टेंडर में 20 फीसदी इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को शामिल करना अनिवार्य, ईंधन बचत की दिशा में बड़ा कदम
कोरबा। बदलते वैश्विक हालात और ईंधन संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता के बीच कोयला क्षेत्र में भी अब बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है। देश की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनियों में शामिल एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) ने अपनी खदानों में कोयला परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके तहत अब कोयला ढुलाई में ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) टिपर का इस्तेमाल किया जाएगा।
एसईसीएल द्वारा हाल ही में जारी टेंडर में स्पष्ट शर्त रखी गई है कि परिवहन कार्य में कम से कम 20 प्रतिशत इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों को शामिल करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य न केवल ईंधन की खपत कम करना है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत को भी बढ़ावा देना है।
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी तनाव और वैश्विक परिस्थितियों के कारण भविष्य में पेट्रोल-डीजल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार भी वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील के बाद देश की प्रमुख कंपनियां ईंधन संरक्षण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
इसी कड़ी में कोल इंडिया ने अपनी सभी अनुषंगी कंपनियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। गाइडलाइन के अनुसार अधिकारियों के लिए आधिकारिक कार पूलिंग को भी अनिवार्य किया गया है। अब एक ही दिशा में निरीक्षण या विभागीय कार्य के लिए जाने वाले अधिकारी साझा वाहन का उपयोग करेंगे, जिससे ईंधन की बचत हो सके।
एसईसीएल ने कोयला परिवहन के लिए जारी किए गए नए टेंडर में इन निर्देशों को शामिल किया है। कंपनी ने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि डीजल और पेट्रोल वाहनों की बजाय प्राथमिकता इलेक्ट्रिक वाहनों को दी जाए। साथ ही अन्य वाहनों को कॉमन पूल में रखा जाएगा ताकि अनावश्यक ईंधन खर्च को कम किया जा सके।
हालांकि वर्तमान समय में डीजल संकट जैसी स्थिति नहीं बनी है, लेकिन भविष्य में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए कंपनी पहले से तैयारी कर रही है। कोयला खदानों में भारी मशीनरी और बड़े वाहनों का लगातार उपयोग होता है, ऐसे में ईवी टिपर की शुरुआत आने वाले समय में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
यह कदम न केवल आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है, बल्कि कोयला उद्योग में हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते कदमों का भी प्रतीक माना जा रहा है।
