बिलासपुर में ‘बने खाबो, बने रहिबो 2.0’ अभियान के तहत 19 फर्मों की जांच, 15 विधिक व 4 निगरानी नमूने लिए गए। 117 किलो मिठाई जब्त-नष्ट और प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई।
बिलासपुर(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया सात दिवसीय ‘बने खाबो, बने रहिबो 2.0’ खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान सम्पन्न हो गया। अभियान के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने बिलासपुर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर मिलावट, अस्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई की। सात दिनों तक चले इस अभियान में कुल 19 फर्मों का निरीक्षण, 15 विधिक नमूने और 4 निगरानी नमूने लिए गए। कार्रवाई के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से करीब 117 किलोग्राम मिठाई जब्त कर नष्ट कराई गई।
अभियान का उद्देश्य केवल खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच करना नहीं था, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों के प्रति जागरूक करना भी था। निरीक्षण के दौरान जहां आवश्यक पाया गया, वहां प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठानों के लाइसेंस और पंजीयन तक निलंबित कर दिए।
अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य निर्माण पर सख्त कार्रवाई
कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन और नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार यह विशेष अभियान संचालित किया गया। टीम ने खाद्य निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के रखरखाव, निर्माण प्रक्रिया और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मेसर्स श्रीराम स्वीट्स, नगपुरा, सिरगिट्टी, बिलासपुर में खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वास्थ्यकर एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में किए जाने की बात सामने आई। इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
इसी तरह मेसर्स प्रबल फूड प्रोडक्ट, दुमानी, मस्तूरी का भी निरीक्षण किया गया। यहां खाद्य सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन नहीं पाए जाने पर फर्म का पंजीयन निलंबित कर दिया गया और प्रतिष्ठान को बंद कराया गया।
कार्रवाई का यह हिस्सा इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता केवल सामग्री की शुद्धता तक सीमित नहीं होती। खाद्य निर्माण स्थल की स्वच्छता, कच्चे माल का सुरक्षित भंडारण, कर्मचारियों की स्वच्छता और तैयार खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखने जैसी व्यवस्थाएं भी उपभोक्ता की सेहत और खाद्य सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं।
102 किलो श्री बर्फी-मिक्स जब्त
अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने मेसर्स पवन ट्रेडर्स, व्यापार विहार से बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जब्त की। यहां से करीब 102 किलोग्राम श्री बर्फी-मिक्स जब्त किया गया। मामले में आवश्यक दस्तावेज तैयार कर नियमानुसार प्रकरण बनाया गया।
यह कार्रवाई अभियान के दौरान हुई प्रमुख कार्रवाइयों में शामिल रही। बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री जब्त किए जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान केवल छोटे नमूनों तक सीमित रहने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर मौके पर उपलब्ध सामग्री की भी जांच और जब्ती की जा रही है।
वहीं मेसर्स श्रीराम स्वीट्स, नगपुरा, सिरगिट्टी से लगभग 15 किलोग्राम बर्फी नष्ट कराई गई। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही हटाना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इस तरह अभियान के दौरान अलग-अलग प्रतिष्ठानों से कुल 117 किलोग्राम मिठाई जब्त एवं नष्ट किए जाने की कार्रवाई सामने आई।
भ्रामक दावे पर भी जारी किया गया नोटिस
खाद्य सुरक्षा अभियान के दौरान प्रशासन ने केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को दी जा रही जानकारी और दावों पर भी ध्यान दिया। मेसर्स कमलेश जनरल स्टोर, रानीगांव से शिव गंगा नमकीन का नमूना लिया गया। इसके साथ ही भ्रामक दावे के आधार पर संबंधित प्रतिष्ठान को नोटिस जारी किया गया।
खाद्य पैकेट पर लिखी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद की गुणवत्ता, उसके दावे और लेबल पर दी गई जानकारी में पारदर्शिता उपभोक्ता के अधिकार से जुड़ा विषय है। ऐसे में भ्रामक दावों के मामलों में नोटिस जारी करना भी खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन का अहम हिस्सा है।
14 अगस्त को मद्रासी रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित
अभियान अवधि के दौरान 14 अगस्त 2026 को मेसर्स मद्रासी रेस्टोरेंट, बिलासपुर का भी निरीक्षण किया गया। यहां खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वास्थ्यकर एवं अस्वच्छ परिस्थितियों में पाए जाने पर प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित किया गया।
इस कार्रवाई से साफ है कि अभियान के तहत केवल मिठाई दुकानों या खाद्य सामग्री विक्रेताओं को ही जांच के दायरे में नहीं रखा गया, बल्कि रेस्टोरेंट और खाद्य निर्माण से जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की व्यवस्थाओं पर भी निगरानी की गई।
सात दिनों में 19 फर्मों की जांच
‘बने खाबो, बने रहिबो 2.0’ अभियान के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने जिले में कुल 19 फर्मों का निरीक्षण किया। इनमें से 15 विधिक नमूने और 4 निगरानी नमूने लिए गए। इन नमूनों के माध्यम से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की जांच की जाएगी।
अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जांच के दौरान जहां कमियां सामने आईं, वहां केवल औपचारिक निरीक्षण तक कार्रवाई सीमित नहीं रही। गंभीर परिस्थितियों में लाइसेंस और पंजीयन निलंबित करने, प्रतिष्ठान बंद कराने, खाद्य सामग्री जब्त करने और अनुपयुक्त मिठाई नष्ट कराने जैसी कार्रवाई की गई।
उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी है जागरूकता
खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल प्रशासन या दुकानदारों की नहीं है। उपभोक्ताओं की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मिठाई, नमकीन, पैकेज्ड फूड या किसी अन्य खाद्य सामग्री की खरीदारी करते समय ग्राहक को उसकी पैकिंग, निर्माण एवं उपयोग की अंतिम तिथि, लेबल और अन्य जरूरी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।
खासकर त्योहारों और विशेष अवसरों के दौरान मिठाई एवं खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है। प्रशासन की इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य भी यही है कि बाजार में असुरक्षित या मानकों के विपरीत खाद्य सामग्री उपभोक्ताओं तक न पहुंचे।
अभियान से क्या संदेश गया?
बिलासपुर में ‘बने खाबो, बने रहिबो 2.0’ अभियान के दौरान हुई कार्रवाई ने खाद्य कारोबारियों के लिए स्पष्ट संदेश दिया है कि खाद्य पदार्थों के निर्माण और बिक्री में स्वच्छता तथा खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं उपभोक्ताओं के लिए यह अभियान भरोसा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
सात दिनों के अभियान में 19 फर्मों का निरीक्षण, 19 खाद्य नमूनों का संग्रह, 117 किलोग्राम मिठाई की जब्ती एवं नष्टीकरण, लाइसेंस और पंजीयन निलंबन तथा प्रतिष्ठानों को बंद कराने जैसी कार्रवाई इस अभियान की गंभीरता को दर्शाती है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई का व्यापक असर तभी दिखाई देगा, जब खाद्य कारोबारी नियमों का पालन करने के साथ उपभोक्ता भी अपने अधिकारों और खाद्य सुरक्षा को लेकर सजग रहें। सुरक्षित भोजन केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा मुद्दा है।
