एक समय रहिस जब गांव होवय या शहर, पान के दुकान मं लोगन के भीड़ लगे रहय। खाना खाय के बाद पान खाय ला शान अऊ परंपरा के रूप मं देखे जावत रहिस। मेहमान नवाजी ले लेके सामाजिक कार्यक्रम तक पान के खास महत्व रहिस। फेर बदलत जीवनशैली, आधुनिक खानपान अऊ स्वास्थ्य के प्रति बदलत सोच के चलते अब पान खाय के शौकीन मन के संख्या धीरे-धीरे कम होवत जात हे। एही कारण ले आज पान के परंपरा विलुप्त होवत दिखाई देत हे।
पहिली के जमाना मं हर गली-मोहल्ला मं पान दुकान दिख जावत रहिस। लोग अपन मन के बात, राजनीति के चर्चा अऊ सामाजिक मेल-मिलाप पान दुकान मं करे बर जुटत रहिन। फेर आज मोबाइल अऊ फास्ट लाइफस्टाइल के जमाना मं ये संस्कृति धीरे-धीरे सिमटत जात हे।
पान सिरिफ स्वाद नई, स्वास्थ्य बर घलो हे फायदेमंद
जानकार मन के मुताबिक पान पत्ता के तासीर गरम माने जाथे, फेर ओकर असर शरीर मं संतुलित रूप ले होथे। पान पाचन तंत्र ला मजबूत करे मं मदद करथे अऊ पेट के पीएच स्तर ला संतुलित रखथे। एखर सेवन ले शरीर मं पित्त कम होथे अऊ भोजन पचाय के प्रक्रिया बेहतर होथे।
कई लोगन के मानना हे कि सादा पान के सेवन ले पेट हल्का रहिथे अऊ खाना पचे मं आसानी होथे। एखर प्राकृतिक गुण शरीर ला कई प्रकार के पाचन संबंधी समस्या ले बचाय मं मददगार साबित हो सकथे।
पान चबाय ले बढ़थे लार, मजबूत होथे पाचन क्रिया
जब कोनो व्यक्ति पान चबाथे, त ओकर मुंह के लार ग्रंथि सक्रिय हो जाथे अऊ लार के उत्पादन बढ़ जाथे। लार मं मौजूद एंजाइम भोजन ला छोटे-छोटे हिस्सामं तोड़के ओकर पाचन आसान बनाथें। एखर से भोजन अच्छे तरीका ले पचथे अऊ पेट मं भारीपन के शिकायत कम हो सकथे।
यही वजह हे कि पहिली के लोग खाना खाय के बाद सादा पान जरूर खाय के सलाह देवत रहिन। आज भले ए परंपरा कम होगे होवय, फेर एखर स्वास्थ्य संबंधी महत्व आज घलो बने बने माने जाथे।
कब्ज अऊ अपच मं राहत दे सकथे पान
पान पत्ता मं अइसन गुण पाय जाथे जेन ह पाचन तंत्र ला सक्रिय बनाय मं मदद करथे। एखर सेवन ले कब्ज के समस्या मं राहत मिल सकथे अऊ पेट साफ रहिथे। जेन लोगन ला बार-बार अपच या गैस के परेशानी रहिथे, वो मन सादा पान के सीमित मात्रा मं सेवन ले फायदा पा सकथें।
हालांकि, विशेषज्ञ मन ये घलो कहिथें कि पान के सेवन मं तंबाकू या अन्य हानिकारक पदार्थ के उपयोग नई होना चाही, काबर ये स्वास्थ्य बर नुकसानदायक हो सकथे।
पेट ला ठंडक पहुंचाथे पान
पान के एक अउ महत्वपूर्ण फायदा ये घलो माने जाथे कि ए पेट के अंदरूनी सतह ला आराम पहुंचाथे अऊ पेट के अम्लता (एसिडिटी) ला कम करे मं सहायक हो सकथे। कुछ अध्ययन मं घलो ए बात सामने आय हे कि पान के प्राकृतिक तत्व पाचन एंजाइम्स के सक्रियता ला बढ़ा सकथें, जेन ले भोजन के पाचन बेहतर होथे।
यही कारण हे कि कई लोग आज घलो सादा पान के सेवन ला अपन दैनिक जीवन के हिस्सा बनाय रखे हवंय।
एंटीबैक्टीरियल गुण ले भरपूर हे पान
पान मं प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण पाय जाथे। ए गुण पेट मं मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया के प्रभाव ला कम करे मं मदद कर सकथे अऊ लाभकारी बैक्टीरिया के विकास ला बढ़ावा दे सकथे। एखर चलते पाचन तंत्र मजबूत बने रहिथे अऊ कई तरह के पेट संबंधी समस्या ले बचाव हो सकथे।
बदलत जमाना मं सहेजे के जरूरत हे ए परंपरा
आज के युवा पीढ़ी मं पान के प्रति रुचि पहिली के तुलना मं कम होगे हे। आधुनिक खानपान अऊ बदलत जीवनशैली के कारण पान के दुकान अऊ पान खाय के संस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त होवत जात हे। फेर अगर सादा अऊ संतुलित रूप मं पान के सेवन करे जावय, त ए सिरिफ एक परंपरा नई, बल्कि स्वास्थ्य बर घलो फायदेमंद साबित हो सकथे।
समय के संग बदलाव जरूरी हे, फेर अपन संस्कृति अऊ परंपरा के सकारात्मक पक्ष ला सहेज के रखे घलो ओतकेच जरूरी हे। पान के परंपरा छत्तीसगढ़ सहित पूरा देश के सामाजिक जीवन के एक अहम हिस्सा रहिस, जेला आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाय के जरूरत महसूस होवत हे।
