- जनांदगांव के मोहारा चौकी क्षेत्र के ग्राम बिजनापुर में टूटे बिजली तार की चपेट में आने से छह मवेशियों की मौत हो गई। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और बिजली लाइनों के नियमित रखरखाव की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर।
राजनांदगांव,(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । जिले के मोहारा चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बिजनापुर में रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। खेत के पास टूटकर जमीन पर गिरे बिजली के तार की चपेट में आने से छह मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रात के अंधड़ और बारिश के बाद हुआ हादसा
ग्रामीणों के अनुसार शनिवार देर रात क्षेत्र में तेज अंधड़ और बारिश हुई थी। खराब मौसम के कारण गांव के खेतों के समीप स्थित एक बिजली का खंभा क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। खंभा गिरने से हाई वोल्टेज बिजली के तार टूटकर जमीन पर फैल गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय इस घटना की जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन समय पर बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई और न ही मौके पर कोई तकनीकी दल पहुंचा।
रविवार सुबह जब गांव के पशुपालकों के मवेशी रोज की तरह चरने के लिए खेतों की ओर निकले, तब उन्हें जमीन पर फैले बिजली के तार दिखाई नहीं दिए। जैसे ही मवेशी तारों के संपर्क में आए, तेज करंट की चपेट में आ गए और छह मवेशियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
एक झटके में पशुपालकों को हुआ बड़ा आर्थिक नुकसान
ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशी केवल पशु नहीं बल्कि परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। खेती-किसानी और दुग्ध उत्पादन से जुड़े अधिकांश परिवारों के लिए ये मवेशी उनकी मेहनत की पूंजी होते हैं। ऐसे में एक साथ छह मवेशियों की मौत ने संबंधित पशुपालकों को गहरा आर्थिक और मानसिक आघात पहुंचाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से पाले गए मवेशियों का इस तरह अचानक चले जाना बेहद पीड़ादायक है। प्रभावित परिवारों ने शासन से उचित मुआवजा देने की मांग भी की है ताकि उन्हें हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।
ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने बिजली विभाग की लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह बताते हुए नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि यदि तेज बारिश और आंधी के बाद बिजली लाइनों का समय पर निरीक्षण किया जाता या बिजली आपूर्ति तत्काल बंद कर दी जाती, तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिले के विभिन्न हिस्सों में पहले भी बिजली के तार टूटने और करंट की चपेट में आने से मवेशियों की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन विभाग ने इससे कोई सबक नहीं लिया। नियमित रखरखाव और निगरानी के अभाव में ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जा रही हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और आंधी के मौसम में बिजली के खंभों और तारों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद कई स्थानों पर जर्जर खंभे और ढीले तार लंबे समय तक बिना मरम्मत के पड़े रहते हैं। यही लापरवाही कई बार बड़े हादसों का कारण बन जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि जिलेभर में बिजली लाइनों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाए ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति या पशु को इस प्रकार की दुर्घटना का सामना न करना पड़े।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने कई महत्वपूर्ण मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- जर्जर बिजली खंभों और तारों का तत्काल सर्वे एवं मरम्मत।
- आंधी और बारिश के बाद बिजली लाइनों का अनिवार्य निरीक्षण।
- टूटे तारों की सूचना मिलने पर तुरंत बिजली आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था।
- मृत मवेशियों के मालिकों को शीघ्र उचित आर्थिक सहायता।
- घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
हादसे की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचने की सूचना है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी तथा प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द राहत प्रदान की जाएगी।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि मानसून के दौरान बिजली व्यवस्था की नियमित निगरानी, जर्जर उपकरणों का समय पर रखरखाव और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
राजनांदगांव सहित प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में मानसून के दौरान बिजली से जुड़े हादसे चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। खेतों, चरागाहों और गांवों के आसपास फैले बिजली के तार यदि समय पर दुरुस्त न किए जाएं तो वे इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
बिजनापुर की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि बिजली व्यवस्था में लापरवाही केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि लोगों की जान-माल और आजीविका के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन और बिजली विभाग इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत बना पाते हैं।
