रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के नाम आवत ही मन मं धान के हरियर खेत, घना जंगल अउ आदिवासी संस्कृति के सुंदर तस्वीर उभर जाथे। फेर बहुत कम लोग जानथें कि छत्तीसगढ़ ला ‘धान के कटोरा’ के संग-संग ‘नदी मन के मायका’ घलो कहे जाथे। ए नाम सिरिफ एक उपमा नई, बल्कि प्रदेश के भौगोलिक, सांस्कृतिक अउ आर्थिक पहचान के हिस्सा आय।
प्रदेश के करीब 44 प्रतिशत इलाका जंगल ले ढंकाय हवय। ए जंगल अउ पहाड़ी इलाका ले सैकड़ों छोटी-बड़ी नदी मन निकलथें, जेन मन पूरा छत्तीसगढ़ के खेती, पेयजल, बिजली उत्पादन अउ जनजीवन ला संवारथें। जल संसाधन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ मं 37 प्रमुख नदी बहत हें, जबकि नाला अउ उपनदी मन ला जोड़ देय जावय त ए संख्या एक हजार ले घलो जियादा हो जाथे।
आज घलो प्रदेश के करीब 80 प्रतिशत खेती सीधे या अप्रत्यक्ष रूप ले ए नदी मन ऊपर निर्भर हवय।
महानदी – छत्तीसगढ़ के जीवनदायिनी
जब छत्तीसगढ़ के नदी मन के बात होथे, त सबसे पहिली नाम महानदी के आवथे। धमतरी जिला के सिहावा पहाड़ ले निकले वाली महानदी केवल एक नदी नई, बल्कि करोड़ों लोग के जिनगी के आधार आय।
धमतरी, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार अउ जांजगीर-चांपा जइसन जिला मन ला सींचत ए नदी आखिर मं ओडिशा होते बंगाल के खाड़ी मं समा जाथे।
महानदी ऊपर बने गंगरेल बांध, रुद्री बांध अउ हसदेव बांगो परियोजना प्रदेश के सिंचाई अउ बिजली उत्पादन बर बेहद महत्वपूर्ण हें। सिरपुर, राजिम अउ शिवरीनारायण जइसन धार्मिक स्थल घलो ए नदी के किनारे बसे हें।
शिवनाथ – खेती अउ आस्था के आधार
राजनांदगांव जिला ले निकले वाली शिवनाथ नदी छत्तीसगढ़ के दूसर सबसे महत्वपूर्ण नदी मानी जाथे।
दुर्ग, बेमेतरा अउ राजनांदगांव के हजारों किसान के खेती ए नदी ऊपर निर्भर हवय। शिवनाथ मं खारून, हाफ अउ मनियारी जइसन कई नदी आके मिलथें। तांदुला अउ खरखरा बांध घलो ए नदी के महत्व ला अउ बढ़ाथें।
हसदेव – सरगुजा के जीवन के आधार
कोरिया जिला ले निकले वाली हसदेव नदी उत्तर छत्तीसगढ़ बर जीवनरेखा मानी जाथे।
ए नदी ऊपर बने मिनीमाता बांगो बांध राज्य के सबसे बड़े जलाशय मन मं एक आय। कोरबा के ताप विद्युत संयंत्र मन ला पानी उपलब्ध कराय मं हसदेव के अहम भूमिका हवय।
इंद्रावती – बस्तर के शान
दक्षिण छत्तीसगढ़ के बात होवय अउ इंद्रावती नदी के जिक्र नई होय, ए संभव नई।
बस्तर, दंतेवाड़ा अउ बीजापुर ले गुजरत ए नदी प्राकृतिक सुंदरता के अद्भुत उदाहरण आय। विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, जेन ला भारत के ‘नियाग्रा’ घलो कहे जाथे, इही नदी ऊपर बने हवय।
इंद्रावती आखिर मं गोदावरी नदी मं मिल जाथे अउ दक्षिण भारत के जल प्रणाली के महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाथे।
अरपा, पैरी, मांड अउ केलो घलो कम नई
बिलासपुर के पहचान अरपा नदी आय। छत्तीसगढ़ के राजगीत “अरपा पैरी के धार” मं घलो ए नदी के महिमा गाए गे हवय।
पैरी नदी राजिम मं महानदी संग संगम करथे। ए संगम ला छत्तीसगढ़ के प्रयाग कहे जाथे।
मांड नदी रायगढ़ अउ जशपुर के खेती बर वरदान आय, जबकि केलो नदी रायगढ़ शहर के पेयजल के प्रमुख स्रोत माने जाथे।
गंगा अउ गोदावरी – दुनों बेसिन संग जुड़ाय हवय छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के खास बात ए आय कि प्रदेश के नदी मन दुई बड़े नदी बेसिन संग जुड़ें हें।
दक्षिण बस्तर के इंद्रावती, शबरी, नारंगी अउ कोटरी नदी मन गोदावरी बेसिन के हिस्सा हें।
वहीं उत्तर छत्तीसगढ़ के रिहंद, कन्हार अउ बनास नदी मन आखिरकार गंगा बेसिन तक पहुंचथें।
ए कारण ले छत्तीसगढ़ देश के जल संसाधन मं घलो महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे।
नदी मन के सामने बढ़त चुनौती
जिहां एक ओर नदी मन प्रदेश के पहचान हें, वहीं दूसर ओर कई चुनौती घलो सामने आवत हें।
रायपुर के खारून नदी अउ कोरबा के हसदेव नदी मं औद्योगिक प्रदूषण बढ़त दिखत हवय।
महानदी अउ शिवनाथ मं अवैध रेत उत्खनन ले नदी के प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होवत हवय।
गर्मी के मौसम मं छोटे-छोटे नाला अउ नदी मन सूख जाथें, जेन ले भूजल स्तर घलो लगातार नीचे जात हवय।
महानदी के पानी ला लेके छत्तीसगढ़ अउ ओडिशा के बीच कानूनी विवाद घलो अब तक जारी हवय।
सरकार करथें संरक्षण के प्रयास
नदी मन के संरक्षण बर सरकार कई योजना ऊपर काम करत हवय।
नरवा विकास योजना के तहत हजारों नाला मन के उपचार करके भूजल रिचार्ज बढ़ाय जात हवय।
महानदी, शिवनाथ अउ अरपा नदी के किनारे घाट निर्माण अउ बड़े पैमाना मं पौधारोपण करे जात हवय।
जल जीवन मिशन के माध्यम ले हर घर तक साफ पानी पहुंचाय के लक्ष्य ऊपर काम होवत हवय।
रायपुर मं खारून रिवरफ्रंट अउ बिलासपुर मं अरपा रिवरफ्रंट जइसन परियोजना घलो प्रस्तावित हें।
छत्तीसगढ़ के संस्कृति मं बसत हें नदी मन
छत्तीसगढ़ के नदी मन सिरिफ पानी के स्रोत नई हें। ए मन संस्कृति, आस्था, लोकगीत, तिहार अउ जीवन शैली के अभिन्न हिस्सा हें।
राजिम कुंभ ले लेकर चित्रकोट जलप्रपात तक, महानदी के आरती ले अरपा के लोकगीत तक – हर जगह नदी मन के अलग पहचान दिखाई देथे।
प्रदेश के लोकगीत, लोककथा अउ धार्मिक परंपरा मं नदी मन के विशेष स्थान हवय।
