कोरबा में रविशंकर नगर–दादर–नकटीखार सड़क पहली बारिश में कीचड़ और जलभराव से बदहाल हो गई। गड्ढों, अधूरे निर्माण और दादर नाले की समस्या से लोग परेशान। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कोरबा।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) शहर में यातायात का दबाव कम करने और लोगों को बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से घंटाघर से रविशंकर नगर होते हुए दादर और नकटीखार तक सड़क का निर्माण कराया गया था। लेकिन पहली ही बारिश ने इस सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। वर्तमान स्थिति यह है कि सड़क जगह-जगह जलभराव, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इससे रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों, राहगीरों और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के कारण सड़क पर कई स्थानों पर पानी भर गया है, जिससे गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक जोखिम में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बीते कुछ दिनों में कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। वाहन चालक अचानक गड्ढों में गिर रहे हैं, जिससे उन्हें चोटें भी आ रही हैं। शाम और रात के समय स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि पानी से भरे गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
दादर नाला हर साल बनता है मुसीबत का कारण
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दादर नाला वर्षों से क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल है। हर मानसून में नाले का जलस्तर बढ़ने से आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। कई घरों और बस्तियों में पानी घुसने की नौबत आ जाती है, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
लोगों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति दोहराई जाती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल औपचारिक निरीक्षण और आश्वासन तक सीमित रह जाते हैं। नाले के जीर्णोद्धार की योजना वर्षों से अधूरी पड़ी हुई है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
बरसात के बीच शुरू हुआ सड़क चौड़ीकरण, अधूरा काम बना परेशानी की वजह
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य ऐसे समय शुरू किया गया, जब मानसून की दस्तक हो चुकी थी। निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया और बरसात शुरू होने के बाद सड़क की स्थिति तेजी से बिगड़ गई। कई स्थानों पर निर्माण सामग्री और अधूरी खुदाई के कारण आवागमन और अधिक मुश्किल हो गया है।
लोगों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाता, तो आज इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती। पहली ही बारिश में सड़क का उखड़ना और कीचड़ में बदल जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
नए पुल का प्रस्ताव भी वर्षों से अधर में
दादर नाले पर नए पुल के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार इसके लिए प्रस्ताव भी तैयार किया गया था, लेकिन आज तक वह फाइलों से बाहर नहीं निकल सका। पुराने पुल और जर्जर सड़क के कारण हर मानसून में लोगों को जोखिम उठाकर सफर करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल और नाले का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता तो आज क्षेत्र को इस तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।
रद्दिया पर्व से पहले बढ़ी चिंता
ग्राम दादर में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला रद्दिया पर्व पूरे क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु इसी सड़क के माध्यम से आयोजन स्थल तक पहुंचते हैं। इस वर्ष भी पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन सड़क की वर्तमान स्थिति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहेगी।
स्थानीय लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि सड़क, नाला और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल चुनावी वादों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि सड़क की जर्जर हालत, अधूरा नाला निर्माण और वर्षों से लंबित पुल परियोजना विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को उजागर करती है। उनका मानना है कि यदि शीघ्र आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा दादर नाले के जीर्णोद्धार और नए पुल के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि दीर्घकालिक योजना बनाकर कार्य करने की आवश्यकता है।
पहली ही बारिश में सड़क का इस तरह बदहाल हो जाना न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी बताता है कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में समयबद्धता और निगरानी कितनी आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि लोगों की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और राहत पहुंचाने के लिए कितनी जल्दी प्रभावी कदम उठाते हैं।
