छत्तीसगढ़ के घना जंगल, 11 वन्यजीव अभयारण्य, 3 राष्ट्रीय उद्यान, दुर्लभ वन्यजीव, सैकड़ों औषधीय पौधा अउ सरकार के भविष्य के वन संरक्षण योजना के बारे मं विस्तार ले जानव। पढ़व छत्तीसगढ़ के जैव विविधता ऊपर विशेष रिपोर्ट।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ ल अक्सर “भारत के फेफड़ा” कहे जाथे, अउ ए नाम केवल कहे बर नई आय। प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा घना जंगल ले आच्छादित हवय। ए जंगल सिरिफ हरियाली के पहचान नई, बल्कि हजारों प्रकार के वन्यजीव, दुर्लभ पक्षी, औषधीय पौधा अउ आदिवासी संस्कृति के घलो आधार हवंय। यही कारण हे कि छत्तीसगढ़ आज देश के जैव विविधता के दृष्टि ले सबसे समृद्ध राज्य मन मं गिने जाथे।
प्रदेश सरकार वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, औषधीय पौधा के संवर्धन अउ ईको-टूरिज्म ल बढ़ावा देय बर लगातार नई-नई योजना लागू करत हवय। ए प्रयास सिरिफ पर्यावरण बचाय बर नई, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार अउ सतत विकास ल मजबूत करे बर घलो महत्वपूर्ण माने जावत हवय।
प्रदेश मं 11 वन्यजीव अभयारण्य अउ 3 राष्ट्रीय उद्यान
छत्तीसगढ़ मं वन्यजीव संरक्षण बर 11 वन्यजीव अभयारण्य, 3 राष्ट्रीय उद्यान अउ 1 गेम सेंक्चुअरी संचालित हवंय। ए सबो मिलाके करीब 6,506.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मं फैलाय हवय, जिहां हजारों वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण मं सुरक्षित जीवन बितावत हवंय।
प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य मं सीतानदी, उदंती, अचानकमार, भोरमदेव, बारनवापारा, पामेड़, तमोर पिंगला, सेमरसोत, भैरमगढ़, गोमर्डा अउ बादलखोल शामिल हवंय। एमा तमोर पिंगला अभयारण्य सबसे बड़े अभयारण्य के रूप मं जाने जाथे।
एखर अलावा इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अउ गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान प्रदेश के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्र हवंय।
प्रदेश मं वर्तमान मं इंद्रावती, उदंती-सीतानदी अउ अचानकमार टाइगर रिजर्व संचालित हवंय। अब गुरु घासीदास-तमोर पिंगला क्षेत्र ल जोड़के चौथा टाइगर रिजर्व विकसित करे के तैयारी घलो चलत हवय, जेन ले बाघ संरक्षण ल नई मजबूती मिलही।
दुर्लभ वन्यजीव के सुरक्षित ठिकाना
छत्तीसगढ़ के जंगल अनेक दुर्लभ अउ संकटग्रस्त जीव-जंतु मन के प्राकृतिक घर हवंय। एमा बाघ, तेंदुआ, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सुअर, भालू, ढोले अउ सियार प्रमुख रूप ले पाए जाथें।
प्रदेश के वन भैंसा, जेन ल राज्य पशु के दर्जा मिले हवय, आज देश के सबसे शुद्ध नस्ल माने जाथे। ए मुख्य रूप ले उदंती, पामेड़ अउ इंद्रावती क्षेत्र मं पाए जाथे।
एखर अलावा पहाड़ी मैना राज्य पक्षी आय, जबकि बारनवापारा अभयारण्य मं सफल पुनर्वास योजना के बाद काला हिरण के संख्या उल्लेखनीय रूप ले बढ़े हवय। मगरमच्छ, भारतीय विशाल गिलहरी, उड़न गिलहरी, चिंकारा, चौसिंघा अउ बार्किंग डियर जइसने दुर्लभ जीव घलो प्रदेश के जंगल मं सुरक्षित हवंय।
पक्षी प्रेमी मन बर छत्तीसगढ़ किसी स्वर्ग ले कम नई, काबर इहां 150 ले अधिक पक्षी प्रजाति दर्ज करे गे हवंय।
जड़ी-बूटी के खजाना कहाय छत्तीसगढ़
घना जंगल के कारण छत्तीसगढ़ ल “हर्बल स्टेट” के नाम ले घलो पहचान मिलथे। प्रदेश के जंगल मं हजारों प्रकार के औषधीय पौधा प्राकृतिक रूप ले उगथें।
अचानकमार अभयारण्य मं अकेले 600 ले अधिक औषधीय पौधा के प्रजाति पाय जाथे। एमा काली मूसली, तिखुर, कालमेघ, बच, चरोटा, केऊकंद जइसने महत्वपूर्ण वनौषधि शामिल हवंय।
प्रदेश मं साल, सागौन, साजा, बीजा, हलदू, शीशम, महुआ, तेंदू, बांस अउ आंवला जइसने बहुमूल्य वृक्ष घलो बड़ी संख्या मं पाए जाथें।
कोंडागांव मं स्थापित एथिनो-मेडिको पार्क आज देश के सबसे बड़े हर्बल पार्क मं गिने जाथे, जिहां 5 लाख ले अधिक औषधीय पौधा अउ विलुप्त होवत जड़ी-बूटी के संरक्षण होवत हवय।
भविष्य बर बड़े योजना ऊपर काम
प्रदेश सरकार वन संरक्षण अउ हरित अर्थव्यवस्था ल मजबूत करे बर कई महत्वाकांक्षी योजना ऊपर काम करत हवय।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान अउ कैम्पा योजना के माध्यम ले प्रदेश के वन क्षेत्र मं लगातार बढ़ोतरी होवत हवय। चंदन, रक्त चंदन, शीशम, आंवला अउ महानीम जइसने 12 प्रकार के पौधा के बड़े पैमाना मं रोपण करे जावत हवय।
छत्तीसगढ़ ग्रीन जीडीपी के अवधारणा अपनाय वाला देश के पहिली राज्य बनिस, जिहां जंगल अउ पर्यावरण के आर्थिक महत्व ल विकास के गणना मं शामिल करे जावत हवय।
वन्यजीव संरक्षण बर सरकार नागरिक मन बर वन्य प्राणी गोद लेवय योजना शुरू करे के तैयारी करत हवय। ए योजना के तहत कोई घलो नागरिक, संस्था या संगठन बाघ, हिरण जइसने वन्यजीव के संरक्षण मं आर्थिक सहयोग दे सकही।
बाघ संरक्षण ल मजबूत करे बर मध्यप्रदेश ले बाघ लाके गुरु घासीदास-तमोर पिंगला अउ उदंती-सीतानदी क्षेत्र मं पुनर्स्थापित करे के योजना घलो तैयार होवत हवय।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था अउ ईको-टूरिज्म ल मिलही मजबूती
प्रदेश सरकार 75 प्रकार के लघु वनोपज के खरीदी के योजना ऊपर काम करत हवय, जेन ले लाखों वनवासी परिवार के आय मं बढ़ोतरी होही।
औषधीय पौधा के खेती ल कृषि अउ उद्यानिकी विभाग के सहयोग ले बढ़ावा देय जावत हवय, ताकि किसान मन ल अतिरिक्त आमदनी के साधन मिल सकय।
एखर संग-संग बस्तर अउ सरगुजा क्षेत्र मं ईको-टूरिज्म, नेचर ट्रेल, जंगल सफारी अउ इको-कैंपिंग ल विकसित करे के योजना चलत हवय। एखर ले स्थानीय युवा मन बर रोजगार के नवा अवसर तैयार होही अउ प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण घलो मजबूत होही।
प्रकृति के संग विकास के संतुलित मॉडल
छत्तीसगढ़ आज सिरिफ खनिज संपदा बर नई, बल्कि अपन जंगल, वन्यजीव, औषधीय पौधा अउ जैव विविधता बर घलो पूरे देश मं अलग पहचान बना चुके हवय। सरकार के नई पहल अउ जनभागीदारी ले ए उम्मीद बढ़ गे हवय कि आने वाला समय मं प्रदेश पर्यावरण संरक्षण, हरित अर्थव्यवस्था अउ ईको-टूरिज्म के क्षेत्र मं देश बर एक आदर्श मॉडल बन सकथे।
जंगल सिरिफ पेड़-पौधा के समूह नई होवय, बल्कि आने वाली पीढ़ी बर जीवन, जलवायु अउ प्राकृतिक संतुलन के सबसे बड़े आधार आय। ए कारण छत्तीसगढ़ के हरियाली ल बचाय अउ बढ़ाय, हम सबो के साझा जिम्मेदारी आय।
