छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग की वर्ष 2021 और 2022 की विभागीय पदोन्नति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है। जानिए पूरा मामला, आरोप और अब तक की स्थिति।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) में वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग की वर्ष 2021 और 2022 में आयोजित विभागीय पदोन्नति परीक्षाओं को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य के पूर्व गृह मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर ने इन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है।
कंवर का आरोप है कि विभागीय पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और परीक्षा प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि इन आरोपों की अब तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या सक्षम प्राधिकरण द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
42 पदों के लिए आयोजित हुई थी विभागीय परीक्षा
पूर्व गृह मंत्री के अनुसार वर्ष 2021 और 2022 में जीएसटी विभाग में कुल 42 पदों पर पदोन्नति के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित की गई थी। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा होने के बावजूद इसे किसी स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी, विशेषकर व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के माध्यम से आयोजित नहीं कराया गया।
कंवर ने अपने पत्र में लिखा है कि यदि परीक्षा किसी स्वतंत्र संस्था के माध्यम से होती तो पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर संदेह की गुंजाइश काफी कम रहती। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर परीक्षा आयोजित किए जाने से पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।
असामान्य अंकों को लेकर जताई शंका
ननकीराम कंवर ने परीक्षा परिणामों का हवाला देते हुए दावा किया है कि कुछ अभ्यर्थियों को 80 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक अंक प्राप्त हुए, जो विभागीय परीक्षा के स्तर को देखते हुए असामान्य प्रतीत होते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने अधिक अंक सामान्य प्रतिस्पर्धा में संभव हैं या फिर इसके पीछे प्रश्नपत्र लीक अथवा अन्य किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, केवल अधिक अंक प्राप्त होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है।
प्रश्नपत्र लीक की आशंका भी जताई
पूर्व मंत्री ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल विभागीय परीक्षा की विश्वसनीयता पर ही नहीं बल्कि सरकारी सेवा में पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
उनका कहना है कि सरकारी विभागों में पदोन्नति योग्यता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के आधार पर होनी चाहिए। यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
तत्कालीन आयुक्त समीर बिश्नोई से जुड़े लोगों के चयन पर भी उठाए सवाल
अपने पत्र में ननकीराम कंवर ने तत्कालीन जीएसटी आयुक्त समीर बिश्नोई से जुड़े कुछ लोगों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में ऐसे अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की आशंका है, जिनका संबंध तत्कालीन अधिकारियों से बताया जाता है।
हालांकि, इस संबंध में भी अब तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है।
केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग
पूर्व गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए ताकि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो सके।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष पाई जाती है तो इससे विभाग और चयनित कर्मचारियों पर लगे संदेह भी समाप्त हो जाएंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर फिर शुरू हुई बहस
इस मामले ने सरकारी विभागों में होने वाली विभागीय पदोन्नति परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सेवाओं में पदोन्नति की प्रक्रिया जितनी अधिक पारदर्शी होगी, कर्मचारियों का भरोसा भी उतना ही मजबूत होगा।
कई प्रशासनिक विशेषज्ञ लंबे समय से यह सुझाव देते रहे हैं कि महत्वपूर्ण विभागीय परीक्षाओं को स्वतंत्र परीक्षा एजेंसियों के माध्यम से आयोजित कराया जाए ताकि किसी भी प्रकार के विवाद या पक्षपात की आशंका कम हो सके।
अभी तक विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
समाचार लिखे जाने तक जीएसटी विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। यदि भविष्य में विभाग या संबंधित पक्ष अपना पक्ष जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
पत्र के सार्वजनिक होने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार इस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और क्या किसी जांच एजेंसी को मामले की जांच सौंपी जाती है।
जीएसटी विभागीय पदोन्नति परीक्षा को लेकर लगाए गए आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि फिलहाल ये आरोप जांच के दायरे में आने की मांग तक सीमित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है। यदि जांच होती है तो उससे न केवल तथ्यों का खुलासा होगा बल्कि सरकारी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों का भी समाधान संभव हो सकेगा।
