कोरबा के पम्प हाउस क्षेत्र में ग्रैंड न्यूज़ के केबल ऑपरेटर सनत रॉयल के घर की पानी की टंकी में 7 फीट लंबा अजगर मिलने से हड़कंप मच गया। नोवा नेचर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी और उनकी टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर अजगर को जंगल में छोड़ा। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) बारिश का मौसम शुरू होते ही जिले में सांपों के निकलने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आए दिन विभिन्न प्रजातियों के सांप रिहायशी क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को कोरबा के पम्प हाउस क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ग्रैंड न्यूज़ में केबल ऑपरेटर के रूप में कार्यरत सनत रॉयल के घर की पानी की टंकी में लगभग 7 फीट लंबा विशाल अजगर बैठा हुआ मिला।
परिजनों ने जब टंकी के भीतर केबल पाइप के नीचे किसी बड़े जीव की हलचल देखी तो पहले उन्हें कुछ समझ नहीं आया। करीब से देखने पर पता चला कि वहां एक विशालकाय अजगर कुंडली मारकर बैठा हुआ है। अजगर को देखते ही परिवार के सदस्यों में दहशत फैल गई और आसपास के लोग भी मौके पर एकत्रित हो गए।
हालांकि परिवार ने सूझबूझ का परिचय देते हुए किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने न तो अजगर को भगाने की कोशिश की और न ही उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। तुरंत इसकी सूचना नोवा नेचर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के रेस्क्यू प्रमुख जितेंद्र सारथी को दी गई।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुई रेस्क्यू टीम
घटना की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू प्रमुख जितेंद्र सारथी ने बिना समय गंवाए अपनी टीम को मौके पर रवाना किया। टीम में राजू बर्मन, बॉबी श्रीवास और साहिल शामिल थे। कुछ ही देर में टीम घटनास्थल पर पहुंची और सबसे पहले आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी।
पानी की टंकी के भीतर सीमित जगह होने के कारण रेस्क्यू अभियान काफी चुनौतीपूर्ण था। टीम ने बेहद धैर्य, अनुभव और सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लगभग कुछ समय की मशक्कत के बाद अजगर को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया और विशेष रेस्क्यू बैग में रखा गया।
रेस्क्यू पूरा होने के बाद वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। परिवार के सदस्यों ने भी टीम का आभार व्यक्त किया और उनकी त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया अजगर
रेस्क्यू के बाद टीम ने वन्यजीव संरक्षण के नियमों का पालन करते हुए अजगर को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया। इससे न केवल एक वन्यजीव की जान बचाई गई, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अजगर सामान्यतः विषहीन होता है और इंसानों पर बिना कारण हमला नहीं करता। वह भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में बारिश के दौरान रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाता है। ऐसे में घबराने के बजाय विशेषज्ञों की मदद लेना सबसे सुरक्षित उपाय होता है।
बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में बिलों और प्राकृतिक आवासों में पानी भर जाने के कारण सांप और अन्य वन्यजीव बाहर निकलकर सूखी एवं सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। इसी वजह से वे कई बार घरों, पानी की टंकियों, गोदामों, वाहनों, खेतों और कार्यालय परिसरों तक पहुंच जाते हैं।
कोरबा जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार सांपों के निकलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इनमें विषैले और विषहीन दोनों प्रकार के सांप शामिल हैं। ऐसे मामलों में लोगों से संयम बरतने और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाने की अपील की जाती रही है।
जितेंद्र सारथी ने लोगों से की महत्वपूर्ण अपील
रेस्क्यू प्रमुख जितेंद्र सारथी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के घर, दुकान, खेत, वाहन या किसी अन्य स्थान पर सांप दिखाई देता है तो घबराने या उसे मारने का प्रयास बिल्कुल न करें।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले सुरक्षित दूरी बनाए रखें, सांप पर नजर रखें ताकि वह दूसरी जगह न चला जाए और तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें। उन्होंने बताया कि समय पर सूचना मिलने से रेस्क्यू आसान हो जाता है और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सकता है।
सारथी ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए तो घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के भरोसे समय बर्बाद न करें। पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं और साथ ही रेस्क्यू टीम को भी सूचना दें ताकि सांप की पहचान कर उपचार में आवश्यक सहायता मिल सके।
उन्होंने लोगों की सुविधा के लिए रेस्क्यू टीम का हेल्पलाइन नंबर 8817534455 भी साझा किया और कहा कि किसी भी आपात स्थिति में इस नंबर पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है।
वन्यजीव संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि सांप पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे खेतों और बस्तियों में चूहों सहित कई हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित करते हैं। इसलिए उन्हें बिना कारण नुकसान पहुंचाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है।
कोरबा में हुई यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि जागरूकता, धैर्य और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद से इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। समय रहते सूचना देने और विशेषज्ञों की सहायता लेने से एक बड़ा हादसा टल गया तथा अजगर को भी सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास में पहुंचा दिया गया।
