राजनांदगांव में लगातार चार दिनों की मूसलाधार बारिश से शिवनाथ नदी सहित जिले की नदियों का जलस्तर बढ़ा। मोंगरा बैराज समेत प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक तेज हुई, लेकिन किसानों के सामने जलभराव के कारण खरीफ बुआई की नई चुनौती खड़ी हो गई। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
राजनांदगांव,(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) पिछले चार दिनों से जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने मौसम का मिजा ज पूरी तरह बदल दिया है। जून महीने में बारिश की कमी के कारण जहां सूखे जैसी स्थिति बनने लगी थी, वहीं जुलाई की शुरुआत में हुई जोरदार वर्षा ने लोगों को बड़ी राहत दी है। लगातार बारिश के चलते शिवनाथ नदी समेत जिले की कई सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और उनमें तेज बहाव देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, प्रमुख जलाशयों और बैराजों में भी पानी की आवक बढ़ी है, हालांकि अधिकांश जलाशय अभी अपनी पूरी भराव क्षमता से काफी दूर हैं।
बारिश ने एक ओर जहां सूखे की आशंका को काफी हद तक कम कर दिया है, वहीं दूसरी ओर किसानों के सामने नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है।
शिवनाथ नदी में बढ़ा बहाव, नदियों का जलस्तर चढ़ा
लगातार हो रही वर्षा का सबसे अधिक असर जिले की प्रमुख जीवनदायिनी शिवनाथ नदी पर देखने को मिल रहा है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है और बहाव पहले की तुलना में काफी तेज हो गया है। इसके साथ ही जिले की अन्य छोटी-बड़ी नदियों और नालों में भी पानी का प्रवाह बढ़ गया है। कई निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बन गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है।
हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
किसानों को राहत भी, नई चिंता भी
जून महीने में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान खरीफ सीजन की बुआई को लेकर चिंतित थे। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहा था। लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में हुई लगातार बारिश ने खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचा दिया।
इसके बावजूद किसानों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण कई खेतों में अत्यधिक जलभराव हो गया है। ऐसे में बुआई का कार्य प्रभावित हो रहा है। किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों की सफल बुआई के लिए खेतों में संतुलित नमी आवश्यक होती है। यदि लगातार बारिश जारी रहती है तो खेतों में कृषि यंत्रों का संचालन और बीज बोने का कार्य कठिन हो जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अत्यधिक जलभराव लंबे समय तक बना रहने पर बीज अंकुरण और फसल उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में किसान फिलहाल बारिश थमने और मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
जलाशयों में बढ़ी पानी की आवक, लेकिन अभी लंबा सफर बाकी
लगातार बारिश का सकारात्मक असर जिले के प्रमुख जलाशयों और बैराजों में भी देखने को मिल रहा है। कैचमेंट क्षेत्रों से लगातार पानी आने के कारण जलस्तर में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि अधिकांश जलाशय अभी भी अपनी पूर्ण क्षमता से काफी नीचे हैं।
जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रमुख जलाशयों की स्थिति इस प्रकार है—
- मोंगरा बैराज – लगभग 13 प्रतिशत जलभराव
- सूखानाला जलाशय – लगभग 52 प्रतिशत जलभराव
- घुमरिया जलाशय – लगभग 28 प्रतिशत जलभराव
- खातूटोला जलाशय – लगभग 48 प्रतिशत जलभराव
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बारिश के बावजूद अभी जलाशयों को पूरी तरह भरने के लिए मानसून की निरंतर सक्रियता आवश्यक है। विशेष रूप से मोंगरा बैराज में केवल 13 प्रतिशत जलभराव होना यह संकेत देता है कि आगामी दिनों में अच्छी बारिश की आवश्यकता बनी हुई है।
महाराष्ट्र में बारिश का भी मिल सकता है लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार मोंगरा जलाशय के कैचमेंट एरिया का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र से भी प्रभावित होता है। यदि वहां लगातार अच्छी बारिश होती है तो उसका सीधा लाभ मोंगरा बैराज को मिल सकता है। आने वाले दिनों में कैचमेंट क्षेत्र से पानी की आवक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे जलाशयों का जलस्तर और बेहतर हो सकता है।
जून की चिंता पर जुलाई की राहत
इस वर्ष जून महीने में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण जिले में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी थी। किसान, आम नागरिक और प्रशासन सभी मानसून की कमजोर स्थिति को लेकर चिंतित थे। मौसम विभाग ने भी अल्प वर्षा की संभावना जताई थी, जिससे चिंता और बढ़ गई थी।
हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून ने जोरदार वापसी की है। लगातार चार दिनों की बारिश ने न केवल सूखे की आशंका को कम किया है बल्कि भूजल स्तर, नदी-नालों और जलाशयों में भी सुधार की उम्मीद जगा दी है।
प्रशासन रख रहा है लगातार नजर
जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग लगातार बांधों, बैराजों और नदियों के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में इसी तरह बारिश जारी रहती है तो जलभराव वाले क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। साथ ही किसानों को भी मौसम के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल जिले के लोग अच्छी बारिश से राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन किसानों की निगाहें अब आने वाले मौसम पर टिकी हैं। यदि बारिश संतुलित रही तो खरीफ सीजन के लिए यह बेहद लाभकारी साबित हो सकती है, जबकि अत्यधिक वर्षा कृषि कार्यों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
