KORBA (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । सावन के महीना भगवान भोलेनाथ के भक्ति अउ आराधना बर सबसे खास महीना माने जाथे। सावन के महीना शुरू होते ही शिव मंदिर मन म भक्त मन के भीड़ बढ़े लगथे। गांव ले शहर तक हर तरफ हर-हर महादेव अउ बोल बम के जयकारा सुनई देथे। कोनो भक्त शिवलिंग म जल चढ़ाथे, तो कोनो रुद्राभिषेक करके भगवान शिव ले सुख-शांति अउ समृद्धि के आशीर्वाद मांगथे। ए महीना सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नइ हे, बल्कि मन के शुद्धि, संयम, सेवा अउ प्रकृति के करीब जाए के भी संदेश देथे।
हिंदू धार्मिक मान्यता के मुताबिक सावन भगवान शिव ला सबसे ज्यादा प्रिय महीना हे। कहिथें कि एही महीना म माता पार्वती भगवान शिव ला पति रूप म पाय बर कठोर तपस्या करे रहिन। माता पार्वती के तपस्या ले प्रसन्न होके भगवान शिव ह उनला अपन पत्नी रूप म स्वीकार करिन। एही कारण सावन म शिव-पार्वती के पूजा के विशेष महत्व बताय जाथे। कुंवारी कन्या मन मनचाहा वर बर अउ सुहागिन महिला मन सुखी वैवाहिक जीवन के कामना ले सावन सोमवार के व्रत रखथें।
सावन म पड़ही चार सोमवार, शिव भक्त मन म दिखही खास उत्साह
ए साल सावन म चार सोमवार पड़त हे। पहिली सोमवारी 28 जुलाई, दूसर 4 अगस्त, तिसर 11 अगस्त अउ चउथ 18 अगस्त के होही। धार्मिक मान्यता के अनुसार चार सोमवार वाला सावन बहुत शुभ अउ फलदायी माने जाथे। ए दिन मन शिव मंदिर म विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक अउ रुद्राभिषेक के आयोजन होथे।
सावन सोमवार के दिन सुबह ले ही शिव मंदिर म भक्त मन के लाइन लग जाथे। कई भक्त उपवास रखके भगवान शिव के पूजा करथें, त कई लोग नजदीकी नदी, तालाब या पवित्र जल लेके शिवलिंग म अभिषेक करथें। छत्तीसगढ़ म भी सावन के महीना म अलग-अलग शिव मंदिर मन म विशेष आयोजन करे जाथे।
सावन म कइसे करव भगवान शिव के आराधना?
सावन म शिव आराधना बर कोनो कठिन नियम जरूरी नइ माने जाथे। भगवान शिव ला भोलेनाथ कहे जाथे, अउ धार्मिक मान्यता हे कि वो सच्चा मन ले करे गे भक्ति ले जल्दी प्रसन्न हो जाथें। फिर भी सावन सोमवार के पूजा बर कुछ खास विधि अउ परंपरा बताय गे हे।
सुबह जल्दी उठके स्नान
सावन सोमवार के दिन भक्त मन ला संभव होही त बिहान जल्दी उठके स्नान करके पूजा के तैयारी करना चाही। कई लोग ब्रह्म मुहूर्त म उठके स्नान करथें अउ साफ-सुथरा कपड़ा पहिनके भगवान शिव के पूजा करथें। मान्यता हे कि पूजा के पहिली तन अउ मन दूनों के शुद्धि जरूरी हे।
व्रत अउ संयम के महत्व
सावन सोमवार के व्रत रखे के परंपरा बहुत पुराना हे। भक्त मन अपन श्रद्धा के अनुसार निर्जला, फलाहार या एक बेरा भोजन करके व्रत रखथें। ए समय सात्विक भोजन करे के सलाह दी जाथे। धार्मिक रूप ले सावन म मन, वचन अउ कर्म म संयम रखे ला भी बहुत जरूरी माने गे हे।
व्रत के असल मतलब सिर्फ भूखा रहना नइ, बल्कि अपन मन के गलत विचार, क्रोध, अहंकार अउ नकारात्मकता ले दूर रहना भी हे। एही कारण सावन के व्रत ला आत्म-संयम अउ आत्मशुद्धि के साधना के रूप म देखे जाथे।
शिवलिंग म जलाभिषेक
सावन म शिवलिंग म जल चढ़ाना सबसे प्रमुख पूजा माने जाथे। भक्त मन दूध, दही, घी, शहद अउ जल ले पंचामृत तैयार करके अभिषेक करथें। एखर बाद शिवलिंग म बेलपत्र, फूल अउ अन्य पूजन सामग्री अर्पित करे जाथे।
धार्मिक मान्यता हे कि भगवान शिव ला बेलपत्र बहुत प्रिय हे। पूजा के समय श्रद्धा अउ भक्ति के साथ बेलपत्र चढ़ाय जाथे। शिवलिंग म जल चढ़ावत समय भक्त मन “ॐ नमः शिवाय” के जाप करथें।
रुद्राभिषेक के विशेष महत्व
सावन के महीना म रुद्राभिषेक के विशेष महत्व बताय जाथे। रुद्राभिषेक म वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव के अभिषेक करे जाथे। कई भक्त अपन परिवार के सुख-शांति, स्वास्थ्य अउ समृद्धि बर रुद्राभिषेक करवाथें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन सोमवार म रुद्राभिषेक करे ले भगवान शिव के विशेष कृपा मिलथे। हालांकि पूजा के फल के संबंध म अलग-अलग धार्मिक परंपरा अउ मान्यता हो सकथे, लेकिन भक्त मन के बीच रुद्राभिषेक के प्रति गहरी आस्था देखे जाथे।
पूजा के समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के जाप करे के भी विशेष महत्व हे। कई भक्त 108 बेर मंत्र जाप करथें। संझा के बेरा शिव मंदिर म दीया जलाके शिव चालीसा अउ शिव स्तुति करे के परंपरा भी हे।
कांवड़ यात्रा ह त्याग, सेवा अउ समर्पण के प्रतीक
सावन के महीना म कांवड़ यात्रा के भी विशेष महत्व रहिथे। खासकर उत्तर भारत म कांवड़िया मन पवित्र नदी ले जल भरके पैदल शिव मंदिर तक जाथें अउ भगवान शिव के जलाभिषेक करथें। पूरा यात्रा के दौरान भक्त मन “बोल बम” अउ “हर हर महादेव” के जयकारा लगावत जाथें।
कांवड़ यात्रा ला भगवान शिव के प्रति भक्ति, त्याग, अनुशासन अउ समर्पण के प्रतीक माने जाथे। आजकल देश के अलग-अलग हिस्सा म भी कांवड़ यात्रा के आयोजन होवत हे अउ सावन के महीना म शिव भक्त मन अपन-अपन तरीका ले भोलेनाथ के आराधना करथें।
16 सोमवार व्रत अउ मंगला गौरी पूजा के भी महत्व
सावन के समय 16 सोमवार व्रत के परंपरा भी बहुत लोकप्रिय हे। धार्मिक मान्यता के मुताबिक कुंवारी कन्या मन मनचाहा जीवनसाथी के कामना ले 16 सोमवार के व्रत रखथें। ए व्रत म भगवान शिव अउ माता पार्वती के पूजा करे जाथे।
एखर अलावा सावन के मंगलवार म मंगला गौरी पूजा करे के परंपरा हे। सुहागिन महिला मन अपन पति के लंबा उमर अउ परिवार के सुख-समृद्धि बर माता गौरी के पूजा करथें।
सावन म नाग पंचमी अउ हरियाली तीज जइसन पर्व भी मनाय जाथे। हरियाली तीज म शिव-पार्वती के पूजा के साथ प्रकृति के हरियाली अउ नारी शक्ति के उत्सव मनाय जाथे। नाग पंचमी म नाग देवता के पूजा करे के परंपरा हे।
शिव पुराण कथा सुनना भी माने जाथे शुभ
सावन के महीना म कई मंदिर अउ घर म शिव पुराण कथा के आयोजन होथे। भक्त मन भगवान शिव के कथा सुनथें अउ धार्मिक ग्रंथ मन के पाठ करथें। मान्यता हे कि भगवान शिव के कथा सुनना अउ मनन करना ले मन म शांति आवथे अउ इंसान ला अपन जीवन म सही राह म चले के प्रेरणा मिलथे।
सावन के धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक पक्ष भी
सावन के महीना बर धार्मिक मान्यता के साथ-साथ प्रकृति अउ स्वास्थ्य के नजरिया ले भी खास महत्व हे। ए समय बरसात के मौसम रहिथे। वातावरण म नमी बढ़ जाथे अउ कई तरह के संक्रमण के खतरा भी बढ़ सकथे। ए कारण पारंपरिक रूप ले सावन म हल्का, ताजा अउ सात्विक भोजन करे के सलाह दी जाथे।
पुराना समय ले ही सावन म खान-पान के कुछ नियम बनाय गे हें। कई परिवार म ए समय कुछ खास सब्जी या भोजन नइ खाय के परंपरा हे। हालांकि ए नियम अलग-अलग क्षेत्र अउ परिवार के परंपरा के हिसाब ले अलग हो सकथे।
सावन के हरियाली मन ला प्रकृति के करीब लाथे। चारों तरफ हरियाली, बरसात के बूंद अउ ठंडक के माहौल मन ला शांति देथे। एही कारण सावन ला प्रकृति, भक्ति अउ आत्मचिंतन के संगम भी कहे जा सकथे।
पूजा के समय का करें अउ का नइ करें?
सावन म भगवान शिव के पूजा करत समय भक्त मन ला अपन श्रद्धा के साथ कुछ बात के ध्यान रखना चाही। शिव मंदिर जाके जलाभिषेक करना, “ॐ नमः शिवाय” के जाप करना, जरूरतमंद मन ला भोजन कराना अउ सेवा-दान करना शुभ काम माने जाथे।
एखर संग झूठ, क्रोध, निंदा अउ दूसर के प्रति द्वेष ले बचे के कोशिश करना चाही। नशा अउ तामसिक भोजन ले दूरी रखे के परंपरा भी सावन म देखे ला मिलथे। सबसे जरूरी बात ये हे कि पूजा के साथ अपन व्यवहार म भी सकारात्मक बदलाव लाय जाए।
कोरबा के पाली जइसन प्राचीन शिव मंदिर म विशेष आयोजन
छत्तीसगढ़ म सावन के महीना म कई प्राचीन शिव मंदिर म विशेष पूजा-अर्चना करे जाथे। कोरबा जिला के पाली स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर म भी सावन के समय भक्त मन के खास भीड़ देखे ला मिलथे। ए मंदिर के धार्मिक अउ ऐतिहासिक महत्व के कारण दूर-दूर ले श्रद्धालु मन दर्शन बर पहुंचथें।
सावन सोमवार के दिन मंदिर मन म जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन अउ भंडारा जइसन आयोजन करे जाथे। भक्त मन भगवान शिव के दर्शन करके अपन परिवार के सुख-शांति अउ समृद्धि बर प्रार्थना करथें।
सावन के असल संदेश हे भक्ति के संग मन के शुद्धि
सावन सिरिफ पूजा-पाठ अउ व्रत के महीना नइ हे। ए महीना इंसान ला अपन भीतर झांक के देखे, मन के विकार मन ला दूर करे अउ दूसर मन के प्रति दया, सेवा अउ प्रेम के भावना रखे के संदेश देथे।
भगवान शिव के आराधना म दिखावा ले जियादा भावना के महत्व माने जाथे। एही कारण सावन म एक लोटा जल चढ़ाके भी भक्त अपन मन के बात भोलेनाथ तक पहुंचाथे। शिव आराधना के असल मतलब ए हो सकथे कि हम अपन भीतर के क्रोध, अहंकार अउ नकारात्मकता ला कम करके समाज म प्रेम, शांति अउ सद्भाव के “अमृत” घोलें।
ए सावन म संकल्प लेव कि भक्ति के संग सेवा करबो, प्रकृति के सम्मान करबो अउ अपन मन ला सकारात्मक रखबो। काबर भोलेनाथ के भक्ति सिरिफ मंदिर तक नइ, बल्कि हमर व्यवहार अउ कर्म म भी दिखे के चाही।
