Sonam Wangchuk Hunger Strike News 2026: लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन 15वें दिन में पहुंचा। जानिए उनकी सेहत, 20 जुलाई संसद मार्च, लद्दाख की 6वीं अनुसूची की मांग, NEET पेपर लीक विवाद, सरकार का पक्ष और देशभर से मिल रहे समर्थन की पूरी खबर।
(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु एवं शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज 15वें दिन में प्रवेश कर गया है। लगातार कई दिनों से बिना भोजन के आंदोलन कर रहे वांगचुक की सेहत पर असर साफ दिखाई देने लगा है। उनका वजन करीब 7.5 किलोग्राम कम हो चुका है, जबकि डॉक्टरों की निगरानी लगातार जारी है। इसके बावजूद उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून से चल रहे इस अनशन में वांगचुक के साथ Cockroach Janta Party (CJP) के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। CJP का विरोध प्रदर्शन 20 जून से जारी है। आंदोलन अब केवल लद्दाख तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण जैसे राष्ट्रीय मुद्दों से भी जुड़ गया है।
‘मुझे गांधी या हीरो मत कहिए’, वांगचुक का भावुक संदेश
अनशन के 15वें दिन सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए लोगों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि उन्हें “21वीं सदी का गांधी” या कोई बड़ा हीरो बताना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा,
“मैं सिर्फ एक आम नागरिक हूं जो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हूं। किसी और में हीरो मत खोजिए। अपने जीवन के हीरो खुद बनिए और एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाइए।”
वांगचुक ने यह भी कहा कि यदि उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश की जाती है तो यह उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
स्वास्थ्य पर बढ़ता असर, डॉक्टर कर रहे लगातार निगरानी
लगातार भूख हड़ताल का असर अब उनकी सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर 106/74 mm Hg दर्ज किया गया है और उनका वजन लगभग 7.5 किलो घट चुका है।
हालांकि वांगचुक का कहना है कि शुरुआती दिनों की तुलना में अब भूख की भावना स्थिर हो गई है, लेकिन बीच-बीच में कमजोरी और थकान महसूस हो रही है। डॉक्टर लगातार उनकी स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं और 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
इसके बावजूद वांगचुक ने कहा कि वे अपनी इच्छा से आंदोलन कर रहे हैं और फिलहाल उन्हें अपने जीवन को लेकर कोई भय नहीं है।
आंदोलन की दो प्रमुख मांगें
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि उनका यह अनशन दो बड़े मुद्दों पर केंद्रित है।
1. शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही
Cockroach Janta Party (CJP) की मांग है कि NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जाए। संगठन ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही परीक्षा संबंधी घटनाओं के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
वांगचुक ने कहा,
“गलती छात्रों की नहीं थी। यदि पेपर लीक हुए तो जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन उसकी कीमत छात्र चुका रहे हैं।”
2. लद्दाख के संवैधानिक और पर्यावरणीय अधिकार
दूसरी प्रमुख मांग लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, राज्य का दर्जा देने तथा वहां की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।
वांगचुक लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा है और बिना संवैधानिक सुरक्षा के वहां का पारिस्थितिक संतुलन खतरे में पड़ सकता है।
20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान
अनशन के दौरान वांगचुक ने देशभर के नागरिकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने की अपील की है। यह दिन संसद के मानसून सत्र का पहला दिन भी है।
उन्होंने कहा,
“आपको 24 दिन भूखे रहने की जरूरत नहीं है। खाना खाकर आइए, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमारे साथ खड़े रहिए।”
जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते, उनसे उन्होंने अपने-अपने शहरों और गांवों में एक दिन का प्रतीकात्मक उपवास रखने की अपील की है।
केंद्र सरकार से बातचीत क्यों नहीं बनी?
सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया फिलहाल ठहर गई है।
उनके अनुसार फरवरी 2026 में जेल के दौरान हुई बैठक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद 22 मई को रिहाई के बाद दूसरी बैठक हुई, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि समाधान निकल सकता है, लेकिन उस बैठक के निष्कर्ष औपचारिक रूप से दर्ज नहीं किए गए।
उन्होंने कहा,
“मुझे लगा था कि दोबारा अनशन की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार को देखकर मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।”
देशभर से मिल रहा समर्थन
सोनम वांगचुक के आंदोलन को विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन मिल रहा है।
उनके साथ अनशन कर रहे नेहा, आमीन, दीपक और मनीष की भी तबीयत बिगड़ने की खबर है। इनमें ब्लड शुगर कम होना और वजन घटना जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
फिल्म अभिनेता प्रकाश राज और प्रसिद्ध गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने सार्वजनिक रूप से इस आंदोलन का समर्थन किया है।
वहीं, 180 से अधिक वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर लद्दाख को जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बताते हुए वहां के पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
पहले भी कई बार कर चुके हैं अनशन
यह सोनम वांगचुक का छठा बड़ा अनशन है। उन्होंने कहा कि पहले उनके अनशन एक सप्ताह, फिर दो और तीन सप्ताह तक चले थे, लेकिन इस बार वे छह सप्ताह या मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लेकर बैठे हैं।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में लद्दाख आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में उन्हें जोधपुर जेल से रिहा किया गया।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय ने कहा है कि सरकार शांति, विश्वास और सार्थक संवाद के पक्ष में है। मंत्रालय का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी है और समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि फिलहाल वांगचुक की प्रमुख मांगों पर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा?
अब पूरे आंदोलन की नजर 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर टिकी हुई है। यदि उस दिन बड़ी संख्या में लोग आंदोलन से जुड़ते हैं, तो यह सरकार पर संवाद और समाधान की दिशा में दबाव बढ़ा सकता है।
वहीं, डॉक्टर लगातार वांगचुक की सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। यदि उनकी तबीयत और बिगड़ती है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
लेह की पहाड़ियों से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचा यह आंदोलन अब केवल लद्दाख के अधिकारों का सवाल नहीं रह गया है। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के भविष्य, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक अधिकार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत तथा 20 जुलाई का संसद मार्च इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकता है।
