झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानी पर राजनीति बंद होनी चाहिए और कांग्रेस अपने कार्यकाल में हुई जांच व कार्रवाई का जवाब दे।
(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा है कि शहीदों की कुर्बानी को राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में झीरम के शहीदों के प्रति संवेदनशील होती, तो अपने शासनकाल के दौरान मामले की जांच और दोषियों तक पहुंचने के लिए ठोस कदम उठाती।
उन्होंने कहा कि झीरम घाटी की घटना केवल एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश की पीड़ा है। ऐसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस पहले अपने शासनकाल का हिसाब दे
शिवनारायण पाण्डेय ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वर्ष 2018 से 2023 तक जब प्रदेश में उसकी सरकार थी, तब झीरम मामले की जांच को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए गए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार वर्तमान सरकार पर सवाल उठा रही है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि अपने कार्यकाल में कांग्रेस ने शहीद परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या किया। यदि सरकार के पास पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति थी, तो जांच में तेजी क्यों नहीं आई और दोषियों तक पहुंचने में सफलता क्यों नहीं मिली।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि केवल बयानबाजी से न्याय नहीं मिलता, बल्कि ठोस कार्रवाई और पारदर्शी जांच से पीड़ित परिवारों का विश्वास मजबूत होता है।
भूपेश बघेल के दावों पर भी उठाए सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उन दावों पर भी सवाल उठाए, जिनमें उन्होंने झीरम मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और सबूतों की बात कही थी।
पाण्डेय ने कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री के पास वास्तव में ऐसे महत्वपूर्ण सबूत मौजूद थे, जो जांच को नई दिशा दे सकते थे, तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसियों को तत्काल सौंपा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर दावे करने के बजाय यदि वे सबूत आधिकारिक जांच का हिस्सा बनते, तो शायद मामले की प्रगति और तेज हो सकती थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मंचों पर संवेदनशील मामलों को उठाकर जनता की भावनाओं को प्रभावित करने का प्रयास उचित नहीं कहा जा सकता।
शहीदों की कुर्बानी पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि झीरम घाटी नक्सली हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। इस हमले में कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं सहित अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। ऐसे शहीदों की स्मृति और उनके परिवारों के सम्मान को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शहीदों की कुर्बानी पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना समाज के लिए सकारात्मक संदेश नहीं देता। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर ऐसी घटनाओं से सीख लेते हुए नक्सलवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करना चाहिए।
बस्तर में बदला है सुरक्षा और विकास का माहौल: भाजपा
शिवनारायण पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान समय में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों के कारण कई क्षेत्रों में शांति का वातावरण बना है और विकास कार्यों को गति मिली है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी भय और हिंसा का माहौल था, वहां आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। भाजपा का कहना है कि सरकार का लक्ष्य केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना ही नहीं, बल्कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की मुख्यधारा पहुंचाना भी है।
पाण्डेय ने कहा कि आज बस्तर के अनेक क्षेत्रों में राष्ट्रीय ध्वज पूरे सम्मान के साथ लहरा रहा है और आम नागरिक विकास योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने इसे राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।
राजनीतिक आरोपों के बीच फिर चर्चा में आया झीरम मामला
झीरम घाटी नक्सली हमला समय-समय पर राजनीतिक बहस का विषय बनता रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मामले को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं। कांग्रेस लगातार इस मामले में व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग करती रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सभी पक्षों को तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झीरम जैसी संवेदनशील घटनाएं केवल चुनावी विमर्श तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका उद्देश्य पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना होना चाहिए।
जनता की अपेक्षा: न्याय और पारदर्शिता
झीरम घाटी हमले को लेकर प्रदेश की जनता की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े और दोषियों तक पहुंचकर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन शहीद परिवारों और आम नागरिकों की प्राथमिकता न्याय, जवाबदेही और शांति है।
ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रहे, पीड़ित परिवारों का विश्वास कायम रहे और राज्य में सुरक्षा तथा विकास का वातावरण लगातार मजबूत होता जाए।
