इंदौर में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के करीब 40 खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 22 स्वर्ण, 18 रजत और 16 कांस्य समेत कुल 56 पदक जीते। हरियाणा के बाद छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता रही।
बिलासपुर(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)खेल के मैदान में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया है। मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 56 पदक अपने नाम किए। इनमें 22 स्वर्ण, 18 रजत और 16 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन के साथ छत्तीसगढ़ की टीम प्रतियोगिता में उपविजेता रही, जबकि हरियाणा ने प्रथम स्थान हासिल किया।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से आए खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का बड़ी संख्या में पदक जीतना राज्य में कॉम्बैट कुश्ती जैसे खेलों के बढ़ते प्रभाव और खिलाड़ियों की मेहनत को दर्शाता है।
इंदौर में जुटे देशभर के खिलाड़ी
भारतीय कॉम्बैट फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में तीसरी राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित चमेली देवी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में किया गया। प्रतियोगिता में देश के करीब 16 राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग राज्यों से पहुंचे खिलाड़ियों के बीच विभिन्न वर्गों और स्पर्धाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
छत्तीसगढ़ की ओर से भी अलग-अलग जिलों के करीब 40 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। खिलाड़ियों ने अपने-अपने मुकाबलों में पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन किया और कई मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज करते हुए पदक हासिल किए।
आठ जिलों के खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा
छत्तीसगढ़ की टीम में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से खिलाड़ियों को शामिल किया गया था। प्रतियोगिता में खरसिया, रायगढ़, सक्ती, दुर्ग, पेंड्रा, बिलासपुर, गरियाबंद और रायपुर जिले के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आने वाले इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय मंच पर अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि बेहतर अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी किसी भी स्तर की प्रतियोगिता में अपनी पहचान बना सकते हैं।
प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने केवल पदक जीतने के लिए मुकाबला नहीं किया, बल्कि अपने खेल कौशल, अनुशासन और शारीरिक क्षमता का भी प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों का अनुभव इन खिलाड़ियों के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गी, नोगी और फ्री स्टाइल में दमदार प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में गी, नोगी और फ्री स्टाइल जैसी विभिन्न स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। खिलाड़ियों ने डबल इवेंट में भी मुकाबले खेले और कई वर्गों में पदक जीतकर टीम के कुल स्कोर को मजबूत किया।
पूरे प्रतियोगिता परिणाम पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ की टीम ने 22 स्वर्ण पदक जीतकर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा खिलाड़ियों ने 18 रजत और 16 कांस्य पदक भी अपने नाम किए। इस तरह राज्य के खिलाड़ियों ने कुल 56 पदकों के साथ प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया।
यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के कॉम्बैट खेलों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। खासतौर पर उन खिलाड़ियों के लिए, जो जिला स्तर से आगे बढ़कर राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
टीम के ऑफिशियल्स की भी रही महत्वपूर्ण भूमिका
छत्तीसगढ़ की टीम के साथ प्रतियोगिता में कई ऑफिशियल्स ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। टीम में चिंतामणि चक्रधारी, उमेश साहू, रियाज खान, कमलेश यादव, देवेंद्र ढीमर, सुगंधी राठौर और देवमणि साहू सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ टीम प्रबंधन और ऑफिशियल्स की भूमिका भी अहम होती है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिता की तैयारी, मुकाबलों के दौरान मार्गदर्शन और आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग मिलता है। छत्तीसगढ़ की टीम के इस सामूहिक प्रयास का परिणाम 56 पदकों के रूप में सामने आया।
22 स्वर्ण पदक ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का गौरव
छत्तीसगढ़ की टीम के प्रदर्शन की सबसे खास बात उसका स्वर्ण पदकों का आंकड़ा रहा। 22 गोल्ड मेडल जीतना यह बताता है कि टीम के कई खिलाड़ियों ने अपने-अपने मुकाबलों में प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
वहीं 18 रजत और 16 कांस्य पदकों ने टीम की कुल पदक संख्या को और मजबूत किया। अलग-अलग वजन वर्गों और स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने छत्तीसगढ़ को प्रतियोगिता की शीर्ष टीमों में शामिल कर दिया।
हरियाणा के बाद छत्तीसगढ़ का उपविजेता रहना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में देश के करीब 16 राज्यों की भागीदारी के बीच दूसरा स्थान हासिल करना खिलाड़ियों के लिए भी उत्साह बढ़ाने वाला परिणाम है।
आगे के लिए बढ़ा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मिलने वाला अनुभव खिलाड़ियों के खेल करियर में काफी अहम होता है। छत्तीसगढ़ के इन खिलाड़ियों के लिए इंदौर प्रतियोगिता भी ऐसा ही एक अवसर रही, जहां उन्हें अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करने और राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा को करीब से समझने का मौका मिला।
56 पदकों की यह उपलब्धि आने वाले समय में राज्य के अन्य युवा खिलाड़ियों को भी कॉम्बैट कुश्ती और संबंधित खेलों की ओर आकर्षित कर सकती है। जिला स्तर पर प्रतिभाओं को तलाशकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि
छत्तीसगढ़ की टीम का राष्ट्रीय कॉम्बैट कुश्ती प्रतियोगिता में उपविजेता बनना केवल पदकों की संख्या तक सीमित उपलब्धि नहीं है। यह उन खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने अपने-अपने जिलों से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया।
खरसिया से लेकर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, सक्ती, दुर्ग, पेंड्रा और गरियाबंद तक के खिलाड़ियों ने एक टीम के रूप में प्रदर्शन किया। 22 स्वर्ण, 18 रजत और 16 कांस्य यानी कुल 56 पदक राज्य के खेल प्रेमियों के लिए निश्चित रूप से गर्व का विषय हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से छत्तीसगढ़ के कॉम्बैट खेलों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और टीम ऑफिशियल्स की मेहनत ने यह संदेश दिया है कि राज्य की प्रतिभाएं उचित मंच मिलने पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकती हैं।
छत्तीसगढ़ की टीम का यह प्रदर्शन आने वाले समय में राज्य के कॉम्बैट खेलों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है।
