कोरबा जिला के कुदमुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत तौलीपाली गांव मं जंगली हाथी मन आंगनबाड़ी केंद्र मं घुसके रेडी टू ईट, चांवल अउ दूसर खाद्य सामग्री ला नुकसान पहुंचाइन। घटना के बाद नौनिहाल मन के पोषण व्यवस्था प्रभावित होगे। पढ़व पूरा खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। मानव अउ जंगली हाथी मन के बीच बढ़त द्वंद ला रोकई बर शासन-प्रशासन भलेच कई तरह के दावा करत होवय, फेर जमीनी हकीकत आज घलो अलग नजर आथे। कोरबा जिला मं हाथी मन के आबादी वाले इलाका मं लगातार घुसपैठ ले गांव वाले मन डरे-सहमे जिनगी जियत हवंय। अब फेर एक नई घटना सामने आइस, जिहां जंगली हाथी मन आंगनबाड़ी केंद्र ला निशाना बनाके भीतर रखे चांवल, खाद्यान्न अउ नान-नान लइका मन बर रखे रेडी टू ईट पोषाहार ला खा गिन। घटना के बाद आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन ऊपर संकट खड़ा होगे हवय।
ए घटना कोरबा वनमंडल के कुदमुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत उरगा-हाटी राजमार्ग मं बसे ग्राम पंचायत तौलीपाली के आंगनबाड़ी केंद्र के बताय जात हवय। गांव वाले मन के मुताबिक हाथी मन रात के बखत गांव मं पहुंचिन अउ सीधा आंगनबाड़ी भवन तक आ गिन।
खिड़की तोड़के भीतर पहुंचिन हाथी
जानकारी के मुताबिक, हाथी मन आंगनबाड़ी केंद्र के पिछला हिस्सा मं लगे खिड़की ला तोड़ डारिन। खिड़की टूटे के बाद हाथी मन अपन सूंड के सहारे भीतर रखे खाद्य सामग्री तक पहुंच गिन। केंद्र मं रखे चांवल, दूसर राशन सामग्री अउ नौनिहाल मन बर सुरक्षित रखे रेडी टू ईट पोषाहार ला हाथी मन खा डारिन।
घटना के बाद जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिहान केंद्र पहुंचिन, त भवन के हालत देखके हैरान रहिगिन। केंद्र के भीतर चांवल बिखरे रहिस, रेडी टू ईट के पैकेट फटे रहिन अउ कई जगह हाथी के पैरों के निशान साफ दिखाई देत रहिन। एही आधार ऊपर हाथी मन के उत्पात के पुष्टि होइस।
नौनिहाल मन के पोषण व्यवस्था प्रभावित
आंगनबाड़ी केंद्र सिरिफ पढ़ई-लिखई के जगह नइ, बल्कि गांव के छोटे-छोटे लइका मन, गर्भवती महिला अउ धात्री माता मन बर पोषण योजना के प्रमुख केंद्र होथे। एही केंद्र ले रेडी टू ईट, पूरक पोषण आहार अउ दूसर जरूरी खाद्य सामग्री बांटे जाथे।
हाथी मन के हमला के बाद केंद्र मं रखे अधिकांश खाद्य सामग्री खराब होगे या खतम होगे। ए स्थिति मं कार्यकर्ता मन के सामने सबसे बड़े चुनौती ए हवय कि अब नौनिहाल मन ला नियमित पोषण आहार कइसे उपलब्ध कराय जाही।
कार्यकर्ता मन के सामने बढ़िस चिंता
घटना के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मन चिंता मं हवंय। भवन के नुकसान होय अउ खाद्य सामग्री खतम होय ले केंद्र के नियमित संचालन प्रभावित हो सकथे। गांव वाले मन घलो कहत हवंय कि जंगली हाथी मन के लगातार आवागमन ले कर्मचारी मन डरे रहिथें अउ रात के बखत गांव मं डर के माहौल बने रहिथे।
कार्यकर्ता मन के कहना हवय कि भवन के मरम्मत अउ नवा खाद्यान्न उपलब्ध कराय बिना सामान्य व्यवस्था बहाल करना आसान नई होही।
अधिकारी मन देइन वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश
घटना के जानकारी मिलतेच संबंधित विभाग के अधिकारी मन स्थिति के जायजा लिहिन। अधिकारी मन आंगनबाड़ी संचालन प्रभावित नई होय, ए खातिर वैकल्पिक व्यवस्था करे के निर्देश जारी करिन। जरूरत पड़ही त अस्थायी रूप ले दूसर भवन मं केंद्र चलाय जाही, ताकि लइका मन अउ हितग्राही मन ला पोषण आहार मिलत रहय।
संगे-संग खराब होय खाद्यान्न अउ रेडी टू ईट के जगह नवा सामग्री उपलब्ध कराय के प्रक्रिया घलो शुरू करे के बात कहे गे हवय।
लगातार बढ़त मानव-हाथी द्वंद
कोरबा सहित उत्तर छत्तीसगढ़ के कई इलाका मं मानव-हाथी द्वंद अब गंभीर समस्या बन गे हवय। जंगल ले निकलके हाथी मन अब लगातार गांव, खेत, स्कूल, आंगनबाड़ी, गोदाम अउ घर तक पहुंचत हवंय। कई जगह फसल बर्बाद होवत हवय, त कई बार मकान अउ सरकारी भवन मन घलो नुकसान के शिकार होवत हवंय।
वन विभाग हाथी मन के निगरानी, मुनादी, अलर्ट सिस्टम अउ बचाव दल के माध्यम ले स्थिति संभाले के कोशिश करत हवय, फेर हाथी मन के लगातार बदलत रास्ता अउ भोजन के तलाश मं आबादी क्षेत्र तक पहुंचना अभी घलो चुनौती बने हवय।
ग्रामीण मन मं डर के माहौल
तौलीपाली गांव के लोगन बताथें कि हाथी मन के आवाजाही अब सामान्य बात बन गे हवय। संझा होतेच गांव वाले मन सतर्क हो जाथें अउ रात भर डर के माहौल रहिथे। किसान मन घलो अपन फसल अउ घर-दुआर के सुरक्षा ला लेके चिंता मं रहिथें।
ग्रामीण मन शासन अउ वन विभाग ले मांग करत हवंय कि हाथी मन के आवाजाही ऊपर स्थायी नियंत्रण करे बर प्रभावी योजना बनाय जाय, ताकि गांव के लोगन सुरक्षित रह सकंय अउ सरकारी संस्थान मन ला बार-बार नुकसान नई होय।
प्रशासन के सामने चुनौती
ए घटना फेर एक बार ए सवाल ला सामने लानिस कि मानव-हाथी द्वंद ला रोकई बर बनाय योजना मन के असर जमीनी स्तर मं कतका दिखत हवय। आंगनबाड़ी जइसने महत्वपूर्ण केंद्र मं नुकसान होय ले सिरिफ सरकारी संपत्ति के हानि नइ होइस, बल्कि नौनिहाल मन के पोषण व्यवस्था घलो प्रभावित होइस।
फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करे मं जुटे हवय, फेर ग्रामीण मन चाहत हवंय कि भविष्य मं अइसने घटना के पुनरावृत्ति रोकई बर ठोस अउ दीर्घकालिक उपाय करे जावय।
