बिलासपुर मं आयोजित मंगलम महोत्सव के सेमी क्लासिकल नाचा प्रतियोगिता मं केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 एनटीपीसी के छात्रा याशिका राठौर जूनियर वर्ग मं तीसर स्थान हासिल करिस। एखर पहिली रायपुर मं घलो द्वितीय स्थान जीत चुके हवय। पढ़व पूरा छत्तीसगढ़ी समाचार।
बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। मेहनत, लगन अउ कला के प्रति समर्पण जब एक संग जुड़थे, त सफलता खुद रास्ता बनाके आथे। अइसने एक प्रेरणादायक उपलब्धि हासिल करे हवय केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 एनटीपीसी के छात्रा याशिका राठौर। बिलासपुर मं आयोजित मंगलम महोत्सव के सेमी क्लासिकल नाचा प्रतियोगिता मं याशिका जूनियर वर्ग मं तीसर स्थान हासिल करके अपन स्कूल, परिवार अउ पूरा क्षेत्र के नाम रोशन करिस।
ए उपलब्धि के बाद स्कूल परिसर मं खुशी के माहौल बन गे हवय। विद्यालय के प्राचार्य एस.के. साहू याशिका ला बधाई देत कहिन कि विद्यार्थी मन के अइसन सफलता दूसर छात्र-छात्रा मन बर घलो प्रेरणा के स्रोत बनथे। उनकर कहना रहिस कि पढ़ई के संग-संग कला, संस्कृति अउ खेल मं घलो विद्यार्थी मन के भागीदारी बहुत जरूरी हवय।
लगातार दूसरी बड़ी सफलता हासिल करिस याशिका
याशिका राठौर के ए सफलता सिरिफ एक प्रतियोगिता तक सीमित नइ हवय। एखर पहिली 3 अप्रैल ला रायपुर मं आयोजित संगीत कला एकेडमी के कार्यक्रम रंग मंदिर नटरंग मं घलो वो अपन प्रतिभा के शानदार प्रदर्शन कर चुके हवय। ओ प्रतियोगिता मं जूनियर वर्ग के सेमी क्लासिकल नाचा मं याशिका दूसर स्थान हासिल करे रहिस।
लगातार अलग-अलग मंच मं उत्कृष्ट प्रदर्शन ए बात के संकेत देथे कि याशिका अपन कला ला निखारय बर लगातार मेहनत करत हवय अउ हर प्रतियोगिता मं अपन प्रदर्शन बेहतर बनावत चलत हवय।
गुरु के मार्गदर्शन मं निखरत हवय प्रतिभा
हर सफल कलाकार के पीछे ओकर गुरु के महत्वपूर्ण भूमिका रहिथे। याशिका के नाचा के सफर मं घलो उनकर गुरु विष्णु निर्मलकर के विशेष योगदान बताय जात हवय।
गुरु विष्णु निर्मलकर के मार्गदर्शन मं याशिका लगातार शास्त्रीय अउ सेमी क्लासिकल नृत्य के बारीकियां सीखत हवय। नियमित अभ्यास, अनुशासन अउ मंच के अनुभव के कारण आज वो अलग-अलग सांस्कृतिक प्रतियोगिता मं बेहतर प्रदर्शन कर पा रहिस।
कला विशेषज्ञ मन के अनुसार, कम उमर मं मंच के अनुभव मिलना कलाकार बर भविष्य मं बहुत लाभदायक साबित होथे। एखर ले आत्मविश्वास बढ़थे अउ प्रस्तुति मं घलो निखार आथे।
परिवार के सहयोग ले मिलत हवय नई उड़ान
याशिका पुष्प पल्लव कॉलोनी, लाटा के रहइया हवय। वो सीमा राठौर अउ द्वारिका प्रसाद राठौर के सुपुत्री आय। परिवार के कहना हे कि याशिका ला बचपन ले नाचा मं विशेष रुचि रहिस, जेनला देखके ओमन हमेशा बेटी के प्रतिभा ला आगे बढ़ाय बर प्रोत्साहित करिन।
माता-पिता के सहयोग, गुरु के मार्गदर्शन अउ खुद के मेहनत के बल ऊपर याशिका आज लगातार सफलता के नई ऊंचाई छूवत हवय। परिवार घलो ए उपलब्धि ले बेहद खुश हवय अउ भविष्य मं अउ बड़े मंच मं बेहतर प्रदर्शन के उम्मीद जतावत हवय।
स्कूल बर बने गर्व के पल
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 एनटीपीसी बर घलो ए उपलब्धि गर्व के विषय बने हवय। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, स्कूल हमेशा विद्यार्थी मन ला पढ़ई के संग-संग सांस्कृतिक गतिविधि मं भाग लेय बर प्रोत्साहित करत हवय।
प्राचार्य एस.के. साहू कहिन कि शिक्षा के असली उद्देश्य सिरिफ परीक्षा मं अच्छे अंक लाना नइ, बल्कि विद्यार्थी मन के सर्वांगीण विकास करना घलो हवय। याशिका जइसने प्रतिभाशाली छात्रा मन दूसर विद्यार्थी मन बर प्रेरणा बनथें।
सांस्कृतिक मंच ले बढ़त हवय नई पहचान
मंगलम महोत्सव अउ रंग मंदिर नटरंग जइसने सांस्कृतिक मंच उभरत कलाकार मन ला अपन प्रतिभा दिखाय के अवसर देवथें। अइसन प्रतियोगिता मं भाग लेके छात्र-छात्रा मन मं आत्मविश्वास बढ़थे अउ कला के क्षेत्र मं आगे बढ़े के नई राह खुलथे।
विशेषज्ञ मन मानथें कि संस्कृति अउ कला के संरक्षण बर अइसन आयोजन जरूरी हवंय, काबर ए मंच ले नई पीढ़ी अपन परंपरा अउ भारतीय शास्त्रीय कला ले जुड़े रहिथे।
आगे घलो बड़े मंच मं बेहतर प्रदर्शन के उम्मीद
लगातार दू महत्वपूर्ण प्रतियोगिता मं शानदार प्रदर्शन के बाद अब याशिका ले भविष्य मं अउ बड़े राज्य स्तरीय अउ राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिता मं बेहतर प्रदर्शन के उम्मीद बढ़ गे हवय। परिवार, गुरु अउ स्कूल प्रबंधन ला भरोसा हवय कि वो अपन मेहनत अउ समर्पण ले आगे घलो जिला अउ प्रदेश के नाम रोशन करही।
याशिका के ए उपलब्धि ए बात के उदाहरण आय कि सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास अउ परिवार के सहयोग मिलय, त छोटे शहर के प्रतिभा घलो बड़े मंच मं अपन पहचान बना सकथें।
