छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। 30 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की अहम बैठक होगी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और संगठन में बदलाव को लेकर बड़ा फैसला संभव है। सचिन पायलट के दौरे और भूपेश-टीएस सिंहदेव की मुलाकात से बढ़ी राजनीतिक हलचल।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस संगठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। आगामी 30 जुलाई को दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को भी बुलाया गया है। इस बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि बैठक में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे, आगामी रणनीति और प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अहम निर्णय लिया जा सकता है।
विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर होने वाली चर्चा को पार्टी के भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
दीपक बैज को दिल्ली बुलावे से बढ़ी राजनीतिक हलचल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को दिल्ली बुलाए जाने के बाद पार्टी के अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से किसी बदलाव को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से लगातार संगठनात्मक बैठकों का दौर चल रहा है, उससे बदलाव की संभावनाओं को बल मिल रहा है।
दीपक बैज ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा, लेकिन सत्ता वापसी का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसके बाद से ही संगठन में नई ऊर्जा लाने और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी।
कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ एक महत्वपूर्ण राज्य रहा है। वर्ष 2018 में पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वापसी करते हुए सत्ता हासिल कर ली। अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को फिर से मजबूत करना और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है।
सचिन पायलट के दौरे से पहले तैयार हो रहा संगठन का फीडबैक
30 जुलाई की दिल्ली बैठक से पहले प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट 28 जुलाई को छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे। उनके दौरे को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सचिन पायलट प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, विधायकों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों से मुलाकात कर पार्टी की मौजूदा स्थिति का फीडबैक लेंगे।
इस दौरान वे यह समझने की कोशिश करेंगे कि प्रदेश कांग्रेस की जमीनी स्थिति क्या है, कार्यकर्ताओं के बीच किस तरह की नाराजगी या चुनौतियां हैं और आने वाले समय में पार्टी को किस रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
सचिन पायलट इससे पहले भी संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उनके दौरे को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रदेश कांग्रेस की भविष्य की दिशा तय करने वाली कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कई नामों पर चर्चा की अटकलें
कांग्रेस संगठन में बदलाव की चर्चा के बीच प्रदेश अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी के भीतर यह मंथन चल रहा है कि आने वाले समय में किस चेहरे को संगठन की जिम्मेदारी दी जाए, जो पार्टी को मजबूत करने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बना सके।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना है। भाजपा सरकार के खिलाफ प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पार्टी को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके।
हालांकि, अभी तक किसी नाम को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई संकेत नहीं दिया गया है। अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान की बैठक के बाद ही सामने आने की संभावना है।
भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की मुलाकात से बढ़ी सियासी चर्चाएं
इधर संगठन बदलाव की चर्चाओं के बीच कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के जन्मदिन के मौके पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का बघेल निवास पहुंचना राजनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की राजनीति में भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव दोनों ही बड़े चेहरे रहे हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच खींचतान की चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि बाद के वर्षों में दोनों नेताओं ने पार्टी के हित में साथ काम किया।
अब लंबे समय बाद दोनों नेताओं की मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसे नए समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस की पुरानी ‘जय-वीरू’ जोड़ी के फिर सक्रिय होने के संकेत के रूप में भी चर्चा मिल रही है।
हालांकि नेताओं की ओर से इस मुलाकात को पूरी तरह पारिवारिक और सामाजिक बताया गया है, लेकिन राजनीति में समय और परिस्थितियां कई बार अलग संदेश भी देती हैं।
भाजपा सरकार के खिलाफ रणनीति पर भी होगी चर्चा
कांग्रेस के सामने केवल संगठन का सवाल ही नहीं है, बल्कि राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ अपनी भूमिका को मजबूत करना भी बड़ी चुनौती है।
सचिन पायलट के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान प्रदेश सरकार के खिलाफ आगामी आंदोलनों, जनता से जुड़े मुद्दों और पार्टी की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दों, कानून व्यवस्था और सरकारी योजनाओं जैसे विषयों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में पार्टी संगठन में बदलाव को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
30 जुलाई की बैठक पर टिकी सभी की नजरें
फिलहाल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें अब 30 जुलाई को होने वाली दिल्ली बैठक पर टिकी हुई हैं। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर फैसला होता है या संगठन में कोई बड़ा बदलाव किया जाता है, यह आने वाले दिनों की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
अगर कांग्रेस प्रदेश संगठन में बदलाव करती है तो यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी की नई रणनीति की शुरुआत भी मानी जाएगी।
छत्तीसगढ़ की सियासत में कांग्रेस लंबे समय से मजबूत आधार वाली पार्टी रही है। ऐसे में संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश पार्टी के लिए बेहद अहम होगी। अब देखना होगा कि 30 जुलाई की बैठक के बाद कांग्रेस किस नए चेहरे और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ती है।
