(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) | छत्तीसगढ़ ल आज देसभर मं “ऊर्जा के प्रदेश” के नाम ले जाने जाथे। ए सम्मान सिरिफ नाम भर नई, बल्कि राज्य के धरती मं दबे विशाल कोयला भंडार अऊ ओकर लगातार उत्पादन के कारण मिलिस हे। देस के कुल कोयला भंडार के करीब 18 प्रतिशत हिस्सा अकेल्ला छत्तीसगढ़ मं मौजूद हे। एखर कारण बिजली उत्पादन ले लेकर इस्पात, सीमेंट अऊ कई बड़े उद्योग मन के जरूरत पूरा करे मं राज्य के भूमिका बहुते महत्वपूर्ण बन गे हे।
भारत सरकार के उपलब्ध आंकड़ा अनुसार, छत्तीसगढ़ मं लगभग 56,036 मिलियन टन कोयला भंडार मौजूद हे, जबकि हर साल 207 मिलियन टन ले जियादा कोयला के उत्पादन होवत हे। ए उत्पादन के 90 प्रतिशत ले जियादा हिस्सा सरकारी क्षेत्र के खदान मन ले आथे, जेन ह राज्य के आर्थिक विकास अऊ देश के ऊर्जा सुरक्षा दूनों बर आधार बनिस हे।
SECL ह शासकीय खदान मन के मुख्य आधार
छत्तीसगढ़ के अधिकांश शासकीय कोयला खदान मन के संचालन साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) करत हे। SECL, कोल इंडिया लिमिटेड के एक प्रमुख सहायक कंपनी आय, जेनकर मुख्यालय बिलासपुर मं स्थित हे। ए कंपनी के स्थापना साल 1985 मं करे गे रहिस।
आज SECL ह छत्तीसगढ़ अऊ मध्यप्रदेश दूनों राज्य मं कुल 92 कोयला खदान के संचालन करत हे। एमा छत्तीसगढ़ मं 70 भूमिगत, 21 ओपनकास्ट अऊ 1 मिश्रित प्रकृति के खदान शामिल हवंय। अलग-अलग सरकारी रिपोर्ट मन के मुताबिक राज्य मं कुल 90 ले जियादा शासकीय कोयला खदान सक्रिय हें।
एखर अलावा कुछ राज्य सरकार के उपक्रम अऊ सार्वजनिक क्षेत्र के दूसर कंपनी मन घलो खनन के काम करत हें, फेर उत्पादन के मुख्य जिम्मेदारी आज घलो SECL के ऊपर हे।
कोरबा: देस के सबसे बड़े कोयला उत्पादन केंद्र मं एक
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला ह कोयला उत्पादन के सबसे बड़े केंद्र मन मं गिने जाथे। ए जिला मं स्थित गेवरा, कुसमुंडा अऊ दीपका जइसने मेगा परियोजना सिरिफ छत्तीसगढ़ नई, बल्कि दुनिया भर मं अपन पहचान बना चुके हें।
गेवरा खदान
गेवरा ओपनकास्ट खदान के शुरुआत साल 1981 मं होइस। आज एला दुनिया के दूसर सबसे बड़े कोयला खदान के रूप मं माने जाथे। वित्तीय वर्ष 2023-24 मं ए खदान ले करीब 59 मिलियन टन कोयला उत्पादन होइस। वर्तमान मं एखर वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 70 मिलियन टन तक पहुंच चुके हे।
कुसमुंडा परियोजना
1970 के दशक मं शुरू होए कुसमुंडा परियोजना आज दुनिया के चौथा सबसे बड़े कोयला खदान मं गिने जाथे। साल 2023-24 मं ए खदान ले 50 मिलियन टन ले जियादा कोयला उत्पादन दर्ज करे गे हे।
दीपका परियोजना
1980 के दशक मं शुरू होए दीपका परियोजना घलो SECL के सबसे सफल मेगा परियोजना मन मं शामिल हे। एखर सालाना उत्पादन क्षमता 35 मिलियन टन ले जियादा माने जाथे।
पुराना खदान मन के आज घलो बने हे महत्वपूर्ण भूमिका
कोरिया जिला के चिरमिरी छत्तीसगढ़ के सबसे पुराना कोयला क्षेत्र मन मं एक आय। ए इलाका मं 1930 के दशक ले कोयला खनन के काम शुरू होइस। आज घलो भूमिगत अऊ ओपनकास्ट दूनों तरीका ले खनन जारी हे।
सूरजपुर के बिश्रामपुर क्षेत्र मं 1960 के दशक ले भूमिगत खनन होवत आथे। ए इलाका लंबे समय ले SECL के महत्वपूर्ण उत्पादन क्षेत्र बने रहिस हे।
कोरबा के मानिकपुर परियोजना के शुरुआत 1964-65 मं होइस, जबकि सरगुजा के अमेरा एक्सटेंशन परियोजना बर 2016 मं भूमि अधिग्रहण के काम पूरा करे गे रहिस।
वाणिज्यिक कोयला खनन के बाद बदलत तस्वीर
साल 2020 मं केंद्र सरकार ह वाणिज्यिक कोयला खनन के अनुमति देइस। एखर बाद छत्तीसगढ़ मं घलो कई कोयला ब्लॉक के नीलामी होइस।
गारे पालमा IV/6 अऊ सुरसा जइसने ब्लॉक मन वाणिज्यिक खनन बर आवंटित करे गें। गारे पालमा ब्लॉक मं लगभग 166.98 मिलियन टन कोयला भंडार के अनुमान लगाय गे हे। ए परियोजना ले हजारों रोजगार के संभावना जताय जात हे।
हालांकि, राज्य मं आज घलो कोयला उत्पादन के सबसे बड़े हिस्से के जिम्मेदारी SECL के पुराना शासकीय परियोजना मन ऊपर हे।
राजस्व अऊ रोजगार मं अहम योगदान
छत्तीसगढ़ मं कोयला उद्योग सिरिफ बिजली उत्पादन तक सीमित नई हे। ए क्षेत्र लाखों परिवार मन बर रोजगार के साधन घलो बनिस हे। साल 2023-24 मं राज्य ले 207.255 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज करे गे, जेन ले छत्तीसगढ़ देश मं ओडिशा के बाद दूसर सबसे बड़े कोयला उत्पादक राज्य बनिस।
कोयला उत्पादन ले राज्य सरकार ल रॉयल्टी, जिला खनिज न्यास (DMF) अऊ अलग-अलग कर के माध्यम ले हजारों करोड़ रुपिया के राजस्व मिलथे। ए रकम ले सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा अऊ आधारभूत सुविधा के विकास मं घलो मदद मिलथे।
पर्यावरण अऊ विस्थापन के चुनौती आज घलो कायम
जहां एक ओर कोयला उद्योग आर्थिक विकास बर जरूरी माने जाथे, वहीं दूसर ओर पर्यावरण अऊ विस्थापन के मुद्दा घलो लगातार सामने आवत रहिथे।
हसदेव अरण्य क्षेत्र मं परसा कोयला ब्लॉक के खनन ल लेके लंबे समय ले पर्यावरणविद, आदिवासी समाज अऊ स्थानीय ग्रामीण मन विरोध जतावत आथें। जंगल संरक्षण अऊ आजीविका के मुद्दा ए क्षेत्र मं लगातार चर्चा के विषय बने रहिस हे।
सरगुजा के अमेरा एक्सटेंशन परियोजना मं भूमि अधिग्रहण के बाद कई गांव के ग्रामीण मन अपन मांग ल लेके आंदोलन घलो कर चुके हें।
भविष्य मं हरियर ऊर्जा ऊपर घलो फोकस
कोयला उत्पादन के संग-संग अब SECL हरियर ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) ऊपर घलो तेजी ले काम करत हे। कंपनी के लक्ष्य हे कि साल 2027-28 तक करीब 626 मेगावाट सोलर ऊर्जा विकसित करे जाए।
बंद हो चुके कोयला खदान मन के जमीन मं सोलर प्लांट स्थापित करे के योजना बनाय जात हे। एखर संग कोल गैसीफिकेशन अऊ फ्लोटिंग सोलर परियोजना ऊपर घलो काम चलत हे।
CSR के तहत SECL ह शिक्षा, स्वास्थ्य अऊ महिला सशक्तिकरण जइसने क्षेत्र मं लगातार निवेश करत हे। साल 2024-25 बर कंपनी ह करीब 170 करोड़ रुपिया CSR मद मं स्वीकृत करे हे।
छत्तीसगढ़ के शासकीय कोयला खदान सिरिफ राज्य के आर्थिक मजबूती के आधार नई, बल्कि पूरा देश के ऊर्जा सुरक्षा के सबसे बड़े स्तंभ मन मं एक हें। गेवरा, कुसमुंडा, दीपका अऊ चिरमिरी जइसने परियोजना मन दशकों ले देश के औद्योगिक विकास मं महत्वपूर्ण योगदान देत आथें।
आने वाले समय मं वाणिज्यिक खनन, आधुनिक तकनीक अऊ हरियर ऊर्जा परियोजना के विस्तार ले कोयला उद्योग मं नई बदलाव जरूर देखे ल मिलही। हालांकि, ए विकास के संग पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय ग्रामीण मन के हित अऊ संतुलित विकास ऊपर बराबर ध्यान देना घलो जरूरी रहिही। यही संतुलन छत्तीसगढ़ के ऊर्जा विकास के भविष्य ल अउ मजबूत बना सकथे।
