छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पदक विजेताओं को प्रोत्साहन राशि दी गई। उत्कृष्ट खेल मिशन के तहत 100 करोड़ रुपये का प्रावधान, 156 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में मिलेगा लाभ। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
रायपुर(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में बुधवार का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया, जब राज्य में पहली बार स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने हाल ही में आयोजित देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए प्रोत्साहन राशि प्रदान की।
यह कॉन्क्लेव केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि राज्य की खेल नीति, भविष्य की योजनाओं और खेल प्रतिभाओं को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इसमें देशभर से आए खेल प्रशासकों, नीति निर्माताओं, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट्स, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधियों ने पूरे दिन गहन विचार-विमर्श किया। चर्चा का मुख्य विषय था कि छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य कैसे बनाया जाए।
खेल प्रतिभाओं को मिलेगा नई सोच और नई दिशा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज हुए गंभीर मंथन से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में खेल नीति को और अधिक प्रभावी बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की पहचान केवल उसकी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से नहीं होती, बल्कि उसके खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उस राज्य का गौरव बढ़ाते हैं। इसलिए सरकार का लक्ष्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को हर स्तर पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस कॉन्क्लेव में सामने आए विचार निश्चित रूप से आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आधार बनेंगे।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के विजेताओं का सम्मान

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब मुख्यमंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मंच पर सम्मानित किया और उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान की।
उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि उनकी मेहनत और उपलब्धियां पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। राज्य सरकार हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी के साथ मजबूती से खड़ी है और भविष्य में उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं तथा आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।
100 करोड़ रुपये से मजबूत होगी खेल अधोसंरचना
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि राज्य सरकार ने उत्कृष्ट खेल मिशन के अंतर्गत खेल अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है।
उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग आधुनिक खेल मैदान, इंडोर स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र, खेल उपकरण, फिटनेस सेंटर तथा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।
सरकार की योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में भी खेल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि दूर-दराज़ के प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन कर सकें।
156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मिलेगा सरकारी नौकरी का लाभ
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने हाल ही में प्रदेशभर के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को मंजूरी दी है।
इन खिलाड़ियों को भविष्य में सरकारी नौकरियों में विशेष लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को खेलों के प्रति आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि जब खिलाड़ियों को यह विश्वास होगा कि उनके खेल करियर के साथ उनका भविष्य भी सुरक्षित है, तब अधिक से अधिक युवा खेलों को अपना करियर बनाने के लिए आगे आएंगे।
देशभर के विशेषज्ञों ने तैयार किया भविष्य का रोडमैप
स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न तकनीकी और विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिनमें खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, प्रतिभा खोज, हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग, कोचिंग सिस्टम, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, डिजिटल तकनीक और आधुनिक खेल अधोसंरचना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि खिलाड़ियों की पहचान स्कूल स्तर से शुरू होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, फिजियोथेरेपी और आधुनिक तकनीकों का लाभ भी मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना था कि यदि सरकार, खेल संघ, निजी क्षेत्र और शिक्षण संस्थान मिलकर कार्य करें तो छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में खेलों का एक मजबूत केंद्र बन सकता है।
खेल संस्कृति को बढ़ावा देने पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल खिलाड़ियों को तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे प्रदेश में खेल संस्कृति विकसित करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि गांवों, स्कूलों और कॉलेजों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित किया जाएगा। इससे एक ओर नई खेल प्रतिभाएं सामने आएंगी तो दूसरी ओर युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी विकास होगा।
उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं बल्कि समाज को स्वस्थ और सकारात्मक दिशा देने का प्रभावी साधन भी है।
छत्तीसगढ़ खेलों के नए युग की ओर
राज्य में पहली बार आयोजित इस स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि छत्तीसगढ़ अब खेलों के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की खेल नीति, बढ़ता बजट, आधुनिक अधोसंरचना, खिलाड़ियों के लिए रोजगार के अवसर और विशेषज्ञों के सुझाव मिलकर आने वाले समय में प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश के खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन और अब स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव जैसी पहल यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि खेल प्रतिभाओं के लिए भी देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
यदि इसी प्रकार योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित करेंगे।
