कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 500 करोड़ रुपिया के सरकारी ठेका वो दिलवा सकथे।
बताए जावत हवय कि सरकारी ठेका के लालच अउ आरोपी के कथित प्रभाव के भरोसा मं आके कारोबारी ले करीब 15 करोड़ रुपिया दे डारिस। बाद मं जब ठेका के प्रक्रिया आगे नई बढ़िस अउ मामला संदिग्ध नजर आइस, तब ठगी के पूरा मामला सामने आइस। इसके बाद पुलिस मं शिकायत दर्ज कराए गे अउ मामला कानूनी जांच तक पहुंचिस।
तेलीबांधा थाना मं दर्ज होय रहिस एफआईआर
मामला सामने आए के बाद रायपुर के तेलीबांधा थाना मं केके श्रीवास्तव अउ ओकर बेटा कंचन श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे गे रहिस। एफआईआर दर्ज होए के बाद दुनों के ऊपर गिरफ्तारी के दबाव बढ़िस, फेर पुलिस के मुताबिक आरोपी अपन बेटा के संग फरार हो गे रहिस।
लंबा समय तक तलाश चलाए के बाद रायपुर पुलिस ले 24 जून 2025 ला केके श्रीवास्तव ला भोपाल ले गिरफ्तार करे मं सफलता पाइस। पुलिस के कार्रवाई के बाद मामले के जांच आगे बढ़िस अउ पूछताछ के दौरान आर्थिक लेन-देन अउ कथित निवेश के संबंध मं कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आए के दावा करे गे।
चार्जशीट मं करोड़ों रुपिया के लेन-देन के खुलासा
पुलिस द्वारा कोर्ट मं पेश करे गे चार्जशीट मं घलो मामला ले जुड़े कई अहम जानकारी सामने आए रहिस। जांच एजेंसियों के मुताबिक, केके श्रीवास्तव अउ ओकर बेटा कंचन श्रीवास्तव के बैंक खातामन के जांच मं करीब 441 करोड़ रुपिया के लेन-देन के रिकॉर्ड मिलिस। ए रकम के लेन-देन के प्रकृति, स्रोत अउ इस्तेमाल ला लेके जांच एजेंसी अब अउ गहराई ले पड़ताल करत हवय।
जांच मं ये दावा घलो करे गे हवय कि आरोपी अउ ओकर बेटा ले हवाला के माध्यम ले करोड़ों रुपिया चीन अउ ऑस्ट्रेलिया मं निवेश करे रहिन। हालांकि, विदेश मं करे गे कथित निवेश के पूरा विवरण, रकम के वास्तविक स्रोत अउ ये लेन-देन मं जुड़े दूसर लोगन के भूमिका के जांच अभी जारी हवय।
मोबाइल के फॉरेंसिक जांच मं सट्टा ऐप से जुड़े निवेश के दावा
मामले के जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन के फॉरेंसिक जांच घलो करे गे रहिस। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मोबाइल से मिले जानकारी के आधार मं ये दावा सामने आइस कि केके श्रीवास्तव अउ ओकर बेटा के कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टा ऐप महादेव बुक से जुड़े मेस्टिजिक कंपनी मं निवेश रहिस।
जांच एजेंसी अब ये पता लगाए मं जुटे हवय कि कथित निवेश के रकम कहां ले आइस अउ ये पूरा लेन-देन के ठगी अउ मनी लॉन्ड्रिंग के रकम ले कोनो संबंध रहिस कि नहीं। ए दिशा मं जांच के बाद ही पूरा स्थिति साफ हो पाए के उम्मीद हवय।
कर्मचारी के बैंक खाता मं रकम ट्रांसफर करे के साक्ष्य
जांच मं एक अउ महत्वपूर्ण जानकारी सामने आए के दावा करे गे हवय। एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली के कारोबारी ले ठगी करे गे रकम के एक हिस्सा 10 जुलाई ले 17 जुलाई के बीच आरोपी के एक कर्मचारी के बैंक खाता मं ट्रांसफर कराए गे रहिस। अब जांच एजेंसी ये पता लगाए मं जुटे हवय कि कर्मचारी के खाता के इस्तेमाल काबर करे गे अउ रकम के आगे कोन-कोन खाता मं ले जाए गे।
ईडी अब पूरा मनी ट्रेल ला जोड़के देखत हवय। जांच एजेंसी के फोकस मं ठगी के रकम के स्रोत, बैंक खातामन मं करे गे लेन-देन, कथित हवाला नेटवर्क, विदेश मं निवेश अउ मामले ले जुड़े संभावित लाभार्थी शामिल हवंय।
राजनीतिक पहुंच के दावा के जांच घलो जारी
जांच के दौरान ये बात घलो सामने आए हवय कि पूर्ववर्ती सरकार के समय केके श्रीवास्तव के कई प्रभावशाली नेताओं तक पहुंच होए के दावा करे जात रहिस। इसी कथित पहुंच अउ प्रभाव के हवाला देके कारोबारी ला सरकारी ठेका दिलाए के भरोसा देए के आरोप हवय।
हालांकि, अब ईडी ये जांच करत हवय कि आरोपी के दावा के पीछे वास्तविकता का रहिस अउ सरकारी ठेका दिलाए के नाम मं करे गे पूरा लेन-देन मं अउ कोन-कोन लोग के भूमिका रहिस। एजेंसी ये बात के घलो पड़ताल कर सकथे कि ठगी के रकम के बंटवारा कइसे होइस अउ रकम ला अलग-अलग माध्यम ले कहां-कहां खपाए गे।
