रायपुर के नकटी गांव में विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए 80 मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। जानिए पूरा मामला, प्रशासन का पक्ष, ग्रामीणों की मांग और इस विवाद की पूरी रिपोर्ट।
रायपुर, (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विधायक कॉलोनी निर्माण को लेकर शुरू हुई प्रशासनिक कार्रवाई अब बड़े विवाद का रूप लेती नजर आ रही है। रायपुर के नकटी गांव में करीब 80 मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने के बाद प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती की और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया।
विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी निर्माण परियोजना के लिए प्रशासन द्वारा भूमि खाली कराने की कार्रवाई की गई। इस दौरान करीब 80 मकानों को हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है और नियमानुसार कार्रवाई की गई है। हालांकि प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही उनके पुनर्वास एवं मुआवजे को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे इसी क्षेत्र में निवास कर रहे थे और अचानक हुई कार्रवाई से उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों का दावा है कि उनके घरों के साथ-साथ आजीविका के साधन भी प्रभावित हुए हैं।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर जताया विरोध
बुधवार सुबह बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक उचित मुआवजा, पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों का कहना था कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी भी परियोजना के नाम पर लोगों को बेघर करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उनकी बात सुने बिना बुलडोजर कार्रवाई की, जिससे कई परिवारों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से सतर्क नजर आया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। मुख्य प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई ताकि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। कुछ समय तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की बहस की स्थिति भी बनी, लेकिन सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण हालात नियंत्रण में रहे।
प्रशासन से न्याय की मांग
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित सभी परिवारों का सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक प्रभावित परिवार के पुनर्वास की स्पष्ट योजना सार्वजनिक की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी प्रभावित परिवारों के समर्थन में आवाज उठाई है और प्रशासन से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है।
विकास बनाम विस्थापन की बहस
नकटी गांव की यह घटना एक बार फिर विकास परियोजनाओं और विस्थापन के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक हो सकता है, लेकिन प्रभावित लोगों के अधिकारों, पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संवाद स्थापित किया जाता और पुनर्वास की व्यवस्था पहले सुनिश्चित की जाती, तो स्थिति इतनी तनावपूर्ण नहीं बनती। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप अपनाई जा रही हैं।
आगे क्या?
फिलहाल नकटी गांव में स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। प्रदर्शन के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लेता है। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रायपुर में विधायक कॉलोनी निर्माण को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुनर्वास, मुआवजा और विकास कार्यों में प्रभावित लोगों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
