छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते साइबर अपराध, सोशल मीडिया पर अश्लील पोस्ट और AI से फर्जी तस्वीरें बनाने के मामलों पर सख्त चेतावनी दी। जानिए आयोग ने क्या कहा, कितने मामले लंबित हैं और शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है।
दुर्ग (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। डिजिटल दौर में जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणियां, आपत्तिजनक पोस्ट, फर्जी प्रोफाइल बनाना, तस्वीरों से छेड़छाड़ करना और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से महिलाओं की नकली एवं आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार करने जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन गंभीर घटनाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने स्पष्ट कहा है कि यदि महिलाओं से जुड़े साइबर अपराधों में पुलिस समय पर उचित कार्रवाई नहीं करती है, तो पीड़ित महिलाएं बिना किसी झिझक के सीधे आईजी कार्यालय या राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आयोग महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से लेकर संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
पहली बार दुर्ग पहुंचीं आयोग अध्यक्ष, जनसुनवाई में सुनी महिलाओं की समस्याएं

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बनने के बाद डॉ. ममता साहू पहली बार दुर्ग पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने जनसुनवाई में महिलाओं की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों के साथ विभिन्न मामलों की समीक्षा भी की।
उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा की रक्षा करना भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए प्रशासन, पुलिस, न्यायिक व्यवस्था और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है।
एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल बन रहा बड़ी चुनौती
डॉ. साहू ने कहा कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। कुछ असामाजिक तत्व महिलाओं की तस्वीरों को मॉर्फ कर अश्लील या भ्रामक तस्वीरें और वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा, मानसिक स्वास्थ्य और निजी जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य शरारत समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। यह गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आता है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर अभद्र पोस्ट करने वालों पर भी होगी निगरानी
महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर), व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा, अश्लील टिप्पणियां, चरित्रहनन करने वाले पोस्ट या फर्जी अकाउंट बनाकर परेशान करने वाले लोगों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि यदि उनके साथ इस प्रकार की कोई घटना होती है तो वे डरें नहीं, बल्कि स्क्रीनशॉट, लिंक और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें तथा तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत मिलने से जांच और कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।
पुलिस कार्रवाई न करे तो सीधे आयोग पहुंचे पीड़ित
डॉ. ममता साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी महिला की शिकायत पर स्थानीय स्तर पर पुलिस अपेक्षित कार्रवाई नहीं करती है या शिकायत दर्ज करने में अनावश्यक देरी होती है, तो पीड़िता सीधे आईजी कार्यालय अथवा राज्य महिला आयोग से संपर्क कर सकती है।
उन्होंने कहा कि आयोग ऐसे मामलों की निगरानी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा जाएगा, ताकि पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय मिल सके।
प्रदेशभर में 786 मामले लंबित, रायपुर सबसे आगे
जनसुनवाई के दौरान आयोग अध्यक्ष ने लंबित मामलों की जानकारी भी साझा की। उनके अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के पास प्रदेशभर से कुल 786 मामले लंबित हैं।
इनमें सबसे अधिक 430 मामले रायपुर जिले से संबंधित हैं, जबकि 68 मामले दुर्ग जिले के हैं। इसके अलावा अन्य जिलों से भी घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद, पारिवारिक विवाद, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और साइबर अपराध से जुड़े मामले लगातार आयोग के पास पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आयोग का प्रयास है कि सभी मामलों का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान किया जाए, ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
महिलाओं को जागरूक करने पर रहेगा विशेष जोर
डॉ. साहू ने कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं को उनके अधिकारों और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आयोग आने वाले समय में विभिन्न जिलों में जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और संवाद आयोजित करेगा। इनमें महिलाओं और छात्राओं को ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर फ्रॉड से बचाव, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञों की सलाह भी महत्वपूर्ण
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं को सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सीमित रूप से साझा करनी चाहिए। अज्ञात व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें तथा अपने सोशल मीडिया खातों में मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
यदि किसी महिला की फोटो या वीडियो का गलत इस्तेमाल किया जाता है तो उसे तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करने के साथ-साथ साइबर पुलिस और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
राज्य महिला आयोग का कहना है कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए अब शिकायतों के त्वरित समाधान और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डॉ. ममता साहू ने कहा कि हर महिला को यह विश्वास होना चाहिए कि यदि उसके साथ अन्याय होता है तो शासन, प्रशासन और महिला आयोग उसके साथ खड़ा है। महिलाओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना ही आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
