कोरबा के लेमरू थाना क्षेत्र में उफनते सांचर नाले को पार करते समय 28 वर्षीय युवक बाइक समेत बह गया। 12 घंटे बाद 3 किमी दूर शव बरामद, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। बरसात का मौसम जहां खेतों और जंगलों में नई हरियाली लेकर आता है, वहीं लापरवाही या जोखिम भरा फैसला कभी-कभी अपनों से हमेशा के लिए दूर कर देता है। कोरबा जिले के लेमरू थाना क्षेत्र से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। उफनते सांचर नाले को बाइक सहित पार करने की कोशिश कर रहे 28 वर्षीय युवक की तेज बहाव में बहने से मौत हो गई। लगभग 12 घंटे तक चले तलाश अभियान के बाद उसका शव घटनास्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर बरामद किया गया।
यह हादसा केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि मानसून के दौरान उफनते नालों और पुल-पुलियों को पार करने के जोखिम को भी गंभीरता से सामने लाता है।
घरेलू काम से शहर आया था, लौटते समय हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, लेमरू थाना क्षेत्र के वनांचल ग्राम नकिया निवासी राहुल कुमार मंझवार (28 वर्ष) सोमवार को अपने साथी बुधराम मंझवार के साथ घरेलू कार्य से कोरबा शहर आया था। आवश्यक काम पूरा करने के बाद दोनों देर शाम एक ही बाइक से अपने गांव लौट रहे थे।
लगातार हो रही बारिश के कारण गांव से लगभग तीन किलोमीटर पहले स्थित सांचर नाला उफान पर था। बारिश के चलते नाले का जलस्तर काफी बढ़ चुका था और तेज बहाव के कारण उसे पार करना बेहद जोखिम भरा हो गया था।
ग्रामीणों ने रोका, लेकिन नहीं मानी बात
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, उस समय नाले में पानी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक तेज था। आसपास मौजूद लोगों ने भी यात्रियों को पानी कम होने तक इंतजार करने की सलाह दी थी।
बताया जा रहा है कि इसके बावजूद राहुल ने बाइक के साथ नाला पार करने का प्रयास किया। जैसे ही बाइक तेज बहाव वाले हिस्से में पहुंची, पानी का दबाव इतना अधिक था कि संतुलन बिगड़ गया और वह बाइक समेत बह गया।
घटना इतनी तेजी से हुई कि साथ मौजूद लोग और ग्रामीण उसे बचाने का मौका भी नहीं पा सके।
रातभर चला तलाश अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने खोजबीन शुरू की। बाद में पुलिस और संबंधित विभाग को भी सूचना दी गई।
बारिश और तेज बहाव के कारण रात के समय तलाश अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा। अंधेरा, तेज धारा और नाले के आसपास का कठिन भूभाग राहत एवं खोज कार्य में बाधा बनता रहा।
स्थानीय लोगों ने भी पूरी रात अपने स्तर पर खोज जारी रखी। कई ग्रामीण टॉर्च और अन्य साधनों के साथ नाले के किनारे-किनारे युवक की तलाश करते रहे।
12 घंटे बाद 3 किलोमीटर दूर मिला शव
लगातार प्रयासों के बाद मंगलवार सुबह युवक का शव घटनास्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर बरामद किया गया।
पानी का तेज बहाव शव को काफी दूर तक बहाकर ले गया था। शव मिलने की सूचना के बाद परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई। गांव में मातम का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है।
पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
मानसून में बढ़ जाता है खतरा
बारिश के मौसम में छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में छोटे-छोटे नाले कुछ ही घंटों की बारिश के बाद उफान पर आ जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी और वन क्षेत्रों में जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। कई बार ऊपर के इलाकों में हुई बारिश का पानी कुछ ही मिनटों में नीचे के नालों में पहुंच जाता है, जिससे सामान्य दिखने वाला बहाव भी अचानक खतरनाक रूप ले सकता है।
यही कारण है कि प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग हर वर्ष मानसून के दौरान लोगों से उफनते नालों और पुल-पुलियों को पार नहीं करने की अपील करते हैं।
कुछ मिनटों की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी
ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग काम पर जाने या घर जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी में जोखिम उठाकर उफनते नालों को पार करने का प्रयास करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बहते पानी की गहराई से अधिक उसका वेग खतरनाक होता है। तेज बहाव में दोपहिया वाहन का संतुलन कुछ ही सेकंड में बिगड़ सकता है। एक बार वाहन बहने लगे तो व्यक्ति के लिए खुद को संभाल पाना बेहद कठिन हो जाता है।
यही वजह है कि आपदा विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि यदि किसी पुल या नाले पर पानी बह रहा हो तो उसके कम होने तक इंतजार करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित आवागमन की जरूरत

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षित आवागमन की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से प्रभावित हो जाता है। यदि ऐसे स्थानों पर ऊंचे पुल, चेतावनी संकेत, जलस्तर सूचक बोर्ड और समय पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
ग्रामीणों ने संवेदनशील नालों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय और मानसून के दौरान नियमित निगरानी की मांग भी उठाई है।
बारिश के मौसम में इन सावधानियों का रखें ध्यान
मानसून के दौरान दुर्घटनाओं से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—
- उफनते नाले, पुल या पुलिया को पार करने का प्रयास न करें।
- यदि पानी सड़क के ऊपर बह रहा हो तो जलस्तर कम होने तक प्रतीक्षा करें।
- तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
- स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
- रात के समय जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।
- दोपहिया वाहन से बहते पानी में प्रवेश करने से बचें।
एक हादसा, जो कई सवाल छोड़ गया
राहुल कुमार मंझवार की मौत ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि मानसून के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। कुछ मिनट पहले घर पहुंचने की कोशिश कभी-कभी पूरी जिंदगी छीन लेती है।
इस घटना ने परिवार से एक युवा सदस्य छीन लिया और गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। अब जरूरत इस बात की है कि लोग बारिश के मौसम में जोखिम उठाने से बचें और प्रशासन भी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करे।
कोरबा के लेमरू क्षेत्र में हुआ यह दर्दनाक हादसा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि मानसून के दौरान सतर्क रहने की गंभीर चेतावनी है। उफनते नालों और तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने की जल्दबाजी कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। यदि थोड़ी देर इंतजार किया जाए और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, तो कई परिवारों को ऐसे असहनीय दुख से बचाया जा सकता है।
