छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ला पत्र लिखके मदरसा बोर्ड के जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाय के मांग करिन। धार्मिक शिक्षा संग विज्ञान, गणित, कंप्यूटर अउ अंग्रेजी जइसने आधुनिक विषय जोड़े के सुझाव घलो देइन। पढ़व पूरा खबर।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ मं मदरसा शिक्षा व्यवस्था ला लेके एक महत्वपूर्ण पहल सामने आइस हवय। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ला पत्र लिखके राज्य के मदरसा शिक्षा व्यवस्था मं व्यापक बदलाव करे के सुझाव दे हवंय। अपन पत्र मं उनकर कहना हे कि वर्तमान मदरसा बोर्ड के व्यवस्था के जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन करे जाए, ताकि मदरसा मं पढ़त विद्यार्थी मन ला धार्मिक शिक्षा के संग-संग आधुनिक शिक्षा घलो बेहतर ढंग ले मिल सके।
डॉ. सलीम राज के मुताबिक, समय के जरूरत ला देखते हुए शिक्षा व्यवस्था मं बदलाव जरूरी हो गे हवय। उनकर मानना हे कि धार्मिक शिक्षा अपन जगह महत्वपूर्ण हवय, फेर आज के प्रतिस्पर्धी दौर मं विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, अंग्रेजी अउ दूसर आधुनिक विषय मन के जानकारी घलो विद्यार्थी मन बर समान रूप ले जरूरी बन गे हवय।
मुख्यमंत्री ला लिखे पत्र मं रखिन कई महत्वपूर्ण सुझाव
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ला भेजे गे पत्र मं डॉ. सलीम राज कहिन कि मदरसा मं पढ़ई करइया छात्र-छात्रा मन ला अइसन शिक्षा मिलना चाही, जेन ले वो मन धार्मिक ज्ञान के संग आधुनिक दुनिया के जरूरत मुताबिक शिक्षा घलो हासिल कर सकंय।
उनकर कहना हे कि अगर शिक्षा व्यवस्था मं समय अनुसार सुधार होही, त मदरसा मं पढ़े वाले विद्यार्थी मन घलो उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा अउ रोजगार के क्षेत्र मं बेहतर अवसर हासिल कर सकही।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाय के सुझाव
पत्र मं डॉ. सलीम राज राज्य सरकार ला सुझाव दे हवंय कि वर्तमान मदरसा बोर्ड के जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन करे जाए। उनकर मानना हे कि नया प्राधिकरण शिक्षा के गुणवत्ता, पाठ्यक्रम अउ प्रशासनिक व्यवस्था ऊपर बेहतर ढंग ले काम कर सकही।
उनकर मुताबिक, ए संस्था धार्मिक शिक्षा के संरक्षण करत आधुनिक शिक्षा के विस्तार बर घलो प्रभावी भूमिका निभा सकथे।
धार्मिक पढ़ई संग आधुनिक विषय शामिल करे के बात
डॉ. सलीम राज अपन पत्र मं विशेष रूप ले ए बात ऊपर जोर दे हवंय कि मदरसा के पाठ्यक्रम मं अब समय के अनुसार बदलाव करे के जरूरत हवय। उनकर सुझाव हे कि धार्मिक शिक्षा के संग-संग विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, अंग्रेजी अउ दूसर आधुनिक विषय मन ला नियमित पाठ्यक्रम मं शामिल करे जाए।
उनकर कहना हे कि ए बदलाव ले विद्यार्थी मन सिरिफ धार्मिक शिक्षा तक सीमित नइ रहिहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा घलो प्राप्त कर सकहीं, जेन ले आगे चलके नौकरी, व्यवसाय अउ उच्च शिक्षा के क्षेत्र मं प्रतिस्पर्धा कर सकहीं।
पाठ्यक्रम निर्धारण समिति बनाय के घलो सुझाव
पत्र मं डॉ. सलीम राज सरकार ला ए सुझाव घलो दे हवंय कि मदरसा शिक्षा बर एक पाठ्यक्रम निर्धारण समिति गठित करे जाए।
ए समिति धार्मिक विद्वान, शिक्षा विशेषज्ञ अउ संबंधित विषय के जानकार मन के सहयोग ले अइसन नया पाठ्यक्रम तैयार करे, जेन मं धार्मिक अध्ययन के संग आधुनिक विषय मन के संतुलित समावेश होय। उनका मानना हे कि ए व्यवस्था ले शिक्षा के गुणवत्ता मं सुधार आ सकथे।
मुख्यधारा के शिक्षा अउ रोजगार ले जुड़ सकहीं विद्यार्थी
डॉ. सलीम राज के अनुसार, आज के समय मं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सिरिफ धार्मिक जानकारी तक सीमित नइ हो सकय। आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षा अउ बदलत रोजगार बाजार ला देखते हुए विद्यार्थी मन ला व्यापक ज्ञान मिलना जरूरी हवय।
उनकर कहना हे कि अगर मदरसा मं आधुनिक विषय पढ़ाय जाही, त विद्यार्थी मन आगे चलके कॉलेज, विश्वविद्यालय अउ अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षा मं घलो बेहतर प्रदर्शन कर सकहीं। ए बदलाव ले रोजगार के अवसर घलो बढ़ सकथे।
शिक्षा व्यवस्था मं सुधार ला लेके बढ़ सकथे चर्चा
डॉ. सलीम राज के ए सुझाव के बाद राज्य मं मदरसा शिक्षा व्यवस्था ऊपर नई चर्चा शुरू होए के संभावना जताय जा रहिस। शिक्षा विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन अउ संबंधित पक्ष मन ए विषय ऊपर अपन-अपन राय दे सकथें।
फिलहाल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ला भेजे गे ए पत्र ऊपर सरकार के ओर ले कोई आधिकारिक निर्णय सामने नइ आए हवय। अब देखना होही कि राज्य सरकार ए सुझाव मन ऊपर का फैसला लेथे।
सरकार के निर्णय ऊपर टिकी नजर
मदरसा शिक्षा मं सुधार संबंधी ए प्रस्ताव ऊपर अब शिक्षा जगत अउ अल्पसंख्यक समाज सहित कई वर्ग के नजर बने हवय। अगर सरकार ए दिशा मं आगे बढ़थे, त राज्य के मदरसा शिक्षा व्यवस्था मं महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा सकथे।
हालांकि, फिलहाल ए सिरिफ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष द्वारा भेजे गे सुझाव अउ अनुशंसा के रूप मं सामने आए हवय। अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर ऊपर लिया जाही।
