कोरबा के मानिकपुर स्थित ओरिएंटल कॉलेज में जिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और कांग्रेस अजा प्रकोष्ठ ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया। जानिए नेताओं ने क्या कहा और छात्रों ने किन मुद्दों को उठाया।
कोरबा।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच कोरबा में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। जिला कांग्रेस कमेटी शहर, युवा कांग्रेस संगठन और कांग्रेस अनुसूचित जाति (अजा) प्रकोष्ठ ने संयुक्त रूप से मानिकपुर स्थित ओरिएंटल कॉलेज में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य NEET पेपर लीक सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए कथित अनियमितताओं के मुद्दे को छात्रों के बीच उठाना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करना रहा।
कार्यक्रम स्थल पर प्रोजेक्टर के माध्यम से ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे बड़ी संख्या में मौजूद छात्रों, शिक्षकों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने देखा। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
जिला कांग्रेस कमेटी शहर के अध्यक्ष मुकेश राठौर ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों और प्रशासनिक कमजोरियों के कारण देश की शिक्षा प्रणाली की नींव कमजोर हुई है।
उन्होंने कहा कि आज भारत की शिक्षा व्यवस्था दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है। पहली चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी है, जबकि दूसरी पूरी व्यवस्था यानी सिस्टम की खामियों से संबंधित है। उनका कहना था कि यदि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के युवाओं को उठाना पड़ेगा।
युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राकेश पंकज ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं से पेपर लीक माफिया और सत्ता के बीच कथित सांठगांठ की आशंकाएं भी मजबूत हुई हैं।
उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो उनका मनोबल टूटता है। उन्होंने दावा किया कि NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद कई छात्रों ने मानसिक तनाव का सामना किया और यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है।
राकेश पंकज ने आगे कहा कि इतने बड़े विवाद के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो प्रधानमंत्री ने इस विषय पर पर्याप्त जवाबदेही दिखाई और न ही शिक्षा मंत्रालय की ओर से ठोस कार्रवाई का संदेश सामने आया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष नारायण कुर्रे ने कहा कि वर्ष 2024 से अब तक कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाएं विवादों में रही हैं। उन्होंने कहा कि NEET, UGC-NET, CSIR-NET, PG CUET, JEE Main, BPSC, BSSSB और UPSC से जुड़ी परीक्षाओं में कहीं प्रश्नपत्र लीक होने, कहीं परीक्षा रद्द होने, कहीं प्रश्नपत्रों में त्रुटियां, परिणामों में देरी और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं जैसे मामले सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है और छात्रों के बीच असमंजस का माहौल पैदा किया है। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी परीक्षा प्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी चिंताएं साझा कीं। कई छात्रों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों की मेहनत और परिवारों की आर्थिक भागीदारी शामिल होती है। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर लाखों युवाओं के भविष्य और उनके आत्मविश्वास पर पड़ता है।
ओरिएंटल कॉलेज के प्राध्यापकों एवं शिक्षकों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और युवाओं के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में कांग्रेस संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, कांग्रेस अजा प्रकोष्ठ के सदस्य, ओरिएंटल कॉलेज के प्रोफेसर, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच इस तरह के आयोजन यह संकेत देते हैं कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे अब राजनीतिक विमर्श का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे विषय छात्रों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के एजेंडे में भी प्रमुखता से बने रहने की संभावना है।
