रायपुर(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसर दिन शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मुद्दा सदन के प्रमुख चर्चा बन गे। शिक्षक भर्ती अउ TET ले जुड़े हजारों अभ्यर्थी मन बर महत्वपूर्ण ए विषय ऊपर सत्ता पक्ष अउ विपक्ष के बीच गंभीर बहस देखे ला मिलिस। विपक्ष सरकार ले जानना चाहत रहिस कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद का राज्य सरकार शिक्षक मन ला TET ले राहत देय बर कोनो नई नीति बनावत हे या नइ।
ए मुद्दा उठतिच सदन मं शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था अउ न्यायालय के आदेश के पालन ला लेके विस्तार ले चर्चा होइस। सरकार के तरफ ले स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव साफ कर दीन कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश ले अलग कोनो फैसला नइ लेही। ओमन कहिन कि फिलहाल TET मं विशेष छूट या राहत देय के कोनो प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नइ हे।
प्रश्नकाल मं उठिस TET के मुद्दा
मानसून सत्र के प्रश्नकाल के दौरान विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े स्कूल शिक्षा विभाग ले सवाल पूछिन। ओमन जानना चाहिन कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद राज्य सरकार शिक्षक मन बर TET संबंधी नियम मं बदलाव करे के तैयारी करत हे का?
विधायक के सवाल के उद्देश्य ए जानना रहिस कि राज्य सरकार का शिक्षक मन ला राहत देय बर कोनो विशेष नीति बना सकथे या वर्तमान व्यवस्था जइसे के तइसे बने रहिही।
शिक्षा मंत्री के स्पष्ट जवाब
सवाल के जवाब देत स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव कहिन कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) राष्ट्रीय स्तर के निर्धारित मानक अउ न्यायालय के निर्देश ले संचालित होथे।
ओमन स्पष्ट शब्द मं कहिन कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पूरी तरह पालन करे जाही अउ सरकार न्यायालय के दिशा-निर्देश ले अलग हटके कोनो निर्णय नइ ले सकय।
मंत्री कहिन कि वर्तमान समय मं TET मं कोनो अतिरिक्त छूट, विशेष राहत या अलग नीति लागू करे ऊपर सरकार विचार नइ करत हे।
TET काबर जरूरी हे?
शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teacher Eligibility Test – TET) देश भर मं प्राथमिक अउ उच्च प्राथमिक स्कूल मन मं शिक्षक नियुक्ति बर एक जरूरी पात्रता परीक्षा आय।
ए परीक्षा के उद्देश्य ए सुनिश्चित करना होथे कि स्कूल मं पढ़ाय बर आवत शिक्षक मन के पास आवश्यक ज्ञान, शिक्षण कौशल अउ गुणवत्ता मौजूद होवय।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति अउ राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देश के अनुसार TET कई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाथे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसला के महत्व
सदन मं चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के संदर्भ घलो सामने आइस। मंत्री कहिन कि राज्य सरकार न्यायपालिका के निर्णय के पूरा सम्मान करथे।
ओमन कहिन कि न्यायालय जेन दिशा-निर्देश जारी करही, राज्य सरकार ओही के अनुसार आगे के कार्रवाई करही।
ए बयान ले साफ संकेत मिलिस कि TET संबंधी कोनो भी बदलाव न्यायालय के कानूनी व्यवस्था अउ लागू नियम के भीतर रहिकेच संभव होही।
हजारों अभ्यर्थी मन के नजर सरकार ऊपर
छत्तीसगढ़ मं हर साल हजारों युवा शिक्षक बने के सपना ले TET परीक्षा मं शामिल होथें।
ए कारण विधानसभा मं उठे ए सवाल ऊपर शिक्षक अभ्यर्थी मन के खास नजर रहिस। कई अभ्यर्थी उम्मीद करत रहिन कि सरकार कोनो राहत या नई व्यवस्था के घोषणा कर सकथे।
फेर शिक्षा मंत्री के जवाब ले साफ होगे कि फिलहाल सरकार वर्तमान नियम मं कोनो बदलाव करे के पक्ष मं नइ हे।
शिक्षा विभाग के प्राथमिकता
सरकार के मुताबिक राज्य के प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना हे।
शिक्षा मंत्री कहिन कि योग्य अउ प्रशिक्षित शिक्षक मन के नियुक्ति लेच स्कूल शिक्षा के स्तर बेहतर हो सकथे। ए कारण पात्रता संबंधी मानक ला कमजोर करना उचित नइ होही।
ओमन कहिन कि सरकार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया ला पारदर्शी, नियमसम्मत अउ न्यायालय के निर्देश के अनुरूप बनाए रखे बर प्रतिबद्ध हे।
राजनीतिक बहस के केंद्र मं TET
मानसून सत्र के दौरान TET के मुद्दा राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बनिस। विपक्ष शिक्षक मन के मांग अउ अभ्यर्थी मन के चिंता के हवाला देत सरकार ले राहत के संभावना पूछिस।
वहीं सरकार अपन जवाब मं कानूनी प्रक्रिया अउ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन ला सर्वोच्च प्राथमिकता बताइस।
ए बहस ले साफ होगे कि आने वाला समय मं शिक्षक भर्ती अउ TET संबंधी विषय राजनीतिक अउ प्रशासनिक स्तर ऊपर चर्चा के केंद्र बने रहि सकथे।
अब आगे का?
फिलहाल विधानसभा मं सरकार के जवाब ले ए स्पष्ट होगे कि TET संबंधी वर्तमान नियम मं तत्काल कोनो बदलाव नइ होही।
अगर भविष्य मं सुप्रीम कोर्ट या संबंधित राष्ट्रीय संस्थान मन ले कोनो नया दिशा-निर्देश जारी होही, त राज्य सरकार ओही के आधार मं फैसला ले सकथे।
ए बीच TET परीक्षा के तैयारी करत हजारों अभ्यर्थी मन बर वर्तमान पात्रता नियम यथावत लागू रहिही।
विधानसभा मं उठे ए मुद्दा एक बार फेर बताथे कि शिक्षा, शिक्षक भर्ती अउ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था आज घलो प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विषय मन मं शामिल हे। सरकार के रुख साफ हे—न्यायालय के आदेश सर्वोपरि हे अउ शिक्षा व्यवस्था मं कोनो भी फैसला कानून अउ निर्धारित प्रक्रिया के तहतच लेय जाही।
