कोरबा के करतला जंगल म स्थित विशाल साल के रूख ल लेके स्थानीय मन 1500 बछर पुराना होय के दावा करथें। जानव बुढ़ादेव साल रूख के इतिहास, आदिवासी आस्था, पर्यावरणीय महत्व अउ पर्यटन के संभावना के बारे म।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला सिरिफ अपन कोयला उद्योग बर नई, बल्कि प्राकृतिक धरोहर अउ घना जंगल बर घलो देशभर म पहचान रखथे। एही जंगल के बीच करतला वन परिक्षेत्र म एक अइसन विशाल साल के रूख खड़े हे, जेला स्थानीय आदिवासी समाज “बुढ़ादेव” अउ “धरती के बाप” कहिके पूजाथें। स्थानीय मान्यता अनुसार ए रूख करीब 1500 बछर पुराना हे। हालांकि ए उमर के वैज्ञानिक पुष्टि अब तक नई होय हवय, फेर वन विभाग अउ जानकार मन एकर अत्यंत पुराना होय के बात जरूर कहिथें।
गांव के बुजुर्ग मन कहिथें कि ए रूख ह पीढ़ी दर पीढ़ी मनखे के जीवन, संस्कृति अउ जंगल के बदलाव के गवाह बने खड़े हवय। मौर्य, गुप्त, कलचुरी, मराठा अउ अंग्रेज राज के समय के किस्सा घलो ए रूख संग जोड़े जाथे।
जंगल के बीच म खड़े हे प्रकृति के विशाल प्रहरी
बताय जाथे कि ए साल के रूख करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम पाली के नजदीक घना जंगल म स्थित हे। कोरबा शहर ले करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित ए जगह तक पहुंचे बर सड़क मार्ग उपलब्ध हे।
स्थानीय जानकारी मुताबिक रूख के ऊंचाई लगभग 35 ले 40 मीटर तक बताय जाथे, जबकि एकर तना एतका मोटा हवय कि दस-बारह झिन मनखे हाथ पकड़ के घेरना चाहंय, तब घलो पूरा नई घेर पावंय। एखर छांव म एक संग सैकड़ों लोग आराम से बइठ सकथें।
आदिवासी समाज बर सिरिफ रूख नई, देवता के रूप
कोरबा अंचल के गोंड, कंवर अउ कोरवा समाज ए साल रूख ल बुढ़ादेव के रूप म मानथें। हर साल हरेली, छेरछेरा अउ दूसर पारंपरिक पर्व के समय गांव के लोग ए जगह पूजा-अर्चना करे पहुंचथें।
स्थानीय मन के मुताबिक परिवार म सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति, बीमारी ले छुटकारा अउ खेती-किसानी के बरकत बर ए रूख के नीचे मन्नत मांगे जाथे। मन्नत पूरा होय के बाद नारियल, लाल कपड़ा अउ पूजा सामग्री चढ़ाय जाथे।
गांव के बुजुर्ग मन कहिथें कि ए रूख ह सिरिफ प्रकृति नई, बल्कि समाज के आस्था अउ एकता के प्रतीक बन चुके हे।
पर्यावरण बर घलो बने हे अनमोल संपदा
वन विशेषज्ञ मन के मुताबिक एक विशाल अउ पुराना रूख पूरा जंगल के जीवनचक्र बर महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे। अइसन रूख म अनेक प्रकार के पक्षी, गिलहरी, बंदर, कीरा-मकोड़ा अउ दूसर जीव-जंतु अपन बसेरा बनाथें।
विशेषज्ञ मन के कहना हे कि बड़े रूख वातावरण ले कार्बन डाइऑक्साइड सोखके जलवायु संतुलन बनाए रखे म मदद करथें। एकर गहरी जड़ जमीन म पानी ल संजोए रखे म घलो योगदान देवत हे।
इही कारण ए रूख ल स्थानीय लोग जंगल के संरक्षक के रूप म देखथें।
इतिहास संग घलो जुड़थे कई लोककथा
ए साल रूख ल लेके गांव म कई लोककथा सुनाय जाथे। कुछ बुजुर्ग मन के दावा हे कि प्राचीन समय म ए जगह म राजा-महाराजा मन के पड़ाव लगत रहिस। आसपास के इलाका म कुछ प्राचीन अवशेष अउ पत्थर के नक्काशी मिले के बात घलो स्थानीय स्तर म कही जाथे।
हालांकि इतिहासकार मन ए बात के वैज्ञानिक अध्ययन अउ पुरातात्विक जांच के जरूरत बताथें।
काबर बच गे ए रूख?
वन जानकार मन के मुताबिक साल के रूख स्वभाव ले मजबूत प्रजाति म गिने जाथे। एकर लकड़ी काफी टिकाऊ होथे अउ रोग के असर कम पड़थे।
दूसर सबसे बड़े कारण स्थानीय आदिवासी समाज के संरक्षण ल मानाय जाथे। गांव वाले ए रूख ल देवता मानके कभी काटे नई देइन। पीढ़ी दर पीढ़ी लोगन एला बचावत आइन, जेन से आज घलो ए विशाल वृक्ष सुरक्षित खड़े हवय।
संरक्षण के जरूरत ऊपर बढ़त हे जोर
औद्योगिक जिला होय के कारण कोरबा म पर्यावरण संरक्षण के चुनौती लगातार बढ़त जावत हे। जंगल कटाई, प्रदूषण अउ मानव गतिविधि के असर प्राकृतिक धरोहर मन ऊपर पड़त हवय।
पर्यावरण प्रेमी मन के कहना हे कि अइसन दुर्लभ वृक्ष मन ल विशेष संरक्षण मिले के जरूरत हवय। यदि वैज्ञानिक अध्ययन, कार्बन डेटिंग अउ जैविक परीक्षण होही, त एकर वास्तविक इतिहास दुनिया के सामने आ सकही।
स्थानीय समाज घलो समय-समय म सफाई अभियान चलाके अउ लोगों ल जागरूक बनाके ए धरोहर के रक्षा करे म जुटे हवय।
पर्यटन के नया केंद्र बन सकथे
यदि शासन स्तर म व्यवस्थित योजना बनाय जावय, त ए विशाल साल के रूख कोरबा जिला के प्रमुख ईको-टूरिज्म केंद्र बन सकथे। जंगल भ्रमण, आदिवासी संस्कृति, स्थानीय खानपान अउ प्राकृतिक सौंदर्य एक संग पर्यटक मन ल आकर्षित कर सकथे।
स्थानीय लोगन के मानना हे कि पर्यटन बढ़ही त गांव के रोजगार म घलो बढ़ोतरी होही अउ जंगल संरक्षण ल नई मजबूती मिलही।
प्रकृति के देय संदेश
कोरबा के ए विशाल साल रूख सिरिफ एक पेड़ नई, बल्कि प्रकृति, इतिहास अउ आदिवासी संस्कृति के जीवंत पहचान बन गे हवय। चाहे एकर सही उमर वैज्ञानिक जांच के बाद सामने आवय, फेर ए बात तय हे कि ए रूख पीढ़ी दर पीढ़ी मनखे अउ जंगल के रिश्ता ल मजबूत करत आथे।
आज जब दुनिया भर म जंगल तेजी ले कम होत जावत हे, त अइसन प्राकृतिक धरोहर मन ल बचाय रखना हम सबके जिम्मेदारी हे। जंगल बचही, त प्रकृति बचही, अउ प्रकृति बचही त आने वाली पीढ़ी बर सुरक्षित भविष्य बने रहिही।
जय जोहार। जय बुढ़ादेव।
